भारत में दावत ए इस्लामी एक बड़े खतरे के रूप में सामने आई

 

भारत में दावत ए इस्लामी?गैर इस्लामिक समुदाय के प्रति जिहाद

भारत में दावत ए इस्लामी
भारत में दावत ए इस्लामी एक बड़े खतरे के रूप में

विभिन्न स्रोतों एव सूत्रों से ज्ञात जानकारी के अनुसार, भारत में दावत ए इस्लामी एक बड़े खतरे के रूप में सामने आई है, संभवतः गैर इस्लामिक समुदाय के प्रति भारत में दावत ए इस्लामी एक जिहाद है जो कि, भारत के लोकतंत्र ही नहीं अपितु, सम्पूर्ण मानवता को छिन्नभिन्न करने वाला एक पूर्ण जेहाद है, जिसकी फसल पाकिस्तान की सरजमीं पर है।दावत ए इस्लामी पर चर्चा करने से पूर्व, कुछ सामाजिक विद्वानों के सवाल हैं जिनके उत्तर देश व प्रदेश की सरकारों से एव इस्लामिक धर्म गुरुओं से भीआपेक्षित है।

बलात किसी धर्म को मानने के लिए किसी को विवश करना गलत

सवाल करने से पहले मैं, अपना मत स्पष्ट करना चाहूँगा कि, मैं डॉ0वी0के0सिंह सभी धर्मों में आस्था रखने वाला हूँ किन्तु, मेरे लिए धर्म से पूर्व मेरे देश का संविधान एव देश का कानून मायने रखता है, उसके बाद ही धर्म है। वैसे भी धर्म समाज की भलाई के लिए है किन्तु, समाज धर्म के लिए नहीं। इश्वर, अल्लाह, जीसस क्राइस्ट का स्थान उनके अनुयायियों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है किन्तु, भारत में दावत ए इस्लामी द्वारा बलात किसी धर्म को मानने के लिए किसी को विवश करना गलत है और, एक अमानवीय कृत्य है।

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अब मैं सीधे सवाल पर आता हूँ, मेरा पहला सवाल मुस्लिम समुदाय के उन धर्म गुरुओं से-जो भारत में दावत ए इस्लामी ,मुस्लिम धर्मगुरु, मुल्ला, मौलाना, मौलवी एव मुस्लिम समुदाय के हर आम व खास यह बतायें कि, बीजेपी प्रवक्ता नूपुर शर्मा के बयान को तूल देते हुये, जो लोग सर तन से जुदा करने की वकालत करते हैं, क्या वे बतायेंगे कि, भारत में दावत ए इस्लामी ,मुस्लिम समुदाय के उन्ही धर्म गुरुओं ने उन सिरफिरे मुस्लिमों के सर तन से जुदा क्यों नहीं किये, जो प्रायः , भगवान शिव, या बजरंगबली की मूर्तियों पर पैर रखकर, या फिर मूत्र त्याग करते हुये फ़ोटो सोशल मीडिया पर शेयर करते हैं?

भारत में दावत ए इस्लामी

 

मुस्लिमों के इतिहास को कुरेदेंगें तो हाँथ,अपने ही खून से लतपथ पायेंगे

इतिहास साक्ष्य है कि, मुस्लिमों का इतिहास अपनों के खून से लतपथ है यहाँ तक कि, प्यारे नबी-प्यारे नबी चिल्लाते हैं आप,जबकि, आप अच्छी तरह से जानते हैं कि, आपके नबी के नवासे हुसैन की हत्या किसी हर हर महादेव बोलने वाले हिन्दू ने नहीं बल्कि, अल्लाह हूँ अकबर का नारा लगाने वाले मुसलमान ने ही की थी, तब आपने क्या किया था? मध्यकालीन भारत में जहाँगीर ने स्वयं अपने ज्येष्ठ पुत्र खुसरों, जो कि, अपने दादा अकबर की गद्दी पर बैठने का दावा कर रहा था को, अन्धा करवाकर कैद में डलवा दिया था

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जिसे, बाद में कैद में ही मरवा दिया गया था। तत्कालीन सिखों के गुरु अर्जुन देव जो कि, उसके पिता के विरुद्ध खुसरों की सहायता कर रहे थे, गुरु अर्जुन देव को भी फाँसी दे दी गयी थी।बहराल, मुस्लिमों के इतिहास को कुरेदेंगें तो आपके हाँथ, आपके अपने ही खून से लतपथ पायेंगे।हम बात करते हैं, आपसी सौहार्द की तो, यह केवल तभी संभव है जब हिन्दू हो या भारत में दावत ए इस्लामी, मुस्लिम, देश के संविधान व देश के कानून का सम्मान करें अन्यथा, दोहरे मानदण्ड वाले कानून सामाजिक ढाँचा ही बिगाड़ते हैं।

भारत में दावत ए इस्लामी

 

सोंच एव समझ तालिबानी है तो फिर, भारत मे आपका क्या काम

रही बात बीजेपी प्रवक्ता की तो, उन्होंने अपने संवैधानिक मौलिक अधिकारों का प्रयोग करते हुये, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 के अंतर्गत वैचारिक अभिव्यक्ति की जिसके लिए आपने राई का पहाड़ बना दिया। फिर भी अगर आपको लगता है कि, कुछ गलत है जिससे आपकी धार्मिक भावनायें आहत हुई हैं, तो फिर उसके लिये सर तन से जुदा वाला कानून कम से कम हमारे देश का तो नहीं है? क्या आपकी सोंच एव समझ तालिबानी है तो फिर, भारत मे आपका क्या काम है?

कभी उन अफगानी नागरिकों का दर्द जानने की कोशिश करो जो तालिबानी सोंच एव विचारधारा से पीड़ित हैं और, भारत मे शरण लेने के लिये बिना बीजा एव बिना पासपोर्ट के भागकर आते हैं।अंत मे बात करते हैं, दावत ए इस्लामी की दावत ए इस्लामी जो धर्म के उत्थान हेतु, हर व्यक्ति कदाचित इस्लामिक एव गैर इस्लामिक सर्वधर्म समभाव की विचारधारा से प्रेरित लोगों से चंदा एकत्रित करते हैं किन्तु, इस चन्दे से प्राप्त रकम पाकिस्तान में बैठे आतंकी संगठनों को मजबूत करना, मानव विरोधी जिहाद है। ऐसा कोई भी धर्म जो मानवता के विरुद्ध है, मुझे परहेज है।

डॉ0वी0के0सिंह
(खोजी पत्रकार)