भारत में एक साल से कम लड़के-लड़कियों में बाल मृत्यु दर बराबर

शहरों के मुकाबले गांवों में बच्चियों की मौत अब भी ज्यादा

भारत में एक साल से कम लड़के-लड़कियों में बाल मृत्यु दर बराबर

भारत में एक साल से कम उम्र के लड़कों और लड़कियों की बाल मृत्यु दर (IMR) बराबर हो गई है। प्रति हजार बच्चों पर होने वाली मौतों को IMR कहा जाता है। अब देश में मेल और फीमेल IMR 28 है। पिछले कई सालों से 16 राज्यों में लड़कों की तुलना में लड़कियों की बाल मृत्यु दर ज्यादा थी, लेकिन 2011 से इसमें भारी कमी आई है।

शहरों के मुकाबले गांवों में बच्चियों की मौत अब भी ज्यादा हो रही है। देश के शहरी इलाकों में 2011 में मेल और फीमेल IMR के बीच अंतर काफी ज्यादा था, मगर 2020 में लड़कियों की बाल मृत्यु दर लड़कों से नीचे जा चुकी है।
मेल और फीमेल IMR में सबसे ज्यादा अंतर है। जहां लड़कों की बाल मृत्यु दर 35 है, वहीं लड़कियों में यह 41 है।

छत्तीसगढ़ का कुल IMR 48 से 38 पर आया है, लेकिन यह उन चुनिंदा राज्यों में से है जहां मेल-फीमेल IMR के बीच का अंतर 9 साल में बढ़ा है। भारत के लिए बाल मृत्यु दर में इतनी भारी गिरावट दर्ज करना एक बड़ी उपलब्धि है। संयुक्त राष्ट्र (UN) का 2020 का डेटा बताता है       भारत ने सीमापार आतंकियों के इलाके में रेकी की ठिकाने तबाह किए

बाल मृत्यु दर में गिरावट एक बड़ी उपलब्धि

भारत में एक साल से कम लड़के-लड़कियों में बाल मृत्यु दर बराबर

देशों में बाल मृत्यु दर 20 से ज्यादा है, उनमें से सिर्फ भारत में ही मेल और फीमेल IMR लगभग समान है। बाकी हर देश में मेल और फीमेल IMR में कम से कम 2 पॉइंट्स का अंतर है। इनमें भी लड़कियों की बाल मृत्यु दर ज्यादा है।

भारत के दामन पर एक दाग लगा रहा है। यहां बेटों को बेटियों पर तरजीह मिलती है। पैदा होने के बाद बेटियां मार दी जाती हैं, ऐसा महिलाओं से जुड़े हर दूसरे लेख में कहा जाता था। धीरे-धीरे ही सही, यह दाग धुल रहा है। 2020 से यह स्थिति बदली है। अब लड़के और लड़कियों, दोनों में शिशु मृत्‍यु दर बराबर हो गई है।      SSC Delhi Police Head Constable Recruitment 2022 – 857 Vacancies (Re-Open)

छत्‍तीसगढ़ की ओवरऑल शिश मृत्‍यु दर 48 से घटकर 38 पर आ गई है। यह उन चुनिंदा राज्‍यों में से हैं जहां 2011 के मुकाबले लड़के और लड़कियों की IMR में अंतर बढ़ा है।शहरों के मुकाबले गांवों में बच्चियों की मौत अब भी ज्यादा हो रही है। देश के शहरी इलाकों में 2011 में मेल और फीमेल IMR के बीच अंतर काफी ज्यादा था, मगर 2020 में लड़कियों की बाल मृत्यु दर लड़कों से नीचे जा चुकी है।