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सर्वाइकल कैंसर के मामले ब्रेस्ट कैंसर के बाद सबसे ज्यादा

पार्टनर पर होने वाली सर्वाइकल कैंसर का खतरा

 

सर्वाइकल ज्यादा पार्टनर पर होने वाली कैंसर का खतरा

सर्वाइकल कैंसर एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) वायरस के फैलने से होता है। आनुवंशिकता इसकी प्रमुख वजह है। अब तक किए गए अध्ययनों के अनुसार फैमिली हिस्ट्री होने पर स्त्रियों में सर्विक्स कैंसर की आशंका बढ़ जाती है। गर्भाशय में चोट लगने से भी ऐसी समस्या हो सकती है। सिगरेट में मौज़ूद निकोटिन को भी इसके लिए जि़म्मेदार माना जाता है इसलिए सिगरेट पीने वाली महिलाओं में ये समस्या देखी जाती है। कुपोषण और पर्सनल हाइजीन की कमी होने पर भी यह समस्या हो सकती है।

यह एसटीडी यानी सेक्सुअली ट्रांस्मिटेड डिज़ीज़ है, इसलिए कम उम्र में या असुरक्षित सेक्स और एक से ज्यादा पार्टनर्स के साथ संबंध को इसका प्रमुख कारण माना जाता है।। यह वायरस सेक्शुअली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन है जो संबंध बनाने के दौरान शरीर में प्रवेश करता है। यह वायरस सर्विक्स की कोशिकाओं को प्रभावित करता है।सर्वाइकल कैंसर के मामले ब्रेस्ट कैंसर के बाद सबसे ज्यादा हैं। हर साल 1 लाख से ज्यादा महिलाएं इस बीमारी का शिकार होती हैं। लेकिन इस खतरनाक बीमारी को एक वैक्सीन दूर रख सकती है। इसे एचपीवी वैक्सीन कहते हैं।

पीरियड्स शुरू होने से पहले लड़कियों को लग जाए तो सर्वाइकल कैंसर होने के चांस बहुत कम होते हैं। सभी लड़कियों के लिए यह वैक्सीन जरूरी है। सबसे पहले आपको बताते हैं कि सर्वाइकल कैंसर क्या होता है?

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कोरोनावायरस के स्वस्थ मनुष्य के कोशिकाओं में प्रवेश करने और उन्हें संक्रमित करने के लिए जाना जाता है। महामारी की शुरुआत में, कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय सैन डिएगो के कम्प्यूटेशनल बायोफिजिकल केमिस्ट, रॉमी अमारो ने सार्स-सीओवी-2 स्पाइक प्रोटीन का एक विस्तृत विज़ुअलाइज़ेशन विकसित करने में मदद की, जो कुशलतापूर्वक हमारे सेल रिसेप्टर तक पहुंच जाता है।

रसायन विज्ञान और जैव रसायन के प्रोफेसर अमरो ने कहा हमने पता लगाया कि स्पाइक कैसे खुलता है और संक्रमित होता है। हमने स्पाइक का एक महत्वपूर्ण रहस्य खोल दिया है जिससे पता चलता है कि यह कोशिकाओं को कैसे संक्रमित करता है। इस द्वार (गेट) के बिना वायरस संक्रमण नहीं फैला सकता है।

सर्वाइकल ज्यादा पार्टनर पर होने वाली कैंसर का खतरा

एचपीवी वायरस के 100 प्रकार होते हैं लेकिन 18 ही हाई रिस्क वायरस होते हैं। एचपीवी 16 और 18 ही सर्वाइकल कैंसर का कारण बनता है।सर्वाइकल कैंसर ह्यूमन पैपिलोमा वायरस से फैलता है इसलिए इसे रोकने लिए वैक्सीन लगाई जाती है।

सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाला सबसे ज्यादा जानलेवा और खतरनाक कैंसर है। एचपीवी स्ट्रेंन के 150 से ज्यादा टाइप हैं जिनमे से दो सबसे शक्तिशाली टाइप हैं- पहला है एचपीवी -16 और दूसरा है एचपीवी -18, इन्हीं से सर्वाइकल कैंसर होता हैं।इसे केवल वैक्सीनेशन के माध्यम से ही ख़त्म किया जा सकता है। एचपीवी वैक्सीन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं लेकिन लोगों में इसके बारे में ज्यादा जागरूकता नहीं है। उपलब्धता के बावजूद वैक्सीन को लगवाने वाले बहुत ही कम लोग है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि महिलाएं अक्सर अपने स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की अनदेखी करती हैं।

डॉक्टर रूमा सात्विक ने बताया कि इस बीमारी से बचने के लिए टीनेज में लड़कियों को एचपीवी वैक्सीन लगाई जाती है। इसे लगाने की सही उम्र 11 से 15 साल है। हर माता-पिता को अपनी बेटी को इसकी डोज लगवानी चाहिए। 1 डोज लगने के बाद दूसरी डोज 6 महीने के बाद लगती है। अगर 15 साल से ज्यादा उम्र हो 3 डोज दी जाती है। एक डोज लगने के बाद दूसरी डोज 1 महीने बाद और तीसरी डोज 6 महीने के बाद लगती है।

 

 

सर्वाइकल ज्यादा पार्टनर पर होने वाली कैंसर का खतरा

वैक्सीन को लगाने का सही समय तब होता है जब लड़की सेक्शुअली एक्टिव ना हो। छोटी उम्र में लड़कियों को पीरियड्स भी शुरू नहीं होते। चूंकि सर्वाइकल कैंसर संबंध बनाने से हो सकता है इसलिए कम उम्र में ही लड़कियों को इसकी डोज दे देनी चाहिए ताकि भविष्य में उन्हें उनके पार्टनर से कोई अनचाहा वायरस ना मिले। अगर मिले भी तो सर्विक्स पर उसका कोई असर ना पड़े।

शादीशुदा महिलाओं को भी इसकी डोज लगाई जाती है। वह कहती हैं कि आमतौर पर हम यह मानकर चलते हैं कि महिला का पूरी जिंदगी एक ही सेक्शुअल पार्टनर होता है। इसलिए उनमें सेक्शुअली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन का रिस्क जीरो होता है। हम उनका कोई टेस्ट नहीं कराते। हम मानकर चलते हैं कि जरूरी नहीं महिला को इंफेक्शन है। या इंफेक्शन है तो जरूरी नहीं, वही वायरस हो। वहीं, अगर वही वायरस हो तो यह वैक्सीन दूसरे संक्रमणों से सुरक्षा देती है।

सरकारें अपने स्तर पर स्कूल में लड़कियों को एचपीवी वैक्सीन लगवा रही हैं। यह मुहिम सबसे पहले नवंबर 2016 में दिल्ली सरकार ने सरकारी स्कूलों में शुरू की। कक्षा 6 की छात्राओं को डोज दी गई। 2016 से 2020 तक 11 से 13 साल की उम्र की 13 हजार लड़कियों को टीका लगाया गया। इसके बाद इस योजना को 2017 में पंजाब और 2018 में सिक्किम में शुरू किया गया।

सर्वाइकल कैंसर के 10 सामान्य लक्षण

पीरियड्स अनियमित हो जाना
पीरियड्स में सामान्य से ज्यादा खून निकलना
सफेद पदार्थ का निकलना
शारीरिक संबंध के बाद खून निकलना
पेट के निचले हिस्से में दर्द या सूजन
बार-बार यूरिन आना
बहुत अधिक थका हुआ महसूस करना
अक्सर हल्का बुखार और सुस्ती रहना
भूख न लगना या बहुत कम खाना
सीने में जलन और लूज़ मोशन आदि

 

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