
तिब्ब्तन एडमिनिस्ट्रेशन को भूमि के दस्तावेज सौंपते

लद्दाख में बौद्ध गुरु दलाई लामा प्रवास के बीच तिब्बतियों को ऐसी जगह बसाने की रणनीति बनी है जिससे चीन को जरूर मिर्ची लगेगी। लेह जिले में चीन से लगती वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के करीब चुमुर क्षेत्र में तिब्बत से पलायन कर चुके लोगों के लिए बसाने की तैयारी है। चीन के सामने तिब्बतियों को बसाने के पीछे क्षेत्र की सुरक्षा को भी बल मिलेगा। क्योंकि चीन चुमुर में कई बार घुसपैठ की कोशिश भी कर चुका है। लेह में बसे तिब्बतियों के पुनर्वास को लेह के थिक्से मठ के थिक्से रिनपौचे ने सेंट्रल तिब्ब्तन एडमिनिस्ट्रेशन को 7.75 एकड़ भूमि दी है।
चीन के तिब्बत पर कब्जा करने के बाद वहां से तिब्बती घर छोड़ने को मजबूर हो गए>>>Visit: Samadhanvani

चुमुर पूर्वी लद्दाख में चीन से लगती एलएसी के करीब है। दलाई लामा के लद्दाख दौरे के दौरान चुमुर इलाके में दी जमीन क्षेत्र में बसे तिब्बतियों के कल्याण के लिए इस्तेमाल की जाएगी। इस भूमि के कागजात नौवें थिक्से रिनपौचे, नवांग जामयांग चंबा स्टेंजिन ने उनसे मिलने पहुंचे सेंट्रल तिब्ब्तन एडमिनिस्ट्रेशन के प्रतिनिधि सिकयोंग पेंपा सेरिंग को सौंपे। इस भूमि पर उन तिब्बत के लोगों का पुनर्वास किया जाएगा जिनके पास लेह में अपने घर नहीं हैं। पूर्वी लद्दाख का चुमुर इलाका लेह से 300 किलोमीटर की दूरी पर है। एलएसी पर चुमुर से सटा चीन के कब्जे वाला इलाका कभी तिब्बत का हुआ करता था। चीन के तिब्बत पर कब्जा करने के बाद वहां से तिब्बती घर छोड़ने को मजबूर हो गए थे। लेह में सोनमलिंग तिब्बत सेटेलमेंट में सैकड़ों तिब्बती परिवार शरण लिए हैं। समय के साथ तिब्ब्तियों की संख्या में वृद्धि से जमीन कम पड़ रही है। सोनमलिंग सेंटलमेंट का संचालन हिमाचल के धर्मशाला से संचालित होने वाली सेंट्रल तिब्ब्तन एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा किया जा रहा है।
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