उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने ज्योलिग्रांट मेडिकल कॉलेज रैगिंग मामले की जांच के दिये आदेश

नैनीताल, 20 अप्रैल । उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने प्रदेश के सरकारी उच्च शिक्षण संस्थानों में रैगिंग के
खिलाफ दायर जनहित की सुनवाई करते हुए

बुधवार को सरकार को देहरादून के ज्योलिग्रांट स्थित हिमालयन
इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस में रैगिंग प्रकरण की जांच कर दो सप्ताह में रिपोर्ट देने को कहा है।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय कुमार मिश्रा तथा न्यायमूर्ति आर.सी. खुल्बे की युगलपीठ में मामले की सुनवाई
हुई।

याचिकाकर्ता सचिदानंद डबराल की ओर से अदालत को बताया गया कि उच्च शिक्षण संस्थानों में उच्चतम
न्यायालय तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के दिशा निर्देशों के बावजूद लगातार रैगिंग के मामले सामने आते
जा रहे हैं।

हल्द्वानी के सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज के अलावा श्रीनगर मेडिकल कालेज, दून मेडिकल कॉलेज तथा पंतनगर
स्थित पं. गोविंद वल्लभ पंत कृषि एवं प्रोद्योगिकी विश्वविद्यालय में भी रैगिंग के गंभीर प्रकरण सामने आये हैं।

उच्च शिक्षण संस्थानों में रैगिंग जैसे प्रकरणों पर रोक नहीं लग रही है। संस्थान रैगिंग रोकने में विफल साबित हो
रहे हैं। रैगिंग रोकने के लिये पहले कोई कदम नहीं उठाये जा रहे हैं

और रैगिंग होने के बाद संस्थानों की ओर से
लकीर पीटी जाती है।

अधिवक्ता शिव भट्ट की ओर से यह भी कहा गया कि उधमसिंह नगर के पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय में रैगिंग
के विवाद को लेकर दो हॉस्टल के छात्र इसी महीने छह अप्रैल को आमने सामने आ गये थे।

छात्रों में जमकर लात
घूंसे चले। पुलिस को विश्वविद्यालय परिसर में आकर मामले को संभालना पड़ा। यही नहीं प्रथम वर्ष के छात्रों के
बाल कटवा दिये गये।

उन्हें तरह तरह से परेशान किया गया लेकिन विवि प्रशासन की ओर से दोषियोें के खिलाफ
आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गयी।

सुनवाई के दौरान यह बात भी सामने आयी कि ज्योलिग्रांट के मेडिकल कॉलेज के पीड़ित छात्रों की ओर से रैगिंग
पर रोक लगाने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर उच्च न्यायालय को एक पत्र लिखा गया।

इसके बाद
अदालत ने सरकार से इस मामले की जांच कर दो सप्ताह में रिपोर्ट देने को कहा है। साथ याचिकाकर्ता को पूरे
प्रकरण में प्रतिशपथ पत्र पेश करने के निर्देश दिये हैं।

यहां बता दें कि इससे पहले हल्द्वानी के सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज में भी तालिबानी शैली में रैगिंग का
प्रकरण सामने आ चुका है। प्रथम वर्ष के छात्रों के सुर मुंडवा कर उन्हें एक लाइन में सिर झुकाकर चलाया जा रहा

था। वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद उच्च न्यायालय ने कुमाऊं के आयुक्त दीपक रावत व
पुलिस उपमहानिरीक्षक डॉ. नीलेश आनंद भरणे को इस प्रकरण की जांच के निर्देश देते हुए आरोपियों के खिलाफ
आपराधिक कार्यवाही करने के निर्देश दिये थे।

इस मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच की जा रही है। यही नहीं रैगिंग
प्रकरण को रोकने के लिये हाइकोर्ट के निर्देश पर पूरे कालेज परिसर को सीसीटीवी कैमरों की जद में लाया गया है।

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