
लापता बच्चों के पीछे कहीं देशव्यापी नेटवर्क तो नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र सरकार को यह पता लगाने का निर्देश दिया कि देश के अलग-अलग हिस्सों से बच्चों के लापता होने की घटनाओं के पीछे कोई देशव्यापी नेटवर्क है या कोई राज्य स्तरीय विशिष्ट समूह तो नहीं है। शीर्ष अदालत ने केंद्र को सभी राज्यों से आंकड़े एकत्र करने का निर्देश देते हुए कहा कि यह पता लगाने की जरूरत है कि क्या इन घटनाओं के पीछे कोई पैटर्न है सुप्रीम कोर्ट ने ये रैंडम (आकस्मिक) हैं। तब जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और उज्जल भुइयां की पीठ ने यह निर्देश दिया, जब केंद्र की ओर से अतरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि कुछ राज्यों ने लापता बच्चों और दर्ज मुकदमों के बारे में अपना आकंड़ा दिया है, लेकिन करीब एक दर्जन राज्यों ने अभी आंकड़े नहीं दिए। उन्होंने पीठ से कहा कि केंद्र सरकार राज्यों से पूरे आंकड़े मिलने के बाद इसका विश्लेषण कर सकती है। जस्टिस नागरत्न बच्चे लापता होते हैं। क्या यह कोई पैटर्न है या सिर्फ एक रैंडम (आकस्मिक) घटनाएं है? उच्चतम न्यायलय ने इस मामले में 9 दिसंबर 2025 को केंद्र सरकार से लापता बच्चों पर देशभर का छह साल का आंकड़ा देने कहा था। साथ ही, ऐसे आंकड़ों को एकत्र करने में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ प्रभावी तालमेल सुनिश्चित करने के लिए गृह मंत्रालय में एक अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दिया था।>>>Visit: Samadhanvan
नेता प्रतिपक्ष के असहमतिनोट के खुलासे का आदेश नहीं देंगे

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि वह केंद्रीय सूचना आयोग के मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्तों की नियुक्ति के मुद्दे पर नेता प्रतिपक्ष के असहमति नोट का खुलासा करने का निर्देश नहीं देगा। इस दौरान शीर्ष कोर्ट की पीठ को केंद्र सरकार ने बताया कि सीआईसी में खाली पद भर दिए गए हैं वापस लाए बच्चों का इंटरव्यू लिया जाए इसके साथ ही, उन्होंने केंद्र को सुझाव दिया कि जिन बच्चों को बचाया गया या वापस मिले हैं, उनका इंटरव्यू लिया जाना चाहिए ताकि यह पता लगाया जा सके कि ऐसी घटनाओं के लिए कौन जिम्मेदार है। सुप्रीम कोर्ट ने शीर्ष अदालत उन राज्यों की आड़े हाथ लिया है, जिसने अभी तक केंद्र को आंकड़ा नहीं मुहैया कराया है। पीठ ने सज्यों को जल्द से जल्द आंकड़े देने को कहा है। साथ ही, आगाह किया कि जरूरत पड़ने पर वह कड़े आदेश दे सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने गैर सरकारी संगठन गुड़िया स्वयं सेवी संस्थान की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई की। याचिका में कई राज्यों में लापता बच्चों की बढ़ती संख्या हवाला देकर समुचित कार्रवाई करने का आदेश देने की मांग की गई है।



