सर्दियों में सुबह उठकर कई बार शीशा देखने पर चेहरे और आंखों पर सूजन दिखाई देती है ,यह कुछ गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं की तरफ एक इशारा भी हो सकता है

सर्दियों में कई बार चेहरे और आंखों पर सूजन दिखाई देती है

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सर्दियों में सुबह उठकर कई बार शीशा देखने पर चेहरे और आंखों पर सूजन दिखाई देती है। आम तौर पर चेहरे, आंखों के आसपास और बॉडी के कुछ एरिया में सूजन वॉटर रिटेन्शन की वजह से होती है। लेकिन यह कुछ गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं की तरफ एक इशारा भी हो सकता है। डॉक्टर वाई पी सिंह से जानें इसका कारण और निवारण। सेल्युलाइटिस वायरल स्किन इन्फेक्शन में चेहरे पर सूजन आती है। आम तौर पर ब्लड वेसेल्स फैलती और सिंकुड़ती हैं। इन्फेक्शन की वजह से वेसेल्स खुल जाती हैं और लिक्विड लीक होने लगता है।

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कम या ज्यादा सोने से शरीर पर बुरा प्रभाव पड़ता है

इस स्थिति को रोज़ेशिया कहते हैं। इसमें चेहरे पर सूजन और लालिमा आ जाती है। अगर चेहरे पर सूजन के साथ दर्द और बेचैनी महसूस हो तो बिना देर किए हुए डॉक्टर को दिखाएं ताकि तत्काल इलाज शुरू हो सके।थायरॉइड की समस्या, रूमेटाइड अर्थराइटिस, साइनस इंफेक्शन, सिस्टमिक ल्यूपस एरिथेमेटोसस और किडनी रोग भी चेहरे और बॉडी में सूजन की वजह बन सकते हैं। 8 घंटे की नींद शरीर के लिए जरूरी है। इससे कम या ज्यादा सोने से शरीर पर बुरा प्रभाव पड़ता है। ज्यादा देर तक सोने से बॉडी फ्लूइड एक जगह पर जमा हो जाता है, जिससे चेहरे पर सूजन नजर आती है।

सख्त तकिए के इस्तेमाल से भी यह प्रॉब्लम होती है

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गलत करवट सोने या मोटे और सख्त तकिए के इस्तेमाल से भी यह प्रॉब्लम होती है। चेहरे और आंखों के आसपास सूजन आ रही है तो सबसे पहले डॉक्टर को दिखाएं, ताकि समस्या की असली वजह पता चल सके। शाम और रात के समय खाने में ज्यादा सोडियम युक्त आहार जैसे जंक फूड से बचें। बॉडी अगर फाइबर फूड्स के लिए सेंसटिव है तो अलसी, बादाम, अनार, सूखा अंजीर, गेहूं का चोकर, बाजरा, अंकुरित अनाज का सेवन न करें। किडनी की बीमारियों के कारण हर साल 24 लाख लोगों की मौत होती है।

किडनी से संबंधित बीमारियां मौतों का छठा सबसे बड़ा कारण हैं

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दुनियाभर में किडनी से संबंधित बीमारियां मौतों का छठा सबसे बड़ा कारण हैं। खानपान में लापरवाही और खराब जीवनशैली के कारण लोगों में किडनी की समस्याएं बढ़ती जा रही है। आमतौर पर यूरिन से ही इस बीमारी का पता चल जाता है, हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि कई मामलों में पैरों और आंखों में सूजन भी किडनी में किसी समस्या का संकेत हो सकता है। इसलिए अगर किसी व्यक्ति को सूजन की यह परेशानी लगाता बनी हुई है तो उन्हें डॉक्टरों की सलाह लेनी चाहिए। साथ ही एक बार किडनी फंक्शन टेस्ट भी करा लेना चाहिए।

दिन और रात में हाइड्रेटेड रहने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं

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इस टेस्ट में किडनी से संबंधित किसी भी परेशानी का पता चल जाएगा। डायबिटीज और मोटापे से पीड़ित लोगों को तो हर चार से छह माह में यह जांच करा लेनी चाहिए। रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट जैसे मैदा, पास्ता, सफेद शक्कर, डोनट, पेस्ट्री, केक, मिठाइयां, सोडा, बिस्किट, व्हाइट ब्रेड से परहेज करें। देर रात खाने से बचें, खाने के तुरंत बाद न सोएं। कोशिश करें कि पीठ के बल सोएं। दिन और रात में हाइड्रेटेड रहने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। अल्कोहॉलिक पदार्थों से परहेज करें। एलर्जी रिएक्शन के लिए नए स्किन केयर प्रोडक्ट्स का पैच टेस्ट करें।

सूजन न जाए तो तुरंत त्वचा रोग विशेषज्ञ से परामर्श लें

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अगर इन उपायों के बाद भी सूजन न जाए तो तुरंत त्वचा रोग विशेषज्ञ से परामर्श लें। थकान, कमजोरी और भूख कम लगना भी इस बीमारी के संकेत हो सकते हैं. इन लक्षणों की पहचान और उपचार से किडनी की गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है। अगर लक्षण दिखने पर भी लापरवाही की गई तो कुछ सालों बाद किडनी खराब हो जाती है और ट्रांसप्लांट तक की नौबत आ जाती है। किडनी को स्वस्थ रखने के लिए खानपान पर ध्यान देना बहुत जरूरी है। कोई भी ऐसी चीज नहीं खानी चाहिए, जिससे वजन तेजी से बढ़ता है। शरीर में पानी की कमी न होने दें।

खाने में नमक, मैदा और चीनी का कम से कम इस्तेमाल करें

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खाने में नमक, मैदा और चीनी का कम से कम इस्तेमाल करें। अगर आपक बीपी, शुगर के मरीज हैं तो नियमित रूप से यूरिन टेस्ट कराएं. अगर यूरिन में प्रोटीन बढ़ा हुआ है तो डॉक्टर से संपर्क करें. यदि आप आंखों और चेहरे पर आनेवाली सूजन से परेशान हैं तो सबसे पहले अपनी डायट पर ध्यान दें। अपने भोजन में ऐसी चीजों का सेवन बढ़ा दें, जो शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी को पूरा करती हैं। जैसे, हरी सब्जियां, अनार, टमाटर, चुकंदर और लाल शिमला मिर्च। इसके साथ ही मखाना भी खाएं।

क्योंकि मखाना आयरन से भरपूर होता है और यह शरीर में रक्त का संचार और ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाने का काम करता है। क्योंकि शरीर में कभी भी कोई गंभीर रोग तुरंत हावी नहीं होता है। बल्कि लंबे समय से हमारा शरीर हमें अपने अंदर पनपनेवाले रोगों की जानकारी दे रहा होता, जिन्हें हम अज्ञानता के कारण या लापरवाही के चलते अनदेखा करते रहते हैं और बड़े रोग के चंगुल में फंस जाते हैं।

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