
2025 का यह चुनाव मखाना की मिठास, घुसपैठ के डर

मखाना की खुशबू सीमांचल का सियासी यलगार… रोजगार, घुसपैठ सांस्कृतिक पहचान-पलायन जैसे मुद्दों ने उलझाया मांचल अब बिहार की राजनीति का सिर्फ भूगोल. नहीं रहा। यह वह युद्धभूमि बन चुका है, जहां आर्थिक विकास बनाम सांस्कृतिक पहचान की निर्णायक लड़ाई लड़ी जा रही है। 2025 का यह चुनाव मखाना की मिठास, घुसपैठ के डर और वोटर अधिकार की हुंकार के साथ तीखे त्रिकोण में फंस चुका है, जहा एनडीए, महागठबंधन और एआईएमआईएम तीनों अपनी-अपनी पिच पर डटे है। पूर्णिया और आस-पास के जिलों में घूमते ही एक बात तो समझ आती है कि सीमांचल की मिट्टी तो नरम है पर यहां राजनीतिक फैसले बेहद सख्त होते हैं। सबसे बड़ी बात मतदान हमेशा बिहार के बाकी हिस्सों से अधिक होता है।: सीमांचल की चुनावी हवा में पहली बार कृषि अर्थव्यवस्था ने जातीयः समीकरणों को सीधी चुनौती दी है।सीमांचल-मिथिलांचल, का मखाना अब मात्र सुपरफूड नहीं, बल्कि राजनीतिक सुपर-फॉर्मूला बन चुका है। नरेंद्र मोदी ने मखाना बोर्ड, मक्का प्रोसेसिंग क्लस्टर और बिहार न्यूट्री-बास्केट के जरिए सीमांचल के किसानों को नई पहचान दी है। यह सिर्फ योजना नहीं, बल्कि वह राजनीतिक सूत्र है, जिसके जरिये एनडीए ने पारंपरिक एमवाई (मुस्लिम-यादव) आधार पर प्रहार किया है।>>>Visit: Samadhanvani
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि घुसपैठ बढ़ी तो बिहार की धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत तक खतरा

रोजगार और सरकारी मदद से जोड़ा, ताकि यह मुद्दा सिर्फ उत्पादन नहीं, बल्कि वितरण और न्याय का बन जाए। इस राजनीति ने मखाना के मुद्दे को सिर्फ खेती-किसानी ही नहीं, बल्कि पलायन, गरीबी और बिहार की अर्थव्यवस्: ध्रुवीकरण की धुरी, मोदी-शाह-योगीसीमांचल की चुनावी पिच की दिशा तब तेजी से बदली, जब घुसपैठ और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे हावी हो गए। पहले चरण में विकास और सुशासन पर फोकस करती रहे एनडीए के शीर्ष नेताओं ने अपनी-अपनी शैली में इस मुद्दे को जनता की पहचान से जोड़कर यहां का सबसे ज्वलंत मुद्दे को हवा दे दी।पीएम मोदी सीमांचल में हो रही रैलियो में अवैध बांग्लादेशी घुसपैठ, सीमा की असुरक्षा व मदरसा मॉनिटरिंग को उठा रहे हैं। उनका सीधा संदेश था कि सीमा असुरक्षित तो बिहार असुरक्षित। पीएम ने यहां राम मंदिर का मुद्दा भी उठाया, उसे कौन नहीं बनने दे रहा था, यह भी याद दिलाया। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने अपने फायरब्रांड अंदाज में इसे और तीखा किया।



