
वित्त मंत्री बोलीं-वैश्विक असंतुलन के दौर में भारत स्थिरता की ताकत

बाहरी झटके झेलने में देश दुनिया व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा में गंभीर असंतुलन का सामना कर रही है। एक संरचनात्मक परिवर्तन के दौर से गुजर रही है, जिसमें भारत एक स्थिर शक्ति के रूप में उभर रहा है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, युद्ध और रणनीतिक प्रतिस्पर्धाएं सहयोग और संघर्ष की नई सीमाएं खींच रही हैं। भारत के लिए यह समय सतर्क रहने का है। इसमें ढिलाई की कोई गुंजाइश नहीं है। इस शक्ति की बदौलत देश बाहरी झटकों का सामना कर सकता है। विकसित भारत के लक्ष्य को पूरा करने के लिए 8 फीसदी की दर से हमारी जीडीपी बढ़ेगी।कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन में वित्त मंत्री ने कहा, देशों के बीच संघर्ष तेज हो रहे हैं। प्रतिबंध व शुल्क वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को नया रूप दे रहे हैं। युद्ध और रणनीतिक प्रतिद्वंद्विता सहयोग व संघर्ष की सीमाओं को फिर से परिभाषित कर रही है>>>Visit: Samadhanvani
शक्तिशाली कारकों के संयोजन का परिणाम

बाहरी झटके झेलने में जो गठबंधन कभी मजबूत दिखते थे, उनकी परीक्षा ऐसी वैश्विक व्यवस्था कैसे बना सकते हैं जहां व्यापार निष्पक्ष हो। हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ घरेलू कारक हैं। वित्त मंत्री ने कहा, वैश्विक व्यवस्था बदल रही है। अंतरराष्ट्रीय संस्थान अब विश्व समुदाय का भरोसा खो रहे हैं। ऐसे में इन संस्थानों में सुधार की जरूरत है, ताकि वैश्विक स्थिरता बहाल हो सके। सामने आने वाली चुनौतियां बहुत बड़ी हैं। नया वैश्विक संतुलन कई कारकों को ८. ध्यान में रखकर बनाना होगा वैश्विक व्यापार औरऊर्जा में असंतुलन, भारत बना स्थिरता और संतुलन की मिसाल, सतर्कता जरुरी, ढिलाई नहीं चलेगी वैश्विक अर्थव्यवस्था कम निवेश, पूंजी की ऊंची लागत, ऊर्जा की अस्थिर कीमतों, विकास और स्थिरता के बीच तनाव का सामना कर रही है ऐसे में एक स्थिरकारी शक्ति के रूप में भारत का उदय न तो आकस्मिक है और न ही क्षणिक । यह कई शक्तिशाली कारकों के संयोजन का परिणाम है।



