
बुजुर्ग ऐसे हैं, जिनके पास न घर है, न कोई अपना

सोनू गांव-देहात से लेकर शहरों तक, लोगों ने जिस तरह से प्यार जताया, वो मेरे लिए. बड़ी बात है। मैं जब पहली बार मुंबई आया था, तो कुछ नहीं था। तब किसी ने नहीं सोचा था कि एक दिन ऐसा भी होगा। आज जब इतने सारे लोग बिना मिले भी मुझे अपना मानते हैं, तो लगता है कि शायद भगवान ने किसी काम के लिए ही यहां तक पहुंचाया है।हां, हम एक बड़ा वृद्धाश्रम बना रहे हैं, जिसमें करीब 500 बुजुर्ग रह सकेंगे। सोनू मैं हमेशा सोचता हूं कि जिन बुजुर्गों ने अपना पूरा जीवन अपने परिवार और समाज को दिया, उन्हें अकेला नहीं छोड़ना चाहिए। हम जो वृद्धाश्रम बना रहे हैं, वह सिर्फ रहने की जगह नहीं होगी। वहां ऐसा माहौल होगा, जैसे कि अपना घर हो।जब पता चला कि उनकी जिंदगी एक गाय के सहारे चल सकती है, तो लगा कि इसमें देरी नहीं होनी चाहिए।>>>Visit: Samadhanvani
2021 में किसानों पर आधारित फिल्म की बात की थी

फिल्म मेरे लिए बहुत खास है मैंने कई राज्यों में जाकर असली किसानों से मुलाकात की है। उनकी जिंदगी, संघर्ष, उनका धैर्य – ये सब मुझे बहुत कुछ सिखा गया फिल्म सिर्फ खेती की बात नहीं करेगी, बल्कि किसानों की सोच, मेहनत और आत्मसम्मान को दिखाएगी। मैं खुद इसे डायरेक्ट कर रहा हूं। मैं चाहता हूं जो बात कही जाए, वो दिल से निकले और सही तरीके से पहुंचे। क्या इस फिल्म में किसी बड़े बॉलीवुड अभिनेता के साथ काम हो रहा है? कुछ तय नहीं है। जरूरी भी नहीं समझता। अगर मकसद सही है, तो लोग अपने आप जुड़ते हैं।आप एक्शन फिल्म पर भी काम कर रहे हैं? हां, एक एक्शन फिल्म पर काम चल रहा है। मैं खुद इसे डायरेक्ट और प्रोड्यूस कर रहा हूं। हम ऐसी चीज पर काम कर रहे हैं जो शायद अब तक भारतीय सिनेमा में कम देखी गई है। इसे जल्दी अनाउंस करूंगा किन कहानियों को परदे पर लाना चाहेंगे? अब वो समय है जब सिनेमा सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज की बात भी करे। किसान हों, मजदूर हों या हमारे बुजुर्ग, इनकी कहानियां बहुत जरूरी हैं। मैं ऐसी फिल्में बनाना चाहता हूं, जो दिल से निकली हों और लोगों को कुछ सोचने पर मजबूर करें।



