शरीर से तांबा निकालकर सफलतापूर्वक लिवर प्रत्यारोपण किया

अपोलो अस्पताल के चिकित्सकों ने आठ वर्षीय बच्ची के शरीर से तांबा निकालकर सफलापूर्वक लिवर का प्रत्यारोपण किया। बिहार से उपचार के लिए आई बच्ची दुर्लभ अनुवांशिक बीमारी विल्सन्स से ग्रसित थी। इस बीमारी में लिवर के काम न करने पर कोमा की स्थिति हो जाती है। शरीर में अतिरिक्त तांबा जमा हो जाता है।

अपोलो अस्पताल समूह के चिकित्सा निदेशक व वरिष्ठ पीडियाट्रिक गेस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट डॉ. अनुपम सिब्बल ने बताया कि जब बच्ची को अस्पताल में भर्ती कराया गया था तब वह कोमा में थी। भर्ती करते ही बच्ची को वेंटिलेटर पर रखा गया। डायलिसिस और प्लाज्मा थेरेपी की गई ताकि शरीर से तांबा निकाला जा सके। प्रत्यारोपण से पहले यह जांच जरूरी है। बच्ची की मां ने लिवर दान करने का फैसला लिया। बच्ची के होश में आने पर दो दिन बाद वेंटिलेटर से बच्ची को हटाया गया।

डॉ. अनुपम ने बताया कि यह मामला बेहद दुर्लभ था। सर्जरी से पहले जांच और फिर लिवर प्रत्यारोपण दोनों मुश्किल काम था। इस मामले में दाता एबीओ बेमेल था। बच्ची के भर्ती होने के 31 घंटे के अंदर लिवर प्रत्यारोपण किया गया। लिवर प्रत्यारोपण करने वाले वरिष्ठ डॉ. नीरव गोयल ने बताया कि विल्सन्स एक दुर्लभ बीमारी है, जिसके लक्षण बेहद गंभीर होते हैं। अगर समय रहते इलाज न हो तो स्थिति जानलेवा हो सकती है। बच्ची जब हमारे पास आई थी तब उसके लिवर ने काम करना बंद कर दिया था।

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