
किसान का बेटा हूं, मिट्टी से अब भी ताजगी मिलती है

अरबाज खान के साथ काम करने के बारे में बात करते हुए धर्मेंद्र बोले, “अरबाज के साथ पिछली बार ‘प्यार किया तो डरना क्या’ में काम किया था। तब वो बिल्कुल नया था। इतने सालों बाद जब फिर साथ काम किया, तो ऐसा लगा जैसे वक्त वापस घूमकर वहीं आ गया हो। उसमें अब समझ और अनुभव आ गया है, लेकिन उसकी सादगी और सम्मान वैसा ही है। काम करते हुए ऐसा लगा, जैसे कोई पुराना रिश्ता फिर से जी उठा हो। ये सिर्फ प्रेम कहानी नहीं…’फिल्म को लेकर धर्मेंद्र ने कहा- ‘यह सिर्फ एक प्रेम कहानी नहीं है। इसमें रिश्तों की गहराई है। अपनापन है, भरोसा है, जो आजकल कम देखने को मिलता है। इस फिल्म में काम करके ऐसा लगा, जैसे मैंने खुद से दोबारा प्यार किया हो ‘मेरे बच्चे सिर्फ वारिस नहीं, मेरी रूह का हिस्सा हैं’सनी और बॉबी देओल पर बात करते हुए धर्मेंद्र भावुक हो गए। उन्होंने कहा, ‘मैं अपने बच्चों से बहुत कुछ कहे बिना भी जुड़ा रहता हूं। वे समझदार हैं, मेहनती हैं और अपने रास्ते खुद बना रहे हैं। मैं बस चुपचाप उनके लिए दुआ करता हूं। जब उन्हें पर्दे पर देखता हूं या उनकी कोई बात सुनता हूं, तो ऐसा लगता है कि मेरी जिंदगी का सफर अभी भी चल रहा है, उनके कदमों में, उनके फैसलों में। जो सपना कभी मैंने देखा था, अब वो मेरी अगली पीढ़ी जी रही है। यही सबसे बड़ी तसल्ली है। हम सिर्फ पिता-पुत्र या पिता-पुत्री नहीं हैं>>>Visit: Samadhanvani
जो बातें दिल में रह जाती हैं, वही अल्फाज बनकर बाहर आती हैं

अरबाज के साथ एक-दूसरे के हमसफर हैं ’89 की उम्र में भी मैं जिंदगी को उसी जोश से जीता हूं ‘धर्मेंद्र आज भी काफी एक्टिव रहते हैं और जिंदगी को पूरे जोश के साथ जीते हैं। उनके नजदीक बैठता हूं, पेड़ों की छांव में कुछ पल गुजारता हूं। वहां मुझे चैन मिलता है ‘सोचता हूं दिल की बातों को एक किताब या वीडियो में कहूं’धर्मेंद्र की शायरी और सोशल मीडिया पोस्ट लोगों को छू जाती है। वह मुस्कराकर कहते हैं कभी कोई याद, कभी अधूरी ख्वाहिश या बस कोई अहसास। सोचता हूं कि इन्हें एक किताब का रूप दूं, या वीडियो में बोलकर लोगों से बांटूं ‘शोले’ की वो शूटिंग आज भी दिल में जिंदा है पुरानी फिल्मों की बात आते ही धर्मेंद्र थोड़ी देर के लिए किसी और समय में लौट जाते हैं। ‘शोले’ को याद करते हुए वो मुस्कुराकर कहते हैं, ‘एक सीन था, जिसमें भगवान की मूर्ति के पीछे माइक छिपाकर डायलॉग बोलना पड़ा। उस जमाने में साधन बहुत सीमित थे, लेकिन दिल में जुनून और ईमानदारी भरपूर थी। शायद यही वजह है कि वो फिल्म आज भी लोगों के दिलों में उसी शिद्दत से जिंदा है, जैसे पहले दिन थी।



