न्याययिक प्रणाली में दोहरे मानदण्ड से प्रभावित न्याय ?

 

छेड़छाड़ करने वाला युवक सेक्टर 66 मामूरा में मेजोरिटी में

नोएडा। थाना 71 फेज-III क्षेत्र अंतर्गत न्याययिक प्रणाली में दोहरे मानदण्ड से प्रभावित न्याय ,सेक्टर-66 मामूरा निवासी अरुण प्रजापति की पत्नी के साथ हुई छेड़छाड़ एव अश्लील टिप्पणी करने वाले युवक अमित के विरुद्ध भा0द0सहिंता अधिनियम 1860 की सुसंगत धाराओं में अभियोग इसलिये पंजीकृत नहीं हो सका क्योंकि,न्याययिक छेड़छाड़ करने वाला युवक एससी वर्ग से आता है बल्कि, छेड़छाड़ करने वाला युवक सेक्टर 66 मामूरा में मेजोरिटी में है तथा, उसी की बिरादरी के सभी लोग रहते हैं। पीड़ित अरुण की माने तो, अरुण ने बताया

न्याययिक प्रणाली में दोहरे मानदण्ड

न्याययिक उसका मामूरा निवासी अमित से दिनाँक 17 अप्रैल 2022 को विवाद हो गया था जो, झगड़े में तब्दील हो गया। न्याययिक उक्त झगड़े के प्रकरण में थाना सेक्टर -71 फेज-III पुलिस को अरुण ने लिखित तहरीर दी थी जिसमे उसने बताया कि, अमित उसकी पत्नी के आते जाते रास्ते मे अश्लील टिप्पणी करता था, न्याययिक जिसकी वजह से वह अमित से बात करने व उसे समझाने गया था किन्तु, अमित ने अपनी मेजोरिटी के बल पर, एकांकी अरुण से झगड़ा कर अपना बल पौरुष दिखा दिया।

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अपनी पत्नी के साथ थाने पर पहुँचकर लिखित तहरीर दी

न्याययिक प्रणाली में दोहरे मानदण्ड से प्रभावित न्याय ?

अरुण ने उक्त संदर्भ में अपनी पत्नी के साथ थाने पर पहुँचकर लिखित तहरीर दी किन्तु, एससी की मेजोरिटी के दवाब में थाना ओर प्रभारी ने एक पक्षीय कार्यवाही करते हुये दण्ड प्रक्रिया सहिंता 1973 की धारा 151 में दो दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।पीड़ित के कथनानुसार, अरुण प्रजापति जमानत पर बाहर आये तत्पश्चात, अमित कुमार (एससी वर्ग) जो कि,कभी इतिहास काल खण्ड में शोषित एव वंचित समाज के रूप में जाना व पहचाना जाता था, ने भारतीय संविधान एव भारतीय दण्ड विधान अधिनियम 1860

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मिथ्या तथ्यों के आधार पर, धारा 147, 323, 504, 506 एव एससी/ एसटी में अभियोग पंजीकृत

न्याययिक प्रणाली में दोहरे मानदण्ड से प्रभावित न्याय ?

 

जोकि, शोषित एव वंचित समाज के प्रतिसंवेदन शील है का, लाभ उठाकर, विवाद से लगभग एक सप्ताह बाद, मिथ्या तथ्यों व मनगढंत कथनों के आधार पर, भा0द0सहिंता 1860 की धारा 147, 323, 504, 506 एव एससी/ एसटी की धाराओं में अभियोग पंजीकृत करवा दिया।

सूत्रों एव पीड़ित अरुण की माने तो, उसके द्वारा एससी वर्ग के युवक अमित के विरुद्ध दी गयी तहरीर पर, प्रभारी निरीक्षक ने गौर करना भी उचित नहीं समझा जो कि, देश की प्रथम न्यायपालिका पुलिस द्वारा किया गया एक किस्म का संगीन अन्याय है।

बहराल, ऐसे किसी भी मामले में जब पुलिस द्वारा पक्षपात किया जाता है या, दोहरे मानदण्ड अपनाये जाते हैं तो, निश्चय ही न्याय प्रभावित होता जबकि, ऐसी स्थिति में आमजन का न्यायप्रणाली से ही नहीं अपितु, न्यायपालिका से भी भरोसा उठता है। समाचार, विश्वस्त सूत्रों से प्राप्त जानकारी एव पीड़ित के कथनानुसार है, घटना का वास्तविक स्वरूप क्या है, उच्च स्तरीय निष्पक्ष जाँच का विषय है?

डा0 वी0के0सिंह।
(वरिष्ठ पत्रकार)

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