
इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा आरोपी पति को दी गई जमानत

सुप्रीम कोर्ट ने दहेज हत्या के एक मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा आरोपी पति को दी गई जमानत को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया है। इसके साथ ही Supreme कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश पर कड़ी टिप्पणी की। इस टिप्पणी से आहत होकर इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस पंकज भाटिया ने चीफ जस्टिस से अनुरोध किया है कि भविष्य में उन्हें जमानत से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए न दिए जाए। Supreme कोर्ट की जस्टिस जेबी पारदीवाला की अगुवाई वाली पीठ ने 9 फरवरी के आदेश में कहा था कि जमानत याचिकाओं पर फैसला करते समय सभी जरूरी फैक्ट्स पर विचार करना जरूरी है। कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश को हाल के समय में देखे गए सबसे चौकाने वाले और निराशाजनक आदेशों में से एक बताया और आरोपी को आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया।>>>Visit: Samadhanvan
सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश पर कड़ी टिप्पणी भी की

इसके बाद जस्टिस पंकज भाटिया ने एक अन्य जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान Supreme कोर्ट की यह पहला मौका नहीं है जब Supreme कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को पलटा और सख्त टिप्पणी की हो। पांच अगस्त 2025 को Supreme कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक आदेश को रद्द करते हुए उसे चौकाने वाला बताया था। हालांकि 8 अगस्त 2025 को सुप्रीम – कोर्ट ने उस टिप्पणी को वापस ले लिया – था और साफ किया था कि उसका मकसद संबंधित जज को शर्मिंदा करना नहीं था। Supreme कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक आदेश की उन टिप्पणियों पर रोक लगाई थी, जिनमें कहा गया था कि कथित रूप से प्राइवेट पार्ट छूना, बलात्कार या बलात्कार के प्रयास की श्रेणी में नहीं आता। सुप्रीम कोर्ट ने इसे असंवेदनशील और अमानवीय दृष्टिकोण बताया था। Supreme कोर्ट ने इस फैसले पर तत्काल रोक लगा दी थी।
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