यूपी सरकार अवमानना शुरू होने तक नहीं करती कार्रवाई : कोर्ट

नई दिल्ली, 06 मई । उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को 82 वर्षीय एक कोविड- 19 के मरीज के पिछले
साल अस्पताल से लापता हो जाने के मामले की सुनवाई करते हुए

उत्तर प्रदेश सरकार को कड़ी फटकार लगाई। शीर्ष
अदालत ने यूपी के वकील से कहा कि आपकी सरकार की यह प्रवृत्ति हो गई है

कि जब तक अवमानना की कार्रवाई
शुरू न की जाए, मुद्दों पर कोई कार्रवाई ही नहीं करती।

मुख्य न्यायाधीश एन.वी. रमना, न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी
और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त महाधिवक्ता से कहा, ‘आप
निर्देशों का पालन नहीं करते हैं,

अंतिम समय जब अवमानना कार्रवाई ​​की मांग की जाती है तो आप आते हैं। यह
है आपके राज्य की आदत।

शीर्ष अदालत इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती देने वाली राज्य सरकार की याचिका पर सुनवाई
कर रही थी, जिसमें मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारियों सहित राज्य सरकार के आठ अधिकारियों

को तलब किया गया था। राम लाल यादव के बेटे द्वारा अस्पताल की हिरासत से रिहाई की मांग करने वाली एक
बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने 25 अप्रैल को राज्य के अधिकारियों को निर्देश

दिया कि वे उस व्यक्ति को 6 मई को अदालत के सामने पेश करें। इसमें विफल रहने पर राज्य के अधिकारियों को
न्यायालय के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने को कहा गया था।

मामले की सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने शुक्रवार को राज्य की याचिका पर नोटिस जारी किया और उच्च
न्यायालय के आगे की कार्यवाही पर रोक लगा दी। पीठ ने राज्य सरकार को वादी के मुकदमे के खर्चों के लिए और

वादी को सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष पेश होने में सक्षम बनाने के लिए उसे प्रारंभिक राशि के रूप में 50,000
रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई जुलाई में होगी।

राज्य सरकार मुश्किल में, लापता को कैसे पेश करे : वकील
उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त महाधिवक्ता गरिमा प्रसाद ने दलील दी कि इस मुद्दे की जांच के

लिए कि क्या लापता व्यक्ति को अवैध रूप से हिरासत में लिया गया था,

दो विशेष जांच दल (एसआईटी) का
गठन किया गया था। उन्होंने कहा कि राज्य मुश्किल में है

क्योंकि उच्च न्यायालय ने राज्य को ‘बंदी को पेश करने
का निर्देश दिया है, लेकिन ‘बंदी एक लापता व्यक्ति है।

चलने में असमर्थ व्यक्ति कैसे लापता हुआ : पीठ
इस पर पीठ ने कहा, ‘वह कैसे लापता हो सकता है?

उसका ऑक्सीजन लेवल 82 था, वह चलने में असमर्थ था।
वह अस्पताल में था। वह कहां गया? एक साल हो गया है।

यह पिछले साल 7 मई की बात है और अब एक साल
हो गया है।

राज्य सरकार ने कहा कि जैसे ही राज्य के अधिकारियों को यादव के लापता होने की सूचना मिली,
उन्होंने उसके ठिकाने का पता लगाने के लिए हरसंभव और सर्वोत्तम प्रयास किए।

यह है पूरा मामला
उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर यादव को प्रयागराज के टी.बी. सप्रू अस्पताल की हिरासत से रिहा करने की
मांग की गई थी,

जहां उन्हें कोविड​​​​-19 के इलाज के लिए भर्ती कराया गया था। लेकिन वह कथित तौर पर
लापता हो गए थे। उनके बेटे ने याचिका में कहा कि उनके पिता को 4 मई 2021 को कोविड​​​​-19 के परीक्षण

के बाद टी.बी. सप्रू अस्पताल में भर्ती कराया गया था और 6 मई को उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इसके बाद उन्हें
पृथकवास में रहने की सिफारिश की गई।

अगले दिन, उन्हें अस्पताल के अधिकारियों द्वारा सूचित किया गया कि
उनके पिता को ऑक्सीजन के स्तर में तेज गिरावट के कारण ट्रॉमा सेंटर में स्थानांतरित किया जा रहा है। 8 मई
को उन्हें अस्पताल के अधिकारियों ने सूचित किया कि उनके पिता गायब हो गए हैं।

ये हैं यूपी के आठ आला अधिकारी
आठ अधिकारियों में प्रमुख सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह), अपर मुख्य सचिव (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य),

चिकित्सा और स्वास्थ्य महानिदेशक, जिला मजिस्ट्रेट, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, प्रयागराज के मुख्य चिकित्सा
अधिकारी और अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक शामिल हैं।

उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ उत्तर प्रदेश
सरकार और राज्य के आठ अधिकारियों ने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया है।

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