अंटार्कटिका पर पहले इंसानी कदम पड़े थे रोआल्ड एमंडसन के

अंटार्कटिका पर पहले इंसानी कदम पड़े थे रोआल्ड एमंडसन के

अंटार्कटिका

अंटार्कटिका पर 111 साल पहले धरती के दक्षिणी ध्रुव, यानी अंटार्कटिका पर पहले इंसानी कदम पड़े थे। ये कारनामा किया था नार्वे के रोआल्ड एमंडसन ने। दुनिया का सबसे ठंडा इलाका अंटार्कटिका जहां सर्दियों में दिन नहीं होता और गर्मी में रात नहीं होती जमीन पर डेढ़ किलोमीटर मोटी बर्फ जमी रहती है।अंटार्कटिका का औसत तापमान माइनस 50 डिग्री सेल्सियस होता है। यहां चलने वाली ठंडी हवाओं की रफ्तार 321 किमी प्रति घंटे तक हो सकती है।अंटार्कटिका पर पहले इंसानी कदम पड़े थे रोआल्ड एमंडसन के। जब यात्रा शुरू हुई तो इस ग्रुप में 19 आदमी, 97 कुत्ते, 4 सूअर, 6 कबूतर भी शामिल थे।

रोआल्ड एमंडसन दुनिया के कई हिस्सों की सैर कर चुके थे

इसके अलावा एक कैनरी साथ थी। लेकिन रोआल्ड एमंडसन जब दक्षिणी ध्रुव पर नार्वे का झंडा फहराकर लौटे तो उनके साथ टीम के पांच लोग और 11 कुत्ते ही थे।रोआल्ड एमंडसन दुनिया के कई हिस्सों की सैर कर चुके थे। अब उनका मन दुनिया के सबसे ठंडे इलाके को एक्स्प्लोर करने का था। इसके लिए उन्होंने एक टीम बनाई और सबसे कहा कि हम अंटार्कटिका पर जाएंगे। यानी जिधर जाने का प्लान उन्होंने सोचा उसके ठीक उल्टा जाने की बात करके अपने पसंद के लोगों को चुना।यात्रा की प्लानिंग की और उस वक्त की सबसे जानी-मानी और जांबाज नाव ‘फ्रैम’ पर बैठ कर निकल पड़े।

1860 मील की यात्रा पूरी करने में कुत्तों की भरपूर मदद ली

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एमंडसन ने अपनी 1860 मील की यात्रा पूरी करने में इन कुत्तों की भरपूर मदद ली।एमंडसन के कुत्तों को सामान्य कुत्ता नहीं कहा जा सकता था। ये आक्रामक और तेज़ तर्रार थे। बर्फ पर डाइनिंग रूम, डॉरमेट्री, किचन सहित घर बनाए गए।यहां 19 साथियों ने दो माह तक 97 कुत्तों की मदद से बेस कैंप बनाया।एमंडसन ने अपनी डायरी में यहां का हाल लिखते हुए बताया, ‘हमने अपने बहादुर कुत्तों की मदद से 900 बॉक्सेज़ की ढ़ुलाई की और जब डे लाइट में दो माह बचे थे तो बेस कैंप में खाने की चीजें इकट्ठा करना शुरू किया।

कुत्तों को मारने की नौबत आई

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इस काम में कुत्तों की मदद ली जा रही थी लेकिन फिर कुत्तों को मारने की नौबत आई।’जिस दिशा में जाना था उस तरफ स्लेज (कुत्तों के सहारे खींची जाने वाली गाड़ी) खींच-खींच कर ले जाते, वहां पर कुछ मांस और खाने की चीजें स्टोर करते, दिशा का अंदाजा होता रहे इसलिए वहां एक झंडा लगाते और फिर लौट कर आ जाते थे।कैंप से आगे बढ़कर फूड डिपो बनाते वक्त एंडरसन को अंदाजा हुआ कि उन्होंने यात्रा में थोड़ी जल्दीबाजी कर दी है। यहीं उनकी अपने टीम के एक साथी के साथ झड़प भी हो गई, जिसके बाद उन्होंने तय किया कि सिर्फ पांच लोग ही साथ जाएंगे।

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8 कुत्तों की ठंड से मौत हो गई

 

एक समय ऐसा आया जब फूड डिपो बनाने के लिए टीम के साथ निकले एंडरसन को 80 मील दूरी पर तेज़ हवाओं और खराब मौसम का सामना करना पड़ा। इस दौरान 8 कुत्तों की ठंड से मौत हो गई।कुछ कुत्ते कमजोर और बीमार हो गए तय किया गया कि कमजोर कुत्तों को मारकर उनका मांस स्वस्थ और काम में आ रहे कुत्तों को दिया जाएगा।बर्फ पर कुत्तों के सहारे गाड़ी खींचते आगे बढ़ते हुए एक जगह ऐसी आई जहां कुत्तों को गोली मारनी पड़ी। उस रात उन्हें भूख इतनी थी कि उनके पास कुत्तों के मांस के अलावा कोई दूसरा चारा नहीं था। एंडरसन की टीम 20 मील प्रति घंटा के रफ्तार से चलती रही।

21 नवबंर को टीम ने अपना पहला कैंप बनाया

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-84 डिग्री तापमान, दुनिया की सबसे ठंडी हवाओं के बीच अंटार्कटिका पर साथ चल रहे बचे 52 कुत्तों में से कुछ और की ठंड से मौत हो गई और कुछ को गोली मार कर खत्म कर दिया गया।अंटार्कटिका पर जाने के पहले से तय था कि साथ आ रहे कुत्तों में से 24 को गोली मारी जाएगी और आगे के खाने का इंतजाम किया जाएगा।अपने कुत्तों के सहारे तीन दिन में लगभग 11 हजार फीट की चढ़ाई पार करने के बाद 21 नवबंर को टीम ने अपना पहला कैंप बनाया।सभी को अपने कुत्ते स्वयं मारने का आदेश हुआ और टीम के साथियों ने पहली बार कुत्ते का मांस खाया।

एंडरसन के लिए 13 दिसंबर की शाम क्रिसमस की तरह थी

इस जगह का नाम एंडरसन और उनके साथियों ने रखा- द बुचर्स कैंप। अपनी यात्रा में आगे बढ़ते हुए एमंडसन और उनके साथ बचे 16 कुत्तों ने 15 मील प्रतिदिन के एवरेज से आगे बढ़ते रहे और फिर तय समय से 10 दिन पहले वो अपनी जगह पहुंचने वाले थे कि उन्हें ब्लू आइस नाम की सुदंर आकृति दिखी।उन्हें पहली बार सूर्य की रोशनी दिखी और फिर बर्फ पर उसकी आकृति इतनी सुंदर थी कि एमंडसन ने उसे नाम दिया डेविल ग्लेशियर।एंडरसन के लिए 13 दिसंबर की शाम क्रिसमस की तरह थी। वो लिखते हैं,’मैं एक छोटे बच्चे की तरह खुश था।

एमंडसन ने 89 दिनों में 1,860 मील की दूरी तय की

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मैंने अपने देश (नार्वे) का झंडा निकाला और बाहर रख लिया। आखिरी बार दूरी मापने के यंत्र पर जीरो किया और आखिरी 15 किलोमीटर के लिए तैयार हो गए।’14 दिसंबर को चढ़ाई नहीं थी। सिर्फ बढ़ते जाना था। कुत्ते हांफ रहे थे और सही दिशा में बढ़ते जा रहे थे।एमंडसन ने अंटार्कटिका पर पहुंच कर तय किया कि नार्वे का झंडा सभी साथ मिलकर लगाएंगे।ठीक इसी वक्त उनके प्रतिद्वंदी स्कॉट, दूसरी दिशा से आ रहे थे और 330 मील पीछे थे। टेंट के भीतर एमंडसन ने उनके लिए एक पत्र छोड़ा। कम्पास रखा और फिर एक दूसरे से गले मिलकर लौटने को तैयार हो गए।

एमंडसन ने 89 दिनों में 1,860 मील की दूरी तय की, जो उनके निर्धारित समय से 10 दिन कम था। इसके अलावा कुछ और भी था जो कम रहा। उनके साथी और वफादार कुत्ते। एमंडसन के पास कुल 11 कुत्ते बचे, जो बाद में फिर कई यात्रियों के साथ अंटार्कटिका की सैर पर गए।

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