
विशिष्ठ अतिथि के रुप में जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने की शिरकत

Mangalayatan University celebrates its 12th birthday with excellence and enthusiasm
Mangalayatan विश्वविद्यालय के 12वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने शिरकत की और विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए देश के विकास में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि आज का यह समारोह विद्यार्थियों के वर्षों के तप, परिश्रम और समर्पण का उत्सव है। यह वह क्षण है जब विद्यार्थी अपनी शैक्षणिक यात्रा के एक महत्वपूर्ण पड़ाव को पार कर जीवन के नए अध्याय की ओर अग्रसर होते हैं। यह उपलब्धि केवल विद्यार्थियों की नहीं, बल्कि उनके माता-पिता, शिक्षकों और Mangalayatan विश्वविद्यालय परिवार की भी है, जिनके मार्गदर्शन, प्रेरणा और विश्वास ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया है। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का साधन नहीं, बल्कि व्यक्ति के बौद्धिक, नैतिक और सामाजिक विकास का माध्यम है। सतीश महाना ने कहा कि आज का विश्व तेजी से बदल रहा है, जहां तकनीक, नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा नई चुनौतियां और अवसर लेकर आए हैं। ऐसे समय में भारत जैसे युवा राष्ट्र के लिए शिक्षित और कुशल युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। देश की लगभग 65 प्रतिशत आबादी युवा है, जो भारत की सबसे बड़ी शक्ति है। युवाओं को सशक्त बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार कौशल विकास, स्टार्ट-अप, डिजिटल इंडिया और नई शिक्षा नीति जैसी अनेक पहलें कर रही हैं, जिससे युवा रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर प्राप्त कर सकें। उन्होंने Mangalayatan विद्यार्थियों को संदेश देते हुए कहा कि ज्ञान के साथ विनम्रता और नैतिकता भी उतनी ही आवश्यक है। शिक्षा व्यक्ति को विनम्र बनाती है और यही विनम्रता उसे वास्तविक सफलता की ओर ले जाती है। जीवन में लक्ष्य निर्धारित करना महत्वपूर्ण है, लेकिन उसे प्राप्त करने के लिए निरंतर परिश्रम, धैर्य और दृढ़ संकल्प की आवश्यकता होती है। युवाओं को बड़े सपने देखने चाहिए और उन्हें साकार करने के लिए निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए। अंत में उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने ज्ञान, कौशल और मूल्यों का उपयोग केवल व्यक्तिगत सफलता के लिए ही नहीं, बल्कि समाज के वंचित वर्गों के उत्थान, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्र निर्माण के लिए भी करें।
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विद्यार्थी परिश्रम, ज्ञान और मूल्यों से राष्ट्र निर्माण में दें योगदान : विधानसभा अध्यक्ष

अकादमिक उत्कृष्टता और उत्साह के माहौल में दीक्षांत समारोह विश्वविद्यालय प्रांगण में आयोजित हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों ने मां सरस्वती के सम्मुख दीप प्रज्वलित कर किया। इस दौरान राष्ट्रीय गीत व कुल गीत की प्रस्तुति दी गई। कार्यक्रम में चेयरमैन हेमंत गोयल का सानिध्य प्राप्त हुआ। कुलपति प्रो. पीके दशोरा ने वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की और उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को शपथ दिलाई। इस गरिमामय समारोह में विभिन्न विषयों के विद्यार्थियों को उनकी अकादमिक उपलब्धियों के लिए उपाधियां प्रदान की गईं। दीक्षांत समारोह में इस वर्ष 3555 स्नातक विद्यार्थियों, 1780 स्नातकोत्तर विद्यार्थियों तथा 99 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त 27 विद्यार्थियों को पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और 575 विद्यार्थियों को डिप्लोमा प्रदान किए गए। उत्कृष्ट शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए नौ विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक, नौ को रजत पदक तथा 13 विद्यार्थियों को विशेष प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।
विकसित राष्ट्र में युवाओं की भूमिका होगी महत्वपूर्ण : स्वतंत्र देव

विशिष्ट अतिथि प्रदेश के जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि दीक्षांत समारोह किसी भी Mangalayatan विश्वविद्यालय के जीवन का अत्यंत पावन और गौरवपूर्ण अवसर होता है। यह वह क्षण है जब वर्षों की मेहनत, अध्ययन और समर्पण एक नई ऊर्जा के रूप में समाज के सामने प्रकट होते हैं। आज विद्यार्थी केवल डिग्री प्राप्त नहीं करते, बल्कि जीवन के एक नए अध्याय की ओर अग्रसर होते हैं। उन्होंने कहा कि आज का विश्व तेजी से बदल रहा है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल प्रौद्योगिकी, डेटा विज्ञान और नवाचार ने कार्य करने के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है। ऐसे समय में सफलता केवल डिग्री से नहीं, बल्कि कौशल, रचनात्मकता और निरंतर सीखने की क्षमता से निर्धारित होती है। इसलिए विद्यार्थियों को आजीवन सीखते रहने की भावना को अपने जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। मंत्री ने कहा कि भारत वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की ओर अग्रसर है और इस लक्ष्य की प्राप्ति में युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। आज का युवा केवल नौकरी खोजने वाला नहीं, बल्कि नवाचार और उद्यमिता के माध्यम से अवसरों का सृजन करने वाला बन सकता है। Mangalayatan विद्यार्थियों को परिश्रम, साहस और धैर्य के साथ आगे बढ़ने का संदेश देते हुए कहा कि असफलताएं भी सफलता की राह में महत्वपूर्ण शिक्षक होती हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने ज्ञान, संस्कार और मूल्यों का उपयोग केवल व्यक्तिगत सफलता के लिए ही नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के विकास के लिए भी करें। सत्य, नैतिकता और कर्तव्यनिष्ठा को जीवन का आधार बनाकर ही व्यक्ति वास्तविक सफलता प्राप्त कर सकता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि मंगलायतन विश्वविद्यालय के विद्यार्थी अपने ज्ञान और प्रतिभा से देश का नाम रोशन करेंगे। विधान परिषद सदस्य ऋषिपाल सिंह ने कहा कि शिक्षा ही वह आधार है जो व्यक्ति को सफलता और समाज को प्रगति की दिशा देता है। उन्होंने उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि उनकी वर्षों की मेहनत और समर्पण का परिणाम है। उन्होंने विद्यार्थियों से ईमानदारी, परिश्रम और नैतिक मूल्यों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
समाज के लिए प्रेरणा बनें विद्यार्थी : कुलाधिपति
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कुलाधिपति डा. अच्युतानंद मिश्र ने कहा कि आज का दीक्षांत समारोह Mangalayatan विद्यार्थियों के वर्षों के परिश्रम, समर्पण और सपनों की यात्रा का उत्सव है। आज प्राप्त होने वाली उपाधि केवल प्रमाणपत्र नहीं, बल्कि आपके ज्ञान, अनुशासन और संघर्ष का प्रतीक है। भारतीय परंपरा में कहा गया है “सा विद्या या विमुक्तये”, अर्थात सच्ची शिक्षा वही है जो व्यक्ति को समाज और मानवता की सेवा के लिए प्रेरित करे। बदलते वैश्विक परिदृश्य में राष्ट्र को ज्ञानवान, साहसी और जिम्मेदार युवाओं की आवश्यकता है। आप सभी अपने ज्ञान, मूल्यों और कौशल से “विकसित भारत” के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दें और समाज के लिए प्रेरणा बनें।
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