Tuesday, May 17, 2022
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विभिन्न दलों ने भारत की संस्कृति व विविधता को बचाने पर बल दिया

साम्राज्यवाद का मूल सिद्धान्त ही शोषण करना भारत में नालंदा, तक्षशिला और विक्रमशिला विश्वविद्यालय था

भारत के लोग अपनी प्राचीन शिक्षा पद्धति से कट गये

नई दिल्ली, 25 मार्च  राज्यसभा में शुक्रवार को विभिन्न दलों के सदस्यों ने भारत की प्राचीन संस्कृति
और मूल्यों को संरक्षित करने की जरूरत पर बल देते हुए कहा कि इसकी विविधता को बचाये रखना भी बहुत
महत्वपूर्ण है।

विभिन्न दलों के सदस्यों ने यह विचार भारतीय जनता पार्टी के राकेश सिन्हा द्वारा लाये गये एक निजी प्रस्ताव
पर चर्चा के दौरान व्यक्त किए। प्रस्ताव में कहा गया है

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कि जिस प्रकार नई शिक्षा नीति के तहत भारतीय ज्ञान
परंपरा को पुनर्जीवित करने के लिए राष्ट्रीय अनुसंधान संस्थान की स्थापना की गयी है, वैसे ही राज्य एवं जिला
स्तर पर अनुसंधान संस्थान स्थापित किए जाने चाहिए।

सिन्हा ने प्रस्ताव पर चर्चा की शुरुआत करता हुए कहा कि ब्रिटिश शासनकाल में मैकाले द्वारा शुरू की गयी शिक्षा
नीति के कारण भारत के लोग अपनी प्राचीन शिक्षा पद्धति से कट गये।

भारत में नालंदा, तक्षशिला और विक्रमशिला विश्वविद्यालय था

सिन्हा ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी द्वारा
1931 में लंदन में दिये गये एक भाषण की याद दिलायी जिसमें उन्होंने कहा था कि आपने (ब्रिटिश शासकों ने)
एक सुंदर वृक्ष को काट दिया। उनके अनुसार महात्मा गांधी का संकेत प्राचीन शिक्षा की तरफ था।

उन्होंने कहा कि भारत में नालंदा, तक्षशिला और विक्रमशिला विश्वविद्यालय था। उन्होंने कहा कि नालंदा
विश्वविद्यालय में नौ मंजिला पुस्तकालय था जिसमें करीब एक करोड़ पुस्तकें थीं।

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उन्होंने कहा कि एलेक्सेंड्रिया के
विशाल पुस्तकालय में जितनी पुस्तकें थीं, उतनी तो नालंदा विश्वविद्यालय में पांडुलिपियां थीं। उन्होंने कहा कि
नालंदा में आठ हजार छात्र एवं दो हजार शिक्षक थे।

सिन्हा ने कहा कि बख्तियार खिलजी ने नालंदा पर हमला किया था। उन्होंने दावा किया कि विश्व में ज्ञान पर यह
सबसे बड़ा हमला था जिसमें आठ हजार छात्र एवं दो हजार शिक्षक मार दिये गये।

कुछ लोग मानव की चेतना और संकल्प से डरते हैं

उन्होंने कहा कि नालंदा
पुस्तकालय में लगी आग तीन महीने तक जलती रही। उन्होंने कहा कि सिकंदर भी चाहता था कि एलेक्सेंड्रिया के
पुस्तकालय का पतन हो।

उन्होंने कहा कि कुछ लोग मानव की चेतना और संकल्प से डरते हैं क्योंकि ज्ञान चेतना
का विकास करता है।

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उन्होंने कहा कि इसी चेतना और ज्ञान के बल पर गंगा नदी के तट के समीप बैठे दांडी नामक अर्द्धनग्न साधु ने
सिकंदर को चुनौती दे दी थी कि वह उसे राजा नहीं मानते। उन्होंने कहा कि इसी ज्ञान की चेतना ने आधे शरीर पर

कपड़े पहनने वाले महात्मा गांधी को शक्ति दी कि उन्होंने यह घोषणा कर डाली कि वह इसी वेषभूषा में ब्रिटेन के
राजा से मिलेंगे।

पश्चिम और भारत का ज्ञान के प्रति दृष्टिकोण भिन्न

सिन्हा ने दावा किया कि भारत पर यूरोप केंद्रित विचारधारा हावी रही है। उन्होंने कहा कि देश की संस्कृति पर जो
हमला होता रहा, उसे हम सहन करते रहे।

भाजपा सदस्य ने कहा कि पश्चिम और भारत का ज्ञान के प्रति दृष्टिकोण भिन्न है। उन्होंने कहा कि पश्चिम ज्ञान
को ताकत के रूप में देखता है जबकि हम ज्ञान को शुद्ध एवं मुक्त करने वाला मानते हैं। उन्होंने कहा कि आज
जरूरत है कि दुनिया भर में भारत के ज्ञान के विमर्श को आगे बढ़ाया जाए।

तृणमूल कांग्रेस के सदस्य जवाहर सरकार ने कहा कि ब्रिटिश शासकों ने देश की संपदा को लूटा और ज्ञान को नष्ट
किया। उन्होंने कहा, ‘‘हमें इस बात पर मंथन करना होगा कि हम अपने ज्ञान को क्यों भूल गये जैसे प्राचीन भारत
में होने वाली शल्यक्रिया। ’’

उन्होंने कहा, ‘‘हमें खुद से यह पूछना होगा कि बीच में हम महान अशोक, सांची, सारनाथ, अजंता आदि को क्यों
भूल गये?’’ तृणमूल सदस्य ने कहा कि देश में प्राचीन शिक्षा जाति आधारित थी।

उन्होंने कहा कि शिक्षा जाति के
बंधनों से मुक्त होना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह सिन्हा के प्रस्ताव का समर्थन करते हैं और शोध का काम अवश्य
किया जाना चाहिए किंतु इसे किसी विश्वविद्यालय के लिए अनिवार्य नहीं किया जाना चाहिए।

सभी देश अपनी संस्कृति की रक्षा और प्रचार प्रसार करते हैं

द्रविड़ मुनेत्र कषगम सदस्य टी. के. एस. एलानगोवन ने कहा कि सभी देश अपनी संस्कृति की रक्षा और प्रचार
प्रसार करते हैं।

उन्होंने कहा कि यह दूसरों का नहीं बल्कि देश के लोगों का दायित्व बनता है कि वे अपनी संस्कृति
की रक्षा करें। उन्होंने कहा कि भारत में विभिन्न संस्कृति है और हर संस्कृति की अपनी भाषा है और सभी का
संरक्षण किया जाना चाहिए।

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बीजू जनता दल के अमर पटनायक ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि ब्रिटिश शासकों ने भारत की संस्कृति पर
आधिपत्य जमाने का प्रयास किया, इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि भारत के लोगों को अपनी संस्कृति का सरंक्षण करते समय इस बात पर विशेष ध्यान देना चाहिए
कि इसकी विविधता को भी बरकरार रखा जाए।

साम्राज्यवाद का मूल सिद्धान्त ही शोषण करना

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के डॉ. वी. शिवदासन ने कहा कि साम्राज्यवाद का मूल सिद्धान्त ही शोषण करना है।
उन्होंने कहा कि पूंजीवादी समाज में यह काफी स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि यदि हम प्राचीन ज्ञान
के नाम पर मनुस्मृति के सिद्धान्त को आगे बढ़ाते हैं तो यह बहुत ही खतरनाक होगा।

राष्ट्रीय जनता दल के मनोज कुमार झा ने कहा कि आज बहुत मुश्किल दौर है जहां मिथक और सत्य का भेद ही
मिट गया है। उन्होंने कहा कि बाबा साहब डॉ बी. आर. आंबेडकर का कहना है कि भारत का भविष्य पश्चिमी शिक्षा
और पश्चिमी संस्थानों में है।

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