गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के मुँह में लड्डू, सरकार की आँख में मिर्ची

 

सिद्धार्थ विहार रेजीडेंसी करोड़ों का चूना लगाकर होने वाली है फुर्र?

गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के प्रवर्तन जोन-4 अधिकारिता के अन्तर्गत थाना विजय नगर क्षेत्रान्तर्गत सिद्धार्थ विहार अधिकारिता के अन्तर्गत आता है, में सिद्धार्थ विहार रेजीडेंसी नामक आवासीय कॉलोनी गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के बारंबार सीलिंग एव ध्वस्तीकरण के आदेशों के बावजूद आबाद होने का मामला प्रकाश में आया है।विश्वस्त सूत्रों से प्राप्त जानकारी एव प्राप्त साक्ष्य से ज्ञात हुआ कि, सिद्धार्थ विहार रेजीडेंसी जिस भूखण्ड पर आबाद है, यह भूखण्ड आवास विकास एव गाजियाबाद विकास प्राधिकरण द्वारा अधिसूचित है

गाजियाबाद विकास प्राधिकरण
सिद्धार्थ विहार रेजीडेंसी करोड़ों का चूना लगाकर होने वाली है फुर्र?

आवास विकास के अभिलेखों में सरकारी एव वर्जित भूखण्ड के रूप में दर्ज है

जिसे- विक्रम एव संदीप निवासी दिल्ली दो भाइयों ने गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के अवर अभियंताओं से लेकर उच्च अधिकारियों एव स्थानीय पार्षद की असीम अनुकम्पा से दूर दराज एव स्थानीय स्वः घर का सपना देखने वाले भोले भाले लोगों के धन से आबाद कर दी है जबकि, उक्त भूमि गाजियाबाद विकास प्राधिकरण एव आवास विकास के अभिलेखों में सरकारी एव वर्जित भूखण्ड के रूप में दर्ज है।सूत्रों एव साक्ष्यों आधार पर देखा जाये तो, उक्त विवादित रेजीडेंसी को गाजियाबाद विकास प्राधिकरण द्वारा बार-,बार सील एव ध्वस्त किया गया है

अनैतिक बिल्डरों के सर पर गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के अधिकारियों का आशीर्वाद

गाजियाबाद विकास प्राधिकरण

किन्तु, विश्वस्त सूत्रों के अनुसार गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के सक्षम अधिकारियों द्वारा अतीत में ध्वस्तीकरण एव सीलिंग की कृत्य कार्यवाहियाँ, विवादित भूखण्ड को अतिक्रमण से बचाने के लिए नहीं अपितु, रिस्वत की रकम बढ़ाने के उद्देश्य से की गईं थी।दरअसल, गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के कुछ भ्रष्ट मगर सक्षम अधिकारी यह समझते है कि, जो भ्रष्टाचार मीडिया में आ गया, उस पर त्वरित कार्यवाही कर, सील एव ध्वस्तीकरण का आदेश तो जारी कर दो, साथ ही अनैतिक बिल्डरों के सर पर आशीर्वाद का एक हाँथ हमेशा रखों ताकि, इच्छित वरदान देने वाली किसी कामधेनु की तरह इनका दोहन कर सको।

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कागजों पर सीलिंग की कार्यवाही कर सरकार की आँखों मे मिर्च एव अपने मुख में रिस्वत का लड्डू

कदाचित, कागजों पर सीलिंग की कार्यवाही कर सरकार की आँखों मे मिर्च एव अपने मुख में रिस्वत का लड्डू हमेशा बना रहे।अति विशिष्ट एव विश्वस्नीय सूत्रों से ज्ञात हुआ है कि, विक्रम एव संदीप नामक बिल्डर भाई 20 जुलाई 22 से पहले-पहले नवनिर्मित बचे हुये भवनों की रजिस्ट्री कर, 21 जुलाई 22 तक प्रदेश ही क्या देश छोड़कर भागने की फिराक में है। यदि सूत्रों द्वारा प्राप्त जानकारी वास्तव में सच है तो, सरकार की आँखों पर चढ़ी मिर्च की परत देर सवेर जब भी साफ होगी तब तक बहुत देर हो चुकी होगी,

गाजियाबाद विकास प्राधिकरण
अनैतिक बिल्डरों के सर पर गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के अधिकारियों का आशीर्वाद

लोंगों के सपनो का महल, कर्तव्यनिष्ठ व ईमानदार सरकार के बिलडोज़र रौंद रहे होंगें

लोंगों के सपनो का महल, गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के कर्तव्यनिष्ठ व ईमानदार सरकार के बिलडोज़र रौंद रहे होंगें, गरीब अपने आशियानों के उजड़ने के बाद सरकार को कोस रहे होंगे।बहराल, गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के ईमानदार उच्चाधिकारियों से यक्ष प्रश्न है कि, क्या सिद्धार्थ विहार रेजीडेंसी की भूमि स्वच्छ एव निर्विवाद है यदि हाँ तो, उसी भूखण्ड पर बारम्बार सीलिंग एव ध्वस्ती करण की प्रक्रिया क्यों? क्या गाजियाबाद विकास प्राधिकरण सीलिंग एव ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया रिस्वत की रकम बढ़ाने के लिए की गई या फिर सचमुच, गरीब भोली भाली जनता को मूर्ख बनाने एव सरकार की आँखों मे मिर्च डालकर आपदा में अवसर खोजकर स्वयं को करोड़पति बनाने के लिए की गई?

बहराल, सत्यता क्या है यह एक उच्च स्तरीय निष्पक्ष जाँच का विषय है किन्तु, डर है कहीं, ऐसा न् हो कि, बिल्डर रातो रात फुर्र हो जाये और, गरीब अपने झोपड़ों के लिये, और कंपनी कर्मचारी स्थानीय पुलिस थाने में बैठकर, अपनी बदहाली एव बेबसी के आँसू बहा रहे हों

सुरेन्द्र कुमार
(वरिष्ठ पत्रकार)

इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा 39 Junior Operator (Aviation) पदों के लिए भर्ती