
रमजान की वजह से उस समय इलाका बंद था और यह स्पष्ट नहीं हो सका

मालेगांव विस्फोट मामले में करीब 17 वर्ष बाद विशेष अदालत ने भाजपा की पूर्व सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर और लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित समेत सभी सातों आरोपियों को गुरुवार को बरी कर दिया। अदालत ने कहा, इनके खिलाफ कोई विश्वसनीय और ठोस सबूत नहीं मिले राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत के न्यायाधीश एके लाहोटी ने कहा, कोई भी धर्म हिंसा नहीं सिखाता। मालेगांव धमाके में आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता, लेकिन धारणा के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। संदेह वास्तविकता की जगह नहीं ले सकता न्यायाधीश ने कहा कि मामले को संदेह से परे साबित करने के लिए कोई विश्वसनीय और ठोस सबूत नहीं है।
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मालेगांव धमाके में यूएपीए के प्रावधान लागू नहीं होते कोर्ट ने कहा, मामले में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यूएपीए) के प्रावधान लागू नहीं होते। सरकारी पक्ष यह तो साबित कर सका कि बम विस्फोट हुआ था, लेकिन यह साबित नहीं कर पाया कि बम बाइक पर ही लगाया गया था। कोर्ट के फैसले के बाद सभी आरोपियों ने न्यायाधीश और वकीलों का आभार जताया सरकारी पक्ष यह साबित कर सका कि विस्फोट हुआ, लेकिन यह साबित नहीं कर पाया कि बाइक पर ही बम लगाया गया था।लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित के कश्मीर से आरडीएक्स लाने का ठोस सबूत नहीं मिला। न ही यह साबित हो सका कि उन्होंने अपने घर पर बम तैयार किया था।बाइक वहां कैसे पहुंची। ऐसा कहा गया कि इंदौर, उज्जैन और नासिक जैसे स्थानों पर साजिश रचने के लिए बैठकें हुईं, लेकिन इनका विश्वसनीय प्रमाण पेश नहीं किया जा सका।अभिनव भारत मामले में पुरोहित, राहिरकर और उपाध्याय में वित्तीय लेनदेन के प्रमाण मिले, लेकिन उसका उपयोग आतंकी गतिविधियों में हुआ, यह साबित नहीं।
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