वक्फ एक्ट के कुछ प्रावधानों की संवैधानिकता को हाई कोर्ट में दी चुनौती

दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका दायर कर वक्फ एक्ट के कुछ प्रावधानों की संवैधानिकता को चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया है कि वक्फ बोर्ड को ट्रस्टों, मठों, अखाड़ों और सोसायटीज से ज्यादा और निर्बाध अधिकार मिले हुए हैं जो उसे एक विशेष दर्जा देते हैं। याचिका भाजपा नेता और वकील अश्विनी उपाध्याय ने दायर की है।

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याचिका में मांग की गई है कि सभी ट्रस्टों, चैरिटेबल संस्थाओं, धार्मिक संस्थाओं के लिए एक समान कानून बनाए जाएं। याचिका में कहा गया है कि वक्फ और वक्फ संपत्तियों के लिए अलग से कानून नहीं बनाया जा सकता है। याचिका में वक्फ कानून की

धारा 4, 5, 6, 7,8 और 9 को मनमाना और गैरकानूनी बताया गया है। याचिका में कहा गया है कि वक्फ कानून के ये प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 का उल्लंघन करती हैं।

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याचिका में कहा गया है कि वक्फ एक्ट वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन करने की आड़ में बनाया गया है, लेकिन वक्फ एक्ट के तहत हिन्दू, बौद्ध, जैन, सिख, बहाई या ईसाई धर्मावलंबियों के लिए कोई कानून नहीं है। ऐसा देश की एकता, अखंडता और धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ है। यहां तक कि देश के संविधान में भी वक्फ का कोई जिक्र नहीं है।

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