पूर्व पोप बेनेडिक्ट का 95 साल की उम्र में निधन हो गया है

पूर्व पोप बेनेडिक्ट का 95 साल की उम्र में निधन हो गया है

बेनेडिक्ट

पूर्व पोप बेनेडिक्ट का 95 साल की उम्र में निधन हो गया है। वेटिकन ने यह घोषणा की। बेनेडिक्ट का निधन मेटर एक्लेसिया मॉनेस्ट्री में हुआ। पिछले काफी समय से उनकी सेहत काफी खराब थी। पोप बेनेडिक्ट सोलहवें (XVI) ने 2013 में पद से इस्तीफा देकर दुनिया के कैथोलिक ईसाइयों को चौंका दिया था। तब उन्होंने कहा था- मैं गिरती सेहत की वजह से इस्तीफा दे रहा हूं। करीब 600 साल में ऐसा पहली बार हुआ था, जब किसी पोप ने पद छोड़ा हो। CNN के मुताबिक, बेनेडिक्ट से पहले ग्रेगरी XII ने 1415 में इस्तीफा दिया था।

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वेटिकन ने उनके इस दुनिया से अलविदा कहने की घोषणा की है

हालांकि, तब वजह ईसाइयों के दो गुटों का झगड़ा थी। इंटरनेशनल डेस्क: ईसाइयों के सबसे बडे़ धर्मगुरु पोप इमेरिटस बेनेडिक्ट XVI का निधन हो गया है। वेटिकन ने उनके इस दुनिया से अलविदा कहने की घोषणा की है। वेटिकन ने बताया कि पोप एमेरिटस बेनेडिक्ट सोलहवें ने शनिवार की सुबह 9:34 बजे अंतिम सांस ली है। उन्होंने 2005 से 2013 तक एपोस्टोलिक सी का आयोजन किया था। उन्होंने साल 2013 में किसी कारणवश रूप से पोप के पद को छोड़ने के अपने फैसले की घोषणा की थी। हाल के दिनों में वो वेटिकन गार्डन में एक छोटे से मठ, मेटर एक्लेसिया में रहने लगे थे।

पोप बेनेडिक्ट का शनिवार को 95 साल की उम्र में निधन हो गया

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कैथलिक ईसाइयों के सबसे बड़े धर्मगुरु रहे पूर्व पोप बेनेडिक्ट का शनिवार को 95 साल की उम्र में निधन हो गया। वेटिकन के स्पोक्सपर्सन माटेओ ब्रूनी ने इसकी जानकारी दी। उनकी सेहत बेहद खराब थी। पोप बेनेडिक्ट सोलहवें (XVI) ने 2013 में पद से इस्तीफा दे दिया था। पद छोड़ते समय पोप बेनेडिक्ट ने गिरती सेहत को अपने इस्तीफे की वजह बताया था। उस समय फाइल की गई CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, बेनेडिक्ट से पहले 1415 में पोप ग्रेगरी XII ने पद से इस्तीफा दिया था। हालांकि, तब ईसाइयों के दो गुटों का झगड़ा इसकी वजह बनी थी।

करीब 600 साल के इतिहास में पोप के पद से इस्तीफा देने वाले वे पहले पोप थे

इस तरह, करीब 600 साल के इतिहास में पोप के पद से इस्तीफा देने वाले वे पहले पोप थे। हालांकि, बेनेडिक्ट के कार्यकाल के दौरान प्रीस्ट की नियुक्ति को लेकर विवाद भी उठा था। उनका कार्यकाल वेटिकन चर्च के दो हजार सालों के इतिहास में सबसे अधिक विवादों से घिरा रहा। पिछले साल यानी 2021 में पोप बेनेडिक्ट ने आखिरकार मान लिया था कि 1980 में वे उस मीटिंग में मौजूद थे, जिसमें बाल यौन शोषण के एक आरोपी प्रीस्ट के बारे में विचार किया गया था। इससे कुछ दिन पहले जर्मनी की एक लॉ फर्म की रिपोर्ट में पोप के हवाले से कहा गया था कि वे ऐसी किसी मीटिंग का हिस्सा नहीं थे।

बेनेडिक्ट 1977 से 1982 तक म्यूनिख चर्च के आर्कबिशप थे

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पुराना बयान बदलने पर बेनेडिक्ट ने सफाई दी थी- ऐसा मेरे स्टेटमेंट की एडिटिंग में गलती के चलते हुआ था। बेनेडिक्ट 1977 से 1982 तक म्यूनिख चर्च के आर्कबिशप थे। इसी दौरान बाल यौन शोषण के चार मामलों की जानकारी मिली थी। बाद में चर्च ने खुद इस मामले की जांच का जिम्मा जर्मनी की एक लॉ फर्म को दिया था। उसने ही चर्च को दिखाने के बाद यह रिपोर्ट सार्वजनिक की थी। पोप ने पहले कहा था कि इन मामलों की चर्चा की बात उन्हें याद नहीं है। उन्होंने यह भी कहा था कि इन मामलों को हैंडल करने में उन्होंने किसी तरह की गलती नहीं की थी।

पुराना बयान स्टेटमेंट में एडिटिंग की वजह से कुछ गलत हो गया था

इसके बाद उनके सेक्रेटरी जॉर्ज गेनस्वैन ने पोप के हवाले से नया बयान जारी किया था। इसमें कहा गया था- कि पुराना बयान स्टेटमेंट में एडिटिंग की वजह से कुछ गलत हो गया था। इसके पीछे कोई गलत इरादा नहीं है। इसके लिए हम माफी चाहते हैं। इस मामले में एक और आर्कबिशप की भूमिका पर भी सवालिया निशान लगे हैं, जो फिलहाल वर्तमान पोप यानी पोप फ्रांसिस के करीबी सहयोगी हैं। इस मामले में चर्च ने खुद जांच की पहली की थी। इस जर्मन लॉ फर्म को यह जिम्मेदारी दी गई थी कि वो 1945 से 2019 के दौरान हुए मामलों की जांच करे।

आरोप है कि उनके आर्कबिशप रहते हुए ये अपराध हुए थे

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उसे खास हिदायत यह देखने के लिए दी गई थी कि क्या चर्च के आला पदों पर बैठे लोगों ने अपनी जिम्मेदारियों को सही तरीके से अंजाम दिया या नहीं।जिन चार मामलों में पूर्व पोप पर लापरवाही के आरोप लगे, वे सभी चाइल्ड अब्यूज यानी बाल यौन शोषण से जुड़े हैं। तब बेनेडिक्ट को नाम जोसेफ रेटिंगर था और वो म्यूनिख चर्च के आर्कबिशप थे। 1977 से 1982 तक वो इस पद पर रहे। आरोप है कि उनके आर्कबिशप रहते हुए ये अपराध हुए थे। इतना ही नहीं जिन लोगों पर आरोप लगे थे वे सभी चर्च में अहम पदों पर काम करते रहे।

रिपोर्ट में आरोप लगाया है कि म्युनिख के आर्कबिशप कार्डिनल रिनहार्ड ने दो मामलों में कार्रवाई नहीं की। इस मामले में मार्क्स ने जून 2021 में पोप फ्रांसिस को इस्तीफे की पेशकश भी की थी।फ्रांसिस ने इस्तीफा स्वीकार नहीं किया था। इसके कुछ दिन पहले ही उन्होंने वेटिकन के क्रिमिनल लॉ में बदलाव किए थे। यौन शोषण के मामलों में कानून को काफी सख्त बनाया था।

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