
खानपान में विदेशी संस्कृति की नकल

नव वर्ष नई चेतना, नई प्रेरणा, व वर्ष 2026 आ रहा है। हर नए विचार, नए दृष्टिकोण, नई उमंग और नई आशा का संचार करता है। आज देश के सामने कुछ प्रमुख समस्याएं आ खड़ी हुई हैं, जिनके समाधान हमें ही ढूंढने होंगे और समाधान ढूंढने के लिए नए साल से अच्छा मौका हो नहीं सकता है। हमारा देश काफी बड़ा है अतः समस्याएं भी बड़ी हैं। सबसे पहले हमें सड़कों को सुरक्षित करना होगा। आज सड़कें मौत का रास्ता बनती जा रही हैं। सड़क पर गाड़ी चलाने वाले ज्यादातर लोग यातायात 1 नियमों से या तो अपरिचित हैं या वे नियमों का पालन नहीं करना चाहते। यह प्रवृत्ति हमें रोकनी ही होगी। बढ़ती बेरोजगारी के कारण आज छोटी जगहों से बड़ी जगहों की ओर पलायन काफी तेज हो गया है। आज गांव के गांव वीरान पड़े हैं, जबकि शहरों में छत के लिए भी जगह नहीं है। इसके लिए हमें स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ाकर पलायन रोकन आज देश में मोटापा और लोगों का क्रोध दोनों ही बढ़ रहा है। बचपन से ही ऐसी शिक्षा र्दी जानी चाहिए कि मोटापा और क्रोध दोनों ही घटते जाएं। स्वस्थ रहने के लिए योग, सैर आदि के साथ अपने रिश्तों को भी जिंदा रखना होमा। हम सबने रिश्तों से भी मुंह मोड़ लिया है अतः हमें रिश्तों को जीवित रखने के लिए उन्हें समय देना होगा, ताकि उनमें मधुरता बनी रहे। उम्मीद है वर्ष 2026 इनमें से अनेक समस्याओं का समाधान लेकर आएगा। सही खानपान के लिए अभियान की जरूरत लत खानपान तेजी से बच्चों की सेहत का दुश्मन बनता जा रहा ग है। ऐसे में इसके खिलाफ व्यापक जागरूकता अभियान चलाना बेहद जरूरी हो गया है।नव वर्ष नई चेतना लोग खानपान में विदेशी संस्कृति की नकल कर रहे हैं, खासकर फास्ट फूड और जंक फूड का बढ़ता चलन बच्चों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल रहा है। उत्तर प्रदेश के अमरोहा की 11वीं कक्षा की छात्रा की मृत्यु इसका ताजा उदाहरण है। डॉक्टरों ने भी इसकी वजह गलत खान-पान ही बताई। यह घटना समाज के लिए चेतावनी है कि बच्चों को बचपन से ही संतुलित और पौष्टिक आहार की आदत डलवाना जरूरी है।>>>Visit: Samadhanvani
भोजन पर पर्याप्त ध्यान नहीं जो परिवार की सेहत

नव वर्ष नई चेतना समस्या केवल बाहर के खाने तक सीमित नहीं है, बल्कि घर पर बनने वाला तला-भुना और पोषणहीन भोजन भी स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह है। गलत खान-पान के कारण आज बच्चे कम उम्र में ही आंखों, दांतों और पेट से जुड़ी बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। समय की कमी के कारण कुछ महिलाएं बच्चों के भोजन पर पर्याप्त ध्यान नहीं देतीं, जो परिवार की सेहत के लिए घातक साबित हो सकता है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-5) रिपोर्ट के अनुसार, देश के कई राज्यों में पांच साल से कम उम्र के बच्चों में मोटापा और कुपोषण दोनों तेजी से बढ़ रहे हैं। नव वर्ष नई चेतना यह स्थिति बेहद चिंताजनक है और समय रहते ठोस कदम उठाने की मांग करती है।



