
टीका 90 प्रतिशत तक संक्रमण रोकने में कारगर

हेपेटाइटिस बी लिवर का रोग है। हेपेटाइटिस बी का तीव्र संक्रमण संक्रमित के संपर्क में आने के छह महीने के भीतर होता है। कुछ लोगों में इसका कोई लक्षण नहीं दिखाई देता। उन्हें पता भी नहीं चलता कि उन्हें संक्रमण है। क्रॉनिक hepatitis-B वायरस के संपर्क में आने के छह महीने से ज्यादा समय तक रहता है। ऐसी गंभीर बीमारियों के बीच काम कर रहे स्वास्थ्य कर्मियों के लिए संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। जिन कर्मियों का नियमित रूप से रक्त, इंजेक्शन, ड्रेसिंग या प्रसव आदि से संपर्क होता है, उनमें hepatitis-B का खतरा हो सकता है। इसलिए डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और वार्ड वॉय को टीका देकर संक्रमण से सुरक्षित करना बेहद जरूरी है। इसे लेकर शासन ने भी निर्देश जारी किए थे, लेकिन जिले के सरकारी अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर 1500 से ज्यादा स्वास्थ्य कर्मियों को प्रॉफिलेक्टिक इंजेक्शन नहीं लग पाया है। इससे इनमें संक्रमण का खतरा बना हुआ है।यह भी पढ़ें:गंगेश्वर दत्त शर्मा : ट्रेड यूनियनों के मजदूरों ने जगह-जगह जुलूस निकालकर किये प्रदर्शन
थकान और पेट दर्द भी हैं लक्षण>>>Visit: Samadhanvani

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, हर साल दुनिया भर में करीब 50 लाख स्वास्थ्यकर्मी हेपेटाइटिस बी से संक्रमित होते हैं। आम लोगों की तुलना में स्वास्थ्यकर्मियों में संक्रमण की संभावना 10 गुना अधिक होती है और हेपेटाइटिस बी वायरस के इलाज की कोई तय व्यवस्था नहीं है। ऐसे में इसका टीका ही संक्रमण से बचाव का आखिरी और सबसे कारगर उपाय माना गया है। यह टीका लगभग 90 प्रतिशत तक संक्रमण को रोकने में कारगर है। टीका की खुराक शून्य, एक और छह महीने पर दी जाती है रोगी को हेपेटाइटिस बी में थकान, पेट दर्द, पीलिया (त्वचा और आंखों का पीला पड़ना), गहरे रंग का पेशाब, हल्के रंग का मल, भूख में कमी, पेट में दर्द, चकत्ते, पेट के दाहिने हिस्से में दर्द, बुखार, मतली, उल्टी और जोड़ों का दर्द की समस्या हो सकती हैं। कुछ लोगों को हेपेटाइटिस बी के कोई लक्षण नहीं होते हैं। ऐसा कोई डाटा नहीं है कि कितने कर्मचारियों को टीके का कवच मिला। आपूर्ति होने पर अस्पतालों को फिर से टीके का वितरण किया जाएगा, ताकि स्वास्थ्य कर्मी इंजेक्शन लगवा सकें
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