रेंटल हाउसिंग नीति तैयार करने को नौ सदस्यीय समिति बनाई

शहरी नियोजन विभाग ने नीति निर्धारण के लिए नौ सदस्यीय समिति गठित कर दी
शहरी नियोजन विभाग ने नीति निर्धारण के लिए नौ सदस्यीय समिति गठित कर दी

प्रदेश के शहरों में रहने वाले बुजुर्गों के लिए राज्य सरकार अलग रेंटल हाउसिंग नीति तैयार करने जा रही है। इसके तहत वरिष्ठ नागरिकों को किफायती दर पर किराये के मकान उपलब्ध कराने को व्यवस्था का खाका तैयार होगा। आवास एवं शहरी नियोजन विभाग ने नीति निर्धारण के लिए नौ सदस्यीय समिति गठित कर दी है। समिति विचार-विमर्श के बाद संस्तुति शासन को देगी। अपनी सचिव आवास राजेश कुमार राय की ओर से जारी पत्र के मुताबिक समिति की अध्यक्षता सचिव, आवास एवं शहरी नियोजन विभाग, करेंगे। लखनऊ, कानपुर, गाजियाबाद, वाराणसी और मेरठ विकास प्राधिकरणों के उपाध्यक्षों देश में बुजुर्गों की संख्या लगातार बढ़ रही करोड़ संख्या और हिस्सेदारी 14.9 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है 2036 तक को सदस्य बनाया गया है। इसके अलावा अपर आवास आयुक्त, आवास एवं विकास परिषद तथा मुख्य नगर एवं ग्राम नियोजक भी समिति में सदस्य हैं। निदेशक, आवास बंधु को सदस्य-संयोजक बनाया गया है। अभी किराये की दर, मकानों की इस पहल का महत्व बढ़ती बुजुर्ग आबादी के संदर्भ में भी है। सांख्यिकी (एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के उपलब्ध जनसंख्या अनुमानों के उससे अधिक उम्र की आबादी करीब हिस्सेदारी 14.9 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है।

यूपी की प्रस्तावित नीति को शहरी आवास नीति का नया आयाम

 

शहरी नियोजन विभाग ने नीति निर्धारण के लिए नौ सदस्यीय समिति गठित कर दी
शहरी नियोजन विभाग ने नीति निर्धारण के लिए नौ सदस्यीय समिति गठित कर दी

प्रस्तावित नीति को शहरी आवास मुताबिक 2026 में देश में 60 वर्ष और नीति का नया आयाम माना जा सकता 16.28 करोड़ यानी 11.4 प्रतिशत होने का अनुमान है। 2036 तक यह संख्या करीब 22.74 करोड़ और यानी आने वाले वर्षों में बुजुर्गों के लिए सिर्फ स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा ही नहीं, बल्कि स्वतंत्र और सुरक्षित आवास की जरूरत भी बढ़ेगी। इसी दृष्टि से यूपी की प्रस्तावित नीति को शहरी आवास नीति का नया आयाम माना जा सकता है। संख्या, पात्रता की उम्र, आय सीमा, निर्माण का मॉडल या आवंटन की प्रक्रिया तय नहीं हुई है। ये सभी बिंदु समिति की संस्तुति से स्पष्ट होंगे। हालांकि, सरकार की मंशा शहरी क्षेत्रों में ऐसे बुजुर्गों को सस्ता आवास उपलब्ध कराने, की है, जिन्हें उम्र के इस पड़ाव पर अलग आवास की जरूरत पड़ती है। नई व्यवस्था में सिर्फ मकान उपलब्ध कराने के बजाय वरिष्ठ नागरिकों की जरूरत के अनुरूप आवासीय व्यवस्था विकसित करने की संभावना महत्वपूर्ण होगी। समिति की रिपोर्ट आने के बाद इसका वास्तविक स्वरूप सामने आएगा।

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