
आतंकियों की ढाल, सेना ने ऊंचाई वाले इलाकों में बनाए अस्थायी कैंप

बर्फीले नहीं बनेगी सशस्त्र बलों ने पाकिस्तानी आतंकियों के खिलाफ बदली रणनीति, दुर्गम इलाकों में भी लगातार निगरानी भीषण सर्दी और बर्फबारी अब पाकिस्तानी आतंकवादियों की ढाल नहीं बनेगी। सेना ने जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ और डोडा जिलों में आतंकवाद विरोधी अभियान तेज कर दिया है, ताकि बदलते मौसम का फायदा उठाकर छिपने की कोशिश कर रहे दहशतगर्दों का पीछाकर उन्हें या तो सीमा पार भागने पर मजबूर किया जा सके या ढेर किया जा सके। बदली रणनीति में सेना ने बर्फीले इलाकों में अस्थायी कैंप और निगरानी चौकियां बनाई हैं, ताकि आतंकियों पर लगातार दबाव बना रहे।हाल के महीनों में लगातार कार्रवाई के कारण यह आतंकी अब ऊंचे और निर्जन पहाड़ी इलाकों में छिपने को मजबूर हुए हैं। आतंकी सर्दियों के लिए अस्थायी ठिकाने ढूंढ़ रहे हैं, ताकि सेना से बच सकें। सूत्रों के मुताबिक कुछ आतंकी स्थानीय लोगों को डराकर खाना और छिपने की जगह मांगने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि घटते स्थानीय समर्थन और कड़ी सुरक्षा के चलते वे अलग-थलग पड़ते जा रहे हैं।>>>Visit: Samadhanvani
जम्मू क्षेत्र में सीमा पर इस समय लगभग 30 से 35 पाकिस्तानी आतंकी मौजूद

जम्मू-कश्मीर में सबसे भीषण सर्दी में भी अभियान चलाकर आतंकियों का सफाया करने के लिए सेना 21 दिसंबर से 31 जनवरी तक लगातार अभियान चलाएगी। 40 दिनों का यह समय चिल्ले कलां कहलाता है। इस दौरान कश्मीर घाटी में सबसे भीषण ठंड पड़ती है। इस दौरान आतंकी गतिविधियां कम हो जाती हैं, क्योंकि बर्फबारी से रास्ते बंद हो जाते हैं और पहाड़ी इलाके कट जाते हैं। सेना बचे हुए आतंकियों के ठिकानों को खत्म करना चाहती है। आतंकियों को ऊंचे, दुर्गम इलाकों तक सीमित रखना चाहती है, ताकि वे आबादी वाले इलाकों में नहीं आने पाएं और उनकी सप्लाई व संपर्क व्यवस्था टूट जाए।



