गुजरात : 2002 के गोधरा कांड के दौरान ट्रेन में आग लगाने वाले रफीक भटुक को उम्रकैद

गुजरात : 2002 के गोधरा कांड

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27 फरवरी 2002 को अयोध्या से कारसेवकों को लेकर लौट रही एक ट्रेन को उपद्रवियों ने आग के हवाले कर दिया था। इस हमले में ट्रेन के कोच में सवार सभी कारसेवकों की दर्दनाक मौत हो गई थी।

आगजनी की इस घटना के बाद गुजरात में सांप्रदायिक दंगे हुए थे, जिसमें 1,200 से अधिक लोग मारे गए थे, जिनमें ज्यादातर अल्पसंख्यक समुदाय के थे। ट्रेन में आगजनी करने का आरोपी रफीक भटुक घटना के बाद से फरार चल रहा था। इस मामले में अब तक 35वां आरोपी है, जिसे अदालत ने दोषी ठहराया है।

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गुजरात में पेट्रोल छिड़कर कोच में लगाई थी आग

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27 फरवरी 2002 को हुए नरसंहार मामले में मुख्य आरोपियों में से भटुक ने घटना के दिन साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन के एस -6 कोच में पेट्रोल छिड़ककर आग लगाने में अहम भूमिका निभाई थी। इस कोच में 59 कारसेवक सवार थे जो अयोध्या से लौट रहे थे। इस हृदय विदारक घटना में सभी कारसेवकों की दर्दनाक मौत हो गई थी। घटना के बाद गुजरात में सांप्रदायिक दंगे भड़क गए थे।

19 साल से चल रहा था फरार

गोधरा कांड का मुख्य आरोपी इस मामले में अपना नाम आने के बाद से ही फरार चल रहा था। 19 साल से गुजरात पुलिस उसकी तलाश में थी। गोधरा पुलिस ने पिछली साल ही उसे गिरफ्तार किया था।

रफीक को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस ने बताया था कि ट्रेन के कंपार्टमेंट को जलाने के लिए पेट्रोल का बंदोबस्त करना, भीड़ को उकसाना और पूरी साजिश रचने में रफीक का बड़ा हाथ था। हिंसा के दौरान रफीक उस वक्त एक मजदूर के तौर पर स्टेशन पर काम करता था।

पिछले साल हुई थी भटुक की गिरफ्तारी

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भटुक को फरवरी 2021 में पंचमहल पुलिस और गुजरात एसओजी की टीम ने गोधरा शहर के एक इलाके से दबोचा था। मामले का आरोपी बनाए जाने के बाद से ही भटुक फरार चल रहा था। फरार होने के बाद वो देश के कई शहरों में रुका था।

उसने कुछ समय दिल्ली में भी बिताया था। बाद में वो गोधरा में आकर अपनी पहचान छिपाकर रह रहा था। भटुक की तलाश में लगी एसओजी को सुराग मिलते ही उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

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