रेहड़ी पटरी वालों के लिए कर्ज की पीएम स्वनिधि योजना दिसंबर 2024 तक जारी रहेगी

नई दिल्ली, 27 अप्रैल केंद्रीय मंत्रिमंडल ने रेहड़ी पटरी वालों और उनके परिवार के सामाजिक आर्थिक
विकास में मदद के लिए शुरु की गयी

पीएम स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (स्वनिधि) योजना को दिसंबर 2024
तक जारी रखने के प्रस्ताव को बुधवार को मंजूरी दी।

स्वनिधि योजना के तहत रेहड़ी पटरी वालों को काम-काज के
लिए बिना जमानत के कर्ज सुविधा दी जाती है और उन्हें डिजिटल लेन-देने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। इस
योजना की अवधि मार्च 2022 में पूरी हो गयी थी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने पीएम स्वनिधि योजना के तहत
ऋण सहायता मार्च 2022 से बढ़कर दिसंबर 2024 तक जारी रखने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। बैठक के बाद जारी

एक सरकारी विज्ञप्ति के अऩुसार, इस योजना के तहत बिना जमानत के कर्ज देने के लिए कोष बढ़ाने और रेहड़ी
पटरी वालों को डिजिटल लेन-देने के लिए प्रोत्साहित करने पर जोर होगा। योजना का उदेश्य आजीविका के लिए

रेहड़ी पटरी लगाने वालों और उनके परिवारों का सामाजिक आर्थिक विकास में सहायता करना है।

बयान में कहा गया है कि शुरु में इस योजना में कुल 5,000 करोड़ रुपए तक की ऋण सहायता देने का लक्ष्य था,
जिसे बढ़ाकर अब 8,100 करोड़ रुपए कर दिया गया है।

रेहड़ी पटरी वालों को डिजिटल तरीक से भुगतान लेने के
लिए प्रोत्साहित करने के लिए बजट की राशि भी बढ़ाई गयी है,

जिसमें उन्हें डिजिटल भुगतान अपनाने के लिए
कैशबैक का प्रोत्साहन भी दिया जाता है।

सरकार का कहना है कि इस योजना को बढ़ाने के निर्णय से शहरी क्षेत्रों
में 1.2 करोड़ नागरिकों को लाभ होगा।

इस योजना में अब तक कुल 31.9 लाख ऋण आवेदन मंजूर किए गये हैं और 29.6 लाख आवेदनों पर कुल 2,931
करोड़ रुपए के ऋण जारी किए जा चुके हैं। सरकार के अनुसार, इस योजना में 2.3 लाख आवेदकों को दूसरी बार

कर्ज देने की मंजूरी दी गयी है और 1.9 लाख आवेदकों को 385 करोड़ रुपए जारी किए जा चुके हैं। पीएम स्वनिधि
योजना के तहत सहायता प्राप्त रेहड़ी पटरी ने अब तक 13.5 करोड़ से अधिक संख्या में डिजिटल लेन-देन किए हैं

और उनपर उन्हें 10 करोड़ रुपए कैशबैक दिए जा चुके हैं। सरकार ने इस योजना के तहत ब्याज सब्सिडी के रूप में
51 करोड़ रुपए का भुगतान किया है।

सरकार ने यह योजना कोविड महामारी के दौरान रेहड़ी पटरी वालों के समक्ष
वित्तीय चुनौतियों को देखते हुए शुरु की थी।

ये चुनौतियां अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है, इसलिए इसे आगे बढ़ा
दिया गया है।

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