पीड़ितों को मुआवजा सुनिश्चित करने के लिए रिपोर्ट मांगी

नई दिल्ली, 04 मई । उच्च न्यायालय ने दिल्ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएसएलएसए) को यह
बताने के लिए कहा है

कि यौन अपराधों के आरोप में दर्ज कितने मामलों में पीड़िता को मुआवजा मिला है और
कितने में नहीं।

न्यायालय ने यह आदेश यौन उत्पीड़न के पीड़ितों को अंतरिम मुआवजा देने की प्रक्रिया को सुगम

बनाने के लिए पुलिस द्वारा आरोपों में दर्ज की जाने वाली एफआईआर की प्रति डीएसएलएसए को तत्काल मुहैया
कराने से संबंधित मामलों की सुनवाई के दौरान दिया है।

जस्टिस जसमीत सिंह ने आदेश तब दिया जब डीएसएलएसए के सदस्य सचिव कंवल जीत अरोड़ा ने बताया कि
जनवरी, 2012 से दिसंबर 2017 के बीच दर्ज 87,405 एफआईआर की एक सूची तैयार की गई है, जिसमें दिल्ली

पुलिस की ओर से डीएसएलएसए को एफआईआर की प्रति नहीं भेजी गई थी। उन्होंने न्यायालय को बताया कि
87,405 प्राथमिकी में से कुछ मामले ऐसे भी हो सकते हैं, जहां मुआवजे का भुगतान कर दिया गया हो। इसके बाद

उच्च न्यायालय ने डीएसएलएसए को विस्तृत रिपोर्ट पेश करने और इसमें टेबुलेशन चार्ट के जरिए यह बताने के
लिए कहा है कि इनमें से कितने मामलों में पीड़ितों को मुआवजा दिया गया है

और कितने में नहीं। साथ ही
न्यायालय ने मामले की सुनवाई 31 मई तक के लिए स्थगित कर दिया है।

इससे पहले, दिल्ली पुलिस ने
न्यायालय को बताया कि सभी जिलों के पुलिस उपायुक्त को निर्देश जारी किए गए हैं

ताकि यौन अपराधों से
संबंधित मामलों के संबंध में संपूर्ण आंकड़ा डीएसएलएसए के साथ साझा किया जा सके।

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