
राष्ट्रपति कार्यालय ने बताया असाधारण अनुरोध, कहा- इसके महत्वपूर्ण निहितार्थ

नेतन्याहू ने हरजोग से अपने खिलाफ लंबे समय से जारी भ्रष्टाचार के मुकदमे में क्षमादान प्रदान करने की मांग की है। netanyahu ने कहा कि इस मुकदमे ने देश को बुरी तरह विभाजित कर दिया है। राष्ट्रपति कार्यालय ने इसे एक असाधारण अनुरोध बताया जिसके महत्वपूर्ण निहितार्थ हैं। दूसरी तरफ, विपक्ष ने कहा कि क्षमादान से लोकतांत्रिक संस्थाएं कमजोर होंगी और एक खतरनाक संदेश जाएगा कि नेतन्याहू कानून से ऊपर हैं। इस्राइली प्रधानमंत्री कार्यालय ने रविवार को एक बयान में कहा कि नेतन्याहू ने राष्ट्रपति कार्यालय के कानून विभाग को क्षमादान का अनुरोध पेश किया है। एक बीडियो रिकॉडेंड बयान में netanyahu ने कहा कि मुकदमे की कार्यवाही ने देश को विभाजित कर दिया है और क्षमादान से देश में एकता की स्थापना में मदद मिलेगी। नेतन्याहू ने कहा कि हफ्ते में तीन बार अदालत में पेश होने की जरूरत के कारण देश संचालन में उन्हें समस्या पैदा होती है। क्षमादान आग्रह दो दस्तावेज शामिल किए गए हैं जिनमें से एक पर उनके वकील और एक पर उनके खुद के हस्ताक्षर हैं। दोनों दस्तावेज पर विधि मंत्रालय से राय ली जाएगी। इसके बाद राष्ट्रपति के विधि सलाहकार से राय मांगी जाएगी।>>>Visit: Samadhanvani
ट्रंप भी कर चुके हैं क्षमादान की सिफारिश

netanyahu इस्त्राइली इतिहास में एकमात्र ऐसे प्रधानमंत्री हैं जो 2019 के तीन मामलों में धोखाधड़ी, विश्वासघात व रिश्वत के आरोपों को लेकर मुकदमे का सामना कर रहे हैं। उन पर धनी राजनीतिक समर्थकों के साथ पक्षपात का आरोप है।उन्हें अभी तक किसी भी मामले में दोषी नहीं ठहराया गया है। 2023 से हमास से युद्ध के कारण भी मुकदमे की कार्यवाही प्रभावित हुई है। netanyahu इन आरोपों को खारिज करते रहे हैं और इन्हें मीडिया, पुलिस व न्यायपालिका की तरफ से गढ़ा हुआ करार देते रहे हैं।यह अनुरोध अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से इस्राइली राष्ट्रपति से नेतन्याहू को क्षमा करने का आग्रह करने के कुछ हफ्ते बाद आया है। महीने की शुरुआत में ट्रंप ने राष्ट्रपति इशाक हरजोग को एक पत्र लिखा था और भ्रष्टाचार के मुकदमे को राजनीतिक व अन्यायपूर्ण कार्यवाही बताया था।



