
पूर्व प्रधानमंत्री केपी ओली, पूर्व गृह मंत्री लेखक समेत अन्य नहीं छोड़ सकेंगे नेपाल

नेपाल के जेन-जी आंदोलन के दमन की जांच के लिए गठित आयोग की सिफारिश पर अंतरिम सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली सहित पांच लोगों पर यात्रा प्रतिबंध लगा दिया है। अंतरिम सरकार ने यह फैसला कैबिनेट बैठक में लिया। प्रतिबंधित लोग, काठमांडो से बाहर व विदेश यात्रा नहीं कर सकेंगे। जांच आयोग ने सभी के पासपोर्ट भी जब्त करने की सिफारिश की है। सकार ने जिन लोगों पर यात्रा प्रतिबंध लगाया है, उनमें पूर्व गृहमंत्री केपी शर्मा ओली रमेश लेखक, पूर्व गृहसचिव गोकर्णमणि दुवाडी, राष्ट्रीय अन्वेषण विभाग के पूर्व प्रमुख हुतराज थापा व काठमांडो के पूर्व सीडीओ छवि रिजाल शामिल हैं। जांच आयोग के अध्यक्ष गौरीबहादुर कार्की ने कहा कि जांच के लिए अतिरिक्त लोगों की आवश्यकता है। इस संबंध में गृह मंत्रालय से मांग की जाएगी कार्की ने कहा कि 8 और 9 सितंबर की घटनाओं की जांच के सिलसिले में पांचों लोग जांच के दायरे में हैं। इसलिए, इन पर यात्रा प्रतिबंध लगाया गया है। आयोग की स्वीकृति के बिना इन्हें काठमांडो घाटी से बाहर भी नहीं जाने दिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि आठ सितंबर को हुए जेन-जी आंदोलन में पुलिस की तरफ से घातक हथियार प्रयोग किए गए थे, जिसमें 19 लोगों की मौत हो गई थी। पूर्व प्रधानमंत्री ओली ने दावा किया था कि उन्होंने पुलिस को गोली चलाने का आदेश नहीं दिया था।>>>Visit: Samadhanvani
नेपाली जेलों से भागे 7,700 से अधिक कैदी वापस आए

काठमांडो। नेपाल में ‘जेन-जी विरोध के दौरान विभिन्न जेलों से भागे 14,558 कैदियों में से 7,735 कैदी अपने-अपने कारागारों में लौट आए था उन्हें वापस लाया गया है। कारागार प्रबंधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, 8 और 9 सितंबर को हुए जेन-जी विरोध के दौरान यह बड़ी संख्या में कैदी जेलों से फरार हुए थे। इन विरोधों में सुरक्षा बलों के साथ हुई झड़पों में 10 कैदियों की मौत हो गई, जबकि कुछ कैदी स्वेच्छा से लौट आए। अन्य को सुरक्षा बलों ने गिरफ्तार किया। हालांकि, अब भी 6.813 कैदी विभिन्न जेलों से फरार हैं। सरकार ने फरार कैदियों को गिरफ्तार करने के लिए अभियान शुरू कर दिया है।



