Tuesday, May 24, 2022
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भारत और नेपाल एक ही सभ्यता के अंग : आरजू देउबा

बाबा विश्वनाथ और पशुपतिनाथ एक-दूसरे से अलग नहीं

विश्वनाथ धाम के नव्य और विस्तारित स्वरूप को सराहा

वाराणसी। नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा की पत्नी आरजू राणा देउबा रविवार को काशी में मिले सम्मान से अभिभूत दिखीं। एक दिवसीय यात्रा पर शहर में आई आरजू देउबा ने मीडिया से कहा कि काशी में मिले सम्मान और प्यार से अभिभूत हूं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में हुए विकास कार्यों खासकर विश्वनाथ धाम के नव्य और विस्तारित स्वरूप को सराहा। काशी में आने के अपने पहले के अनुभवों को भी साझा किया।

प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा काशी में स्वागत से बहुत प्रभावित

आरजू राणा देउबा ने कहा कि जब मैं पहले यहां आई थी तो काफी संकरी गलियां थीं और हम काशी विश्वनाथ तक पहुंचने के लिए एक लंबा रास्ता तय करते थे। अब यह बहुत अच्छी तरह से बनाया गया है। काशी विश्वनाथ धाम कारिडोर काफी शानदार दिखता है। सबसे अच्छी बात यह है कि यहां से पूरी गंगा नदी दिखाई देती है। उन्होंने अपने पूर्व के भारत दौरे का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि पहली बार 1990 में भारत आई थीं, फिर 2017 में और अब पांच साल बाद भारत आई हूं। मैंने बहुत बदलाव देखे हैं। मुझे ऐसा लगता है जैसे मैं खुद किसी दूसरे शहर में हूं, खासकर काशी विश्वनाथ इलाके में। मेरे पति प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा काशी में स्वागत से बहुत प्रभावित हुए हैं।

गंगा का हमारे लिए भी वही धार्मिक महत्व

उन्होंने कहा कि ललिता घाट स्थित हमारे पशुपतिनाथ के मंदिर से भी गंगा बहुत अच्छे से और साफ दिखाई देती हैं। बाबा विश्वनाथ के धाम में जाकर आज की हमारी यात्रा सफल हो गई। हमने बाबा विश्वनाथ से अपने देश और भारत के साथ ही विश्व की शांति की कामना की। उन्होंने काशी के आध्यात्मिक पक्ष की सराहना कर कहा कि हमारे नेपाल में लोग यह मानते हैं कि अगर काशी में आपकी मृत्यु हो जाए तो आप सीधे स्वर्ग पहुंचते हैं। मेरे कई रिश्तेदारों का यहां घर रहा है। आज भी मान्यताएं और आस्था में बदलाव नहीं आया है। गंगा का हमारे लिए भी वही धार्मिक महत्व है जो भारत के लोगों के लिए है।

बाबा विश्वनाथ और पशुपतिनाथ एक-दूसरे से अलग नहीं

आरजू राणा देउबा ने कहा कि भारत और नेपाल एक ही सभ्यता के अंग हैं। हमारा एक संयुक्त इतिहास रहा है। हमारे लिए भी रामायण और महाभारत का विशेष महत्व है। राजनीतिक और प्रशासनिक बाधाओं को छोड़ दें तो भारत और नेपाल के लोग एक ही हैं। बाबा विश्वनाथ और पशुपतिनाथ एक-दूसरे से अलग नहीं हैं, पौराणिक काल से ही हर जगह उनका उल्लेख है। नेपाल और भारत का बहुत नजदीक का संबंध है। यह सदैव यूं ही चलता रहेगा। भारत बहुत बड़ा देश है, लेकिन वह नेपाल जैसे छोटे देश के आगे बढ़ने के लिए लगातार मदद कर रहा है।

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