
85 तारीखे, 55 बार पेशी ही नहीं, SC स्तब्ध, बंदी को दे दी जमानत

सुप्रीम कोर्ट ने जेल अधिकारियों की कड़ी आलोचना की क्योकि वे अधिकांश सुनवाई की तारीख पर एक विचाराधीन बंदी (अंडरट्रायल) को ट्रायल कोर्ट में पेश नहीं कर सके। आरोपी 4 साल से अधिक समय से हिरासत में है और 85 में से 55 सुनवाई पर उसे कोर्ट में पेश अंडरट्रायल को डेट पर पेश न करना अधिकारों को गंभीर उल्लंघन है, जांच होः SC नही किया गया। मामले में याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुईं वकील सना रईस खान ने दलील दी कि उनके मुवक्किल की भूमिका चाकू से वार करने की बताई गई है, जैसा कि | मुखबिर द्वारा दर्ज कराई FIR में बताया गया है। मुखबिर खुद को चश्मदीद गवाह बताता है।सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देते हुए कोर्ट ने आरोपी को पेश न करने पर गहरी चिंता व्यक्त की, इसे मूलभूत सुरक्षा उपायों का गंभीर उल्लंघन बताया। Supreme Court ने महाराष्ट्र के जेल विभाग के प्रमुख को मामले की जांच करने और संबंधित अधिकारियो के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए। Supreme Court ने यह भी निर्देश दिया कि मामला 3 फरवरी 2026 को लिस्ट किया जाए ताकि जेल महानिरीक्षक/जेल विभाग प्रमुख की व्यक्तिगत रिपोर्ट पर विचार किया जा सके।>>>Visit: Samadhanvani
CJI के कोर्टरूम से वकील को निकालना पड़ा

NBT रिपोर्ट, नई दिल्लीः एक महिला वकील को बुधवार को भारत के चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत की अदालत से बाहर निकालना पड़ा। क्योकि बेच द्वारा कई बार अनुरोध किए जाने के बावजूद वह कोर्टरूम छोड़ने को तैयार नही थी। वकील ने CJI सुर्यकांत की अगुआई वाली पीठ के सामने एक मौखिक उल्लेख किया। दावा किया कि उनके क़रीबी की हत्या की जांच का जिम्मा उस अधिकारी को सौपा गया जिसने पहले FIR दर्ज करने से मना किया था। याचिका दायर करने की CJI की सलाह को अनसुना कर दलील जारी रखने पर महिला को कोर्टरूम से बाहर निकाला गया।



