
चीन की दोहरी चाल पीछे से साइबर युद्ध, पाक को सैन्य आपूर्ति

अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस की तरफ से वॉशिंगटन में जारी यूएस-चीन आर्थिक और सुरक्षा समीक्षा आयोग की वार्षिक रिपोर्ट में वह तस्वीर उभरकर आई है जिसे भारत पिछले एक साल में महसूस करता रहा है। चीन शांति की बातचीत करता है, लेकिन सीमाओं और सैन्य ढांचे पर दबाव बढ़ाता जा रहा है। यह दोहरी रणनीति अब सिर्फ कूटनीति का हिस्सा नहीं, बल्कि एक बड़े खेल की तैयारी लगती है। यह खेलं सिर्फ सीमा पर सैनिकों की तैनाती तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, चीन एक ओर शांति वार्ता का दिखावा कर रहा है अमेरिकी कांग्रेस की तो दूसरी ओर वह भारत के खिलाफ, ग्रे जोन गतिविधियां, जिसे हम युद्ध और शांति के बीच की चालें कह सकते हैं, उसका खूब उपयोग देखने को मिला। पाकिस्तान को सैन्य आपूर्ति के साथ-साथ साइबर युद्ध और दुष्प्रचार के माध्यम से लगातार दबाव बनाने में चीन ने कोई कसर नहीं छोड़ी। >>>Visit: Samadhanvani
भारत से रक्षा टकराव में चीन ने की पाकिस्तान की पूरी मदद

भारत को अब सिर्फ सीमाओं पर ही नहीं, बल्कि डेटा, सूचना और तकनीक की लड़ाई में भी चीन से टकराना पड़ेगा। दरअसल, पठानकोट की घटना के बाद मई 2025 में हुए भारत-पाकिस्तान टकराव से ठीक पहले, चीन ने भारत को निशाना बनाकर एक व्यापक दुष्प्रचार अभियान चलाया। चीन ने इस ऑपरेशन में झूठे सोशल मीडिया अकाउंट के माध्यम से यह नैरेटिव फैलाया गया कि चीनी लड़ाकू विमानों ने भारत के पश्चिमी या रूसी हथियारों जैसे रफाल को गिरा दिया है। चीन का प्राथमिक उद्देश्य अपने हथिवारों को वैश्विक बाजार में सबसे शक्तिशाली (अमेरिका के समक्ष) और विश्वसनीय साबित करना था, जिससे भारत सहित अन्य देश पश्चिमी और रूसी रक्षा प्रणालियों पर भरोसा खो दें और चीनी हथियारों की ओर मुड़ें। अक्तूबर 2024 में डेपसांग-डेपचोक में संयुक्त गश्त की सहमति बनी। भारत से रक्षा टकराव में चीन ने की पाकिस्तान की पूरी मदद रिपोर्ट का सबसे बड़ा खुलासा मई 2025 के भारत-पाकिस्तान रक्षा टकराव से जुड़ा है। इस दौरान चीन ने जो किया, वह इस रिपोर्ट में तफसील ने बताया गया है और वह खतरनाक है।अमेरिकी कांग्रेस की पाकिस्तान ने इस संघर्ष में चीनी हथियारों एचक्यू-9, पीएल-15 और जे 10 का खुलकर इस्तेमाल किया। भारत ने दुनिया को बताया भी था कि चीन ने लाइव इनपुट्स दिए, जिसे बीजिंग ने खारिज तो किया, लेकिन सहयोग के कई संकेत छिपे नहीं रह सके।



