भारत और चीन के बीच घट रही तनातनी

भारत और चीन के खिलाफ UN में उइगर मुस्लिमों से जुड़ा प्रस्ताव

भारत और चीन के बीच घट रही तनातनी

भारत और चीन के ऐसा करने की वजह क्या है-इसे वोटिंग के एक दिन बाद खुद विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट करते हुए कहा  किसी देश से जुड़े मुद्दे (जैसे-चीन का उइगर मुद्दा) से अलग रहने के अपने पहले के रुख के हिसाब से ही काम किया है।भारत का मानना है कि ऐसे मुद्दे UN में प्रस्ताव पास करने के बजाय बातचीत से बेहतर ढंग से सुलझ सकते हैं।

मानवाधिकारों का समर्थक है। UNHRC में वोट उसके लंबे समय से अपनाई गई उस पॉलिसी के तहत है जिसमें हमारा मानना है कि देश-विशेष से जुड़े प्रस्ताव कभी मददगार नहीं होते। चीन का ताइवान के साथ विवाद गहराया है। खासतौर पर अमेरिका के ताइवन के खुले समर्थन ने चीन-ताइवान को युद्ध की कगार पर ला खड़ा किया है।        कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा अब कर्नाटक के दौरे पर,सोनिया गांधी भी चलीं पैदल   

ऐसे में चीन नहीं चाहता एक और सैन्य रूप से ताकतवर और परमाणु संपन्न देश के साथ तनातनी को बढ़ावा दे।कोई खास फायदा नहीं होगा। अमेरिका, रूस और चीन जैसे ताकतवर देशों के सामने UN बेअसर साबित हुआ है। इसका हालिया उदाहरण यूक्रेन युद्ध को लेकर रूस के खिलाफ UN में पास हुए प्रस्ताव हैं, जिनके बावजूद रूस को रोका नहीं जा सका।

भारत के चीन से संबंध बिगड़ने समेत कई नुकसान

भारत और चीन के बीच घट रही तनातनी

भारत जानता है कि UN में चीन के खिलाफ प्रस्ताव पास करके भी उसे रोक पाना मुश्किल होगा। लेकिन चीन के खिलाफ वोटिंग से भारत के चीन से संबंध बिगड़ने समेत कई नुकसान हो सकते हैं। साथ ही भारत UN में किसी एक देश को टारगेट किए जाने के पक्ष में कभी नहीं रहा है।2022 की पहली तिमाही में भारत-चीन का व्यापार 31.96 अरब डॉलर यानी करीब 2.42 लाख करोड़ रहा, जो पिछले साल की तुलना में 15% ज्यादा है।

देश किसी भी विवाद की वजह से इसे पटरी से नहीं उतारना चाहते हैं।कोरोना महामारी से निपटने के लिए चीन ने मुस्लिम देशों को कोरोना वैक्सीन की डेढ़ अरब अरब डोज मुफ्त में दी थी।देशों में सबसे ताकतवर देश माना जाने वाला सऊदी अरब कई बार चीन में उइगर मुस्लिमों के खिलाफ एक्शन का समर्थन कर चुका है।    DSSSB Recruitment 2022 | दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन आयोग में सीधी भर्ती 

2019 में चीन के दौरे पर गए सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने शिनजियांग प्रांत में उइगर मुस्लिमों के खिलाफ चीन की कार्रवाई को आतंक और चरमपंथ के खिलाफ कार्रवाई बताते हुए समर्थन किया था।

भारत चीन के खिलाफ उइगर मुद्दे पर वोटिंग से हट गया है। लेकिन कश्मीर मुद्दे पर चीन कई बार UN में भारत के खिलाफ पाकिस्तान का साथ दे चुका है। साथ ही पाकिस्तान में छिपे आतंकियों पर बैन लगाने के प्रयासों के खिलाफ वीटो भी कर चुका है।