
सर्दी के मौसम में बदली दिनचर्या, विवाह पंचमी से रामलला को ओढ़ाई जाने लगी रजाई

रामलला की दिनचर्या भी बदलने लगी है। विवाह पंचमी यानीं 25 नवंबर से Ramlala को रजाई ओढ़ाई जाने लगी है। सुबह व शाम की सेवाओं में भी बदलाव किए गए हैं, ताकि शीत ऋतु में बाल स्वरूप प्रभु को पूर्ण आराम और ऊष्मा मिल सके। गर्भगृह में अब ऊनी वस्त्रों, रजाई और गरमाहट बढ़ाने वाली सुगंधित धूप का प्रयोग बढ़ा दिया गया है। राम मंदिर ट्रस्ट के अनुसार, इन दिनों Ramlala को अर्पित होने वाले भोग में भी परिवर्तन किया गया है। अब प्रसाद और नैवेद्य केवल सीता रसोई में ही तैयार किया जा रहा है। बाहर से आने वाले किसी भी खाद्य पदार्थ पर पूर्णतः रोक लगा दी गई है। भोग की थाली में अब शीत ऋतु के अनुरूप गर्माहट देने वाले व्यंजन हलवा, खीर, मूंग-मिश्री, सूखे मेवे और देसी घी से बने पकवान प्रमुख हैं। >>>Visit: Samadhanvani
Ramlala को पेड़ा व रबड़ी का भोग भी अर्पित किया

शुभारंभ कुछ ही दिन पहले हुआ है। सीता रसोई में सात कर्मचारी लगाए गए हैं। इनमें तीन भंडारी, दो कोठारी व दो अन्य सेवक सेवा देते हैं। रामलला को पेड़ा व रबड़ी का भोग भी अर्पित किया जाता है, यह भोग भी राम मंदिर की ही रसोई में तैयार किया जाता है, बाहर से मंगाने पर रोक लगा दी गई है। सुबह स्नान-भोग के बाद रामलला को पश्मीना शाल ओढ़ाई जाती है, वहीं शयन के समय उन्हें उत्तराखंड से आई रजाई ओढ़ाई जाती हैं।



