आज लेख में हम बात करेंगे बच्चों को कैसे इमोशनली इंटेलिजेंट बनाएं माँ बाप

आज लेख में हम बात करेंगे बच्चों को कैसे इमोशनली इंटेलिजेंट बनाएं माँ बाप

बच्चों

मेंटल हेल्थ के बारे में लोग कम बात करते हैं। आज लेख में हम बात करेंगे बच्चों को कैसे इमोशनली इंटेलिजेंट बनाएं माँ बाप । यूं कहें कि इसे जरूरी नहीं समझते हैं जिसके कारण आजकल आत्महत्या जैसे मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। आज हम आपको लेख में बताएंगे आखिर माता-पिता को किस तरीके से बच्चों को मानसिक रूप से मजबूत बनाना चाहिए ताकि वो किसी भी परिस्थिति से खुद को निकाल पाएं। मां बाप बनने के बाद एक बड़ी जिम्मेदारी आ जाती है बच्चों को एक बेहतर इंसान बनने और उज्जवल भविष्य देने की। इसके लिए माता-पिता हर संभव प्रयास करते हैं जिससे उनके बच्चे की छवि समाज में एक अच्छे व्यक्ति की बनी।

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पेरेंट्स हमेशा अपने बच्चे को एक बेहतर इंसान बनाने की कोशिश करते हैं

विकास परिषद ने सीवर लाइन को मेन लाइन से कनेक्ट ही नहीं किया 2

हर कोई उनकी तारीफ करें। आज लेख में हम बात करेंगे बच्चों को कैसे इमोशनली इंटेलिजेंट बनाएं माँ बाप। एक छोटे बच्चे को फिजिकली फिट रखने के साथ-साथ इमोशनली स्ट्रांग बनाने जैसी सभी जिम्मेदारियां उसके पेरेंट्स की होती हैं। सभी पेरेंट्स हमेशा अपने बच्चे को एक बेहतर इंसान बनाने की कोशिश करते हैं और उन्हें अच्छी से अच्छी परवरिश देते हैं। आजकल ज्यादातर पेरेंट्स अपने बच्चे की एकेडमिक एक्सीलेंस पर पूरा ध्यान देते हैं लेकिन इसके चलते बच्चे सही सपोर्ट ना मिलने के कारण इमोशनली वीक हो सकते हैं।

उन्हें इमोशनली इंटेलिजेंट बनाने पर भी ध्यान देना जरूरी है

इसीलिए आपको बच्चे की पढ़ाई लिखाई पर ध्यान देने के साथ-साथ उन्हें इमोशनली इंटेलिजेंट बनाने पर भी ध्यान देना जरूरी है। इमोशनल इंटेलिजेंस अपनी भावनाओं को मैनेज करना और दूसरों की भावनाओं की कद्र करते हुए उनके सामने अपनी फीलिंग्स को एक्सप्रेस करने का कौशल होता है। इन स्किल्स को डिवेलप करने के लिए बचपन से ही बच्चे को इमोशनली इंटेलिजेंट बनाना जरूरी है, आइए इससे जुड़ी कुछ खास बाते जानते हैं, बच्चों को भावनात्मक रूप से तेज बनाने के लिए आपको बचपन से उन्हें भावनात्मक रूप से समझाने की कोशिश करनी चाहिए।

बच्चा अगर किसी बात से दुखी और परेशान है तो उसे इमोशन से डील करना

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बच्चा अगर किसी बात से दुखी और परेशान है तो उसे इमोशन से डील करना बताइए कैसे उसे सकारात्मकता में बदलना है। बच्चे बहुत संवेदनशील होते हैं ऐसे में उनके साथ सहानुभूति रखें. बच्चे छोटी-छोटी बातों में अगर ओवररिएक्ट करते हैं तो उन्हें समझाएं ना कि इग्नोर करें। उन्हें प्यार से उनकी बात को समझिए। ऐसा करने से बच्चे सिक्योर फील करते हैं। बच्चों के साथ हर चीज पर खुलकर बातचीत करें ताकि उनके विचार के बारे में पता लग जाए। उनकी अच्छी और बुरी हर तरह की बात को सुनें। ऐसा करने से बच्चे की मेंटल हेल्थ अच्छी बनी रहती है।

उसके अंदर प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल को डेवलप करें

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जब बच्चा किसी बात से परेशान हो तो उसे मोटिवेट करें कैसे उस चीज को सकारात्मकता में बदल सकते हैं। उसके अंदर प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल को डेवलप करें। मां बाप बनने के बाद एक बड़ी जिम्मेदारी आ जाती है बच्चों को एक बेहतर इंसान बनने और उज्जवल भविष्य देने की। इसके लिए माता-पिता हर संभव प्रयास करते हैं जिससे उनके बच्चे की छवि समाज में एक अच्छे व्यक्ति की बनी। हर कोई उनकी तारीफ करें।आज लेख में हम बात करेंगे बच्चों को कैसे इमोशनली इंटेलिजेंट बनाएं माँ बाप।

आपको बचपन से उन्हें भावनात्मक रूप से समझाने की कोशिश करनी चाहिए

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बच्चों को भावनात्मक रूप से तेज बनाने के लिए आपको बचपन से उन्हें भावनात्मक रूप से समझाने की कोशिश करनी चाहिए। बच्चा अगर किसी बात से दुखी और परेशान है तो उसे इमोशन से डील करना बताइए कैसे उसे सकारात्मकता में बदलना है। बच्चे बहुत संवेदनशील होते हैं ऐसे में उनके साथ सहानुभूति रखें। बच्चे छोटी-छोटी बातों में अगर ओवररिएक्ट करते हैं तो उन्हें समझाएं ना कि इग्नोर करें उन्हें। प्यार से उनकी बात को समझिए. ऐसा करने से बच्चे सिक्योर फील करते हैं।

हम अक्सर उन्हें छोटी-छोटी बातों पर ओवररिएक्ट करते हुए देखते हैं

बच्चों के साथ हर चीज पर खुलकर बातचीत करें ताकि उनके विचार के बारे में पता लग जाए । उनकी अच्छी और बुरी हर तरह की बात को सुनें। ऐसा करने से बच्चे की मेंटल हेल्थ अच्छी बनी रहती है. जब बच्चा किसी बात से परेशान हो तो उसे मोटिवेट करें कैसे उस चीज को सकारात्मकता में बदल सकते हैं। उसके अंदर प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल को डेवलप करें। बच्चे काफी सेंसेटिव होते हैं, इसीलिए हम अक्सर उन्हें छोटी-छोटी बातों पर ओवररिएक्ट करते हुए देखते हैं। ऐसी स्थिति में आपको बच्चे को इग्नोर करने के बजाय उनके इमोशंस के प्रति सहानुभूति दिखानी चाहिए और उन्हें प्यार से समझना चाहिए।

दुनिया में हर इंसान अलग प्रवृत्ति का होता है

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ऐसा करने से बच्चे सिक्योर रहते हैं और उन्हें यकीन होता है कि आप उनकी बातों को समझते हैं। इमोशनल इंटेलिजेंट होने के लिए प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल्स जानना बेहद जरूरी होता है,इसीलिए बचपन से ही उन्हें उनकी प्रॉब्लम्स को खुद सॉल्व करने के लिए मोटिवेट करें। इसके लिए आप उन्हें हर बात के नेगेटिव और पॉजिटिव इफेक्ट्स समझाएं और सही रास्ता चुनने में उनकी मदद करें। ऐसा करने से वे बड़े होकर स्ट्रांग बन सकेंगे। दुनिया में हर इंसान अलग प्रवृत्ति का होता है। हर इंसान के जीने का तरीका, बात करने का तरीका और सोचने का तरीका एक दूसरे से अलग होता है।

इसीलिए शायद हम सभी के व्यवहार एक दूसरे से अलग होते हैं। जैसे कि हम सभी एक दूसरे से अलग होते हैं उसी तरह बच्चों में भी यह बात लागू होती है। हर बच्चा अलग होता है। हर बच्चों का व्यवहार, सोच एक दूसरे से अलग होती है इसलिए जरूरी है कि माता-पिता अपने बच्चे को किसी दूसरे बच्चे से तुलना ना करें।

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