
जेन-जी की पसंद देश की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश रहीं सुशीला कार्की

सड़कों पर सेना उतरने के पीएम के लिए महिला मुख्य न्यायाधीश । रहीं सुशीला कार्की का नाम सबसे आगे: नेपाल में विरोध प्रदर्शन की आड़ में फैली हिंसा, तोड़फोड़ और आगजनी रोकने के लिए सेना सड़कों पर उतर गई है। प्रदर्शनों पर राष्ट्रव्यापी प्रतिबंध के आदेश के साथ कर्फ्यू लगा दिया है। इस बीच, आंदोलनकारी अंतरिम सरकार बनाने की तैयारियों में जुट गए हैं। जेन-जी की पसंद देश की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश रहीं सुशीला कार्की का नाम सबसे आगे है। बृहस्पतिवार को उनके नाम का एलान किए जाने की संभावना है। सड़कों पर सेना उतरने के दो दिन तक सरकार विरोधी प्रदर्शनों के कारण प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली समेत कई मंत्रियों के इस्तीफे के बाद बुधवार को काठमांडो समेत प्रमुख शहरों में तनावपूर्ण शांति रही। पूर्व प्रधानमंत्री पुष्पकमल दहल प्रचंड की बेटी गंगा दहल के ललितपुर स्थित सुनाकोठी में घर में एक जला शव मिला है। प्रदर्शनकारियों ने मंगलवार को गंगा के घर में आग लगा दी थी। ललितपुर के एसपी श्यामकृष्ण अधिकारी ने बताया कि शव पुरुष का है, पर उसकी पहचान नहीं हो पाई है। सेना ने कहा, देश की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कर्फ्यू लगाया है, जो बृहस्पतिवार सुबह छह बजे तक रहेगा। किसी प्रकार के प्रदर्शन, तोड़फोड़, आगजनी, व्यक्तियों या संपत्ति पर हमले को लेकर भी सख्त चेतावनी दी गई। सेना ने साफ किया, ऐसे कृत्य अपराध होंगे, उसी के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। सेना ने मंगलवार रात दस बजे से सुरक्षा की कमान अपने हाथों में ले ली थी। संसद भवन, प्रमुख सरकारी भवनों, नेताओं-सांसदों के सरकारी व निजी घरों के साथ ही प्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर की सुरक्षा में सैनिक तैनात कर दिए गए थे।>>>Visit: Samadhanvani
आंदोलनकारियों को तोड़फोड़ नहीं करने की सख्त चेतावनी

सेना ने मुश्किल हालात का अनुचित लाभ उठाते हुए आम नागरिकों व सार्वजनिक संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचाने पर चिंता जताई। मुश्किल में फंसे विदेशी नागरिकों को मदद के लिए नजदीकी सुरक्षा चौकी या कर्मियों से संपर्क करने की सलाह दी गई है। सेना ने होटलों, पर्यटन उद्यमियों व एजेंसियों से भी अनुरोध किया कि वे जरूरतमंद विदेशी नागरिकों को जरूरी मदद दें। आम लोगों से भी बहुत जरूरी होने पर ही घर से निकलने को कहा गया है।
दो दिन की हिंसा के बाद राजधानी काठमांडो में बुधवार को सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा। आंदोलनकारियों को तोड़फोड़ नहीं करने की सख्त चेतावनी के बाद मुख्य सड़कों और इमारतों के पास बड़ी संख्या में सैनिक मुस्तैद रहे।
13,572 कैदी फरार, मधेश की जेलों से भागे कैदियों के भारत आने की आशंकानेपाल पुलिस के प्रवक्ता व डीआईजी विनोद घिमिरे ने बताया कि आंदोलन के दौरान नेपाल की जेलों से 13,572 कैदी फरार हो चुके हैं। वहीं, पुलिस हिरासत में 560 लोग फरार हुए हैं। इनमें बिहार से सटे नेपाल के मधेश प्रदेश की सप्तरी, महोत्तरी व रौतहट जेलों से ही 983 कैदी फरार हुए। सप्तरी से 205 कैदी भागे, जिनमें से 31 को फिर पकड़ लिया गया। महोत्तरी की जलेश्वर जेल से सभी 576 कैदी फरार हुए, जबकि रौतहट के गौर कारागार से 233 कैदी भाग निकले। कैदियों के भारत पहुंचने की आशंका है।चार भारतीय बंदी पीलीभीत पहुंचे, दो परिजनों के सुपुर्द : कंचनपुर जिले की जेल से भी कई बंदी भाग गए। इनमें पीलीभीत के माधोटांडा व हजारा के चार भारतीय बंदी शामिल हैं। इनमें से चितरंजन सरकार (64) व रंजन विश्वास (34) को डीएम ज्ञानेंद्र सिंह के आदेश पर उनके परिवार के सौंप दिया, जबकि दो अन्य कागजी प्रक्रिया के कारण घर नहीं पहुंच सके। दोनों को बीते साल नवंबर में नेपाल सीमा के पास जमीन जोतने के मामले में नेपाल पुलिस ने पकड़ा था।



