
अमेरिका से व्यापार समझौते के बाद भी व्यावसायिक आधार पर फैसले

रूसी तेल पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को कहा कि भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता पर कायम है और रूस से तेल खरीद जैसे फैसले स्वतंत्र रूप से लेता रहेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौते के बावजूद भारत अपने ऊर्जा फैसले व्यावसायिक आधार पर करेगा। जर्मनी के म्यूनिक सुरक्षा सम्मेलन में विदेश मंत्री से पूछा गया कि क्या अमेरिका के साथ व्यापार समझौते के बाद भारत को रूस से तेल आयात कम करना पड़ेगा। इस पर जयशंकर ने कहा, भारत की रणनीतिक स्वायत्तता उसकी नीति का हिस्सा है और यह सभी राजनीतिक दलों की सोच में है।रूसी विदेश मंत्री ने कहा, वैश्विक तेल बाजार बहुत जटिल और तेजी से बदलने वाला है। भारत की तेल कंपनियां ‘उपलब्धता, कीमत और जोखिम को देखकर खरीद का फैसला करती हैं। जैसे यूरोप और अन्य देशों की कंपनियां अपने हितों के आधार पर निर्णय लेती हैं, वैसे ही भारत भी अपने आर्थिक हितों को ध्यान में रखता है।>>>Visit: Samadhanvan
वित्त मंत्री का स्वागत करते अधिकारी

सुरक्षा परिषद में सुधार समय की जरूरत : सुरक्षा सम्मेलन में जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सार्थक सुधार का मुददा उठाया। उन्होंने कहा, भारत संयुक्त राष्ट्र एट ४० पहल का समर्थन करता है, विशेष रूप से सुरक्षा परिषद में सुधार के मुद्दे पर। इस पहल का उद्देश्य संगठन को अधिक चुस्त, एकीकृत और चुनौतियों के अनुरूप बनाना है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, भारत ने जलवायु कार्रवाई पर खर्च बढ़ाकर सकल घरेलू उत्पाद का 5.6% कर दिया है। यह छह वर्ष पहले लगभग 3.7% था, जो अब उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है। म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में सीतारमण ने कहा, भारत कार्बन उत्सर्जन घटाने और राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए काम कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश आवश्यक निवेश स्वयं कर रहा है और केवल बाहरी वित्त या प्रौद्योगिकी पर निर्भर नहीं है, हालांकि अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी जरूरी है।



