जन्माष्टमी में रिश्तों को संवारना, संभालना और निभाना कृष्ण से सीखें

अर्जुन, सुदामा व श्रीदामा श्रीकृष्ण के प्रमुख मित्र थे। जब-जब इनमें से किसी पर भी कोई मुसीबत आई, श्रीकृष्ण ने उनकी हरसंभव मदद की। आज भी श्रीकृष्ण और अर्जुन की मित्रता की मिसाल दी जाती है।

श्रीकृष्ण के प्रमुख मित्र

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जन्माष्टमी  भगवान श्रीकृष्ण ने अवतार लिया था। उनके जीवन का हर प्रसंग, हर कथा, हर बात आज भी हमारी जिंदगी के लिए उतनी ही काम की है, जितनी महाभारत या उसके बाद के समय में रही होगी। कोरोना काल से गुजरी दुनिया ने पिछले दो सालों में रिश्तों के महत्व को बहुत गहराई से जाना है। परिवार और मित्र, जीवन के लिए कितने जरूरी हैं, ये हर उस आदमी को अच्छे से समझ आया, जिसने कोरोना की त्रासदी को नजदीक से देखा है।

जन्माष्टमी पर 8 कथाओं से भगवान कृष्ण से सीखें

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जन्माष्टमी  का पारिवारिक और सामाजिक रिश्तों को लेकर उनका अपना नजरिया था।  रिश्तों को संवारना, संभालना और निभाना

  1.  सुखी दांपत्य ग्रंथों के अनुसार, श्रीकृष्ण की 16108 रानियां थीं। इनमें से 8 प्रमुख थीं। श्रीकृष्ण के दांपत्य जीवन में आपको कहीं भी अशांति नहीं मिलेगी। वे अपनी हर पत्नी को संतुष्ट रखते थे ताकि उनमें कोई मन-मुटाव न हो।श्रीकृष्ण के दांपत्य जीवन में आपको कहीं भी अशांति नहीं मिलेगी। वे अपनी हर पत्नी को संतुष्ट रखते थे ताकि उनमें कोई मन-मुटाव न हो।श्रीकृष्ण की तरह हमें भी अपने दांपत्य जीवन में खुश रहना सीखना चाहिए।
  2. रिश्ते निभाना भगवान श्रीकृष्ण ने अपना हर रिश्ता पूरी ईमानदारी से निभाया। यहां तक कि अपने परिजन व अन्य लोगों के लिए द्वारिका नगरी ही बसा दी। माता-पिता, बहन, भाई श्रीकृष्ण ने हर रिश्ते की मर्यादा रखी।
  3. युद्धनीति महाभारत के युद्ध में जब-जब पांडवों पर कोई मुसीबत आई, श्रीकृष्ण ने अपनी युद्ध नीति से उसका हल निकाला। भीष्म, द्रोणाचार्य आदि अनेक महारथियों के वध का रास्ता श्रीकृष्ण ने ही पांडवों को सुझाया था।
  4. सही-गलत का ज्ञान जब गोकुलवासी बारिश के लिए इंद्रदेव की पूजा करते थे श्रीकृष्ण ने उन्हें समझाया कि बारिश करना तो इंद्र का कर्तव्य है। इसके लिए उनकी पूजा करना न करें। उसके स्थान पर गोवर्धन पर्वत की पूजा करना चाहिए, जो हमारे गौधन को समृद्ध करता है।
  5. ऐसा हो बचपन श्रीकृष्ण ने बचपन में माखन खाकर श्रेष्ठ भोजन का संदेश दिया। बांसुरी बजाकर हमें सिखाया कि शिक्षा के साथ-साथ हमें ललित कलाओं पर भी ध्यान देना चाहिए।
  6. सही समय पर सही निर्णय कंस का ससुर जरासंध बार-बार मथुरा पर हमला करता था, जिससे वहां की प्रजा परेशान रहती थी। श्रीकृष्ण जानते थे कि जरासंध का वध उनके हाथों नहीं लिखा। इसी कारण उन्होंने मथुरा से दूर द्वारिका नगरी बसाई और समय आने पर भीम के हाथों जरासंध का वध भी करवा दिया।
  7. अपना वचन निभाना शिशुपाल श्रीकृष्ण का रिश्तेदार था। श्रीकृष्ण ने उसकी माता को वचन दिया था कि वे शिशुपाल के 100 अपराध क्षमा करेंगे। श्रीकृष्ण अपने वचन निभाते हुए शिशुपाल को बार-बार क्षमा किया, लेकिन इसके बाद भी शिशुपाल नहीं माना, जिसके चलते श्रीकृष्ण ने उसका वध कर दिया।
  8. कृष्ण प्रेमियों के लिए कृष्ण जन्मोत्सव का दिन खास होता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र में भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस साल भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव 18 और 19 अगस्त को मनाया जाएगा।

जन्माष्टमी पति-पत्नी के रिश्ते में प्रेम द्रौपदी के जरिए समझाया मित्रता निभाना

श्याम तेरी बंसी पुकारे राधा नाम।
लोग करें मीरा को यूं ही बदनाम।
सांवरे की बंसी को बजने से काम।
राधा का भी श्याम वो तो मीरा का भी श्याम।

19 अगस्त को उच्च राशि के चंद्रमा में मनाई जाएगी

जन्माष्टमी पति-पत्नी के रिश्ते में प्रेम द्रौपदी के जरिए समझाया मित्रता निभाना

कृष्ण को 2100 प्रकार के व्यंजनों से भोग लगाने की तैयारी है। साथ ही नदियों के पवित्र जल से उनका महाभिषेक किया जाएगा। मंदिरों में संभावित भीड़ को देखते हुए श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
श्री कृष्ण जन्माष्टमी 19 अगस्त को उच्च राशि के चंद्रमा में मनाई जाएगी।

श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर सूर्य और बुध साथ-साथ रहेंगे। बुधादित्य योग बनेगा। 19 अगस्त को मथुरा में चंद्रमा रात 11:44 बजे उदय होगा। द्वापर युग में मथुरा पुरी में भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि को मध्य रात्रि में 12:00 बजे निशीथ बेला में वृषभ लग्न में उच्च राशि के चंद्रमा में श्री कृष्ण ने जन्म लिया था।

जन्माष्टमी को लेकर मंदिरों में भव्य सजावट की गई है। देसी-विदेशी फूलों और रंग-बिरंगी रोशनी से मंदिरों की छटा देखते ही बन रही है। पूरी दिल्ली भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में डूबी नजर आ रही है। कोरोना के चलते दो साल बाद राजधानी में ऐसी रौनक देखने को मिल रही है। शुक्रवार को मंदिरों में जन्माष्टमी धूमधाम से मनाई जाएगी।

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