मां के गुस्से की सजा आज और बीते कल में छिपी है वजह

मां का दिल क्यों बन जाता है पत्थर

मां से बर्दाश्त नहीं होती, लेकिन कई बार मां ही गुस्से में इतनी बेकाबू हो जाती है कि सही गलत भूलकर आवेश में आकर अपना सारा गुस्सा बच्चे पर निकाल देती है।साइकोलॉजिस्ट डॉक्टर बिंदा सिंह का कहना है कि मां के लिए उसका बच्चा सबसे सॉफ्ट टारगेट होता है, जिस पर वो आसानी से चिल्ला सकती है, उसे मार सकती है। वो अपने कामों में इतनी उलझी और परेशान रहती है कि कई बार बिना सोचे समझे अपना सारा गुस्सा बच्चे पर निकाल देती है।

एक दस साल की बच्ची किसी बात पर अपने भाई से लड़ रही थी। बच्चों की लड़ाई बढ़ती गई। इतने में मां को गुस्सा आया और उसने बच्ची की पीठ पर मुक्का दे मारा। उस एक मुक्के के कारण बच्ची को ‘स्पाइनल कॉर्ड इंजरी’ हो गई, जिसकी वजह से वह चलने में असमर्थ हो गई और बिस्तर पर आ गई। मां के गुस्से की सजा बच्ची और मां सहित पूरे परिवार को 7 से 8 साल तक भुगतनी पड़ी। मां के इस व्यवहार के कारण बच्ची के मेंटल हेल्थ पर भी बुरा असर पड़ा।

मां अपने गुस्से को कंट्रोल कैसे करती हैं

मां के लगातार ऐसा कहने से बच्चा भी इस बात को स्वीकार कर बैठा कि वो सच में अपने पिता की तरह मानसिक तौर पर कमजोर है। डॉ. सिंह एक और केस के बारे में बताते हुए कहती हैं कि मां अपने बच्चे को मारने के दौरान गुस्से में इतनी कठोर हो गई जीवन में कोई बुरा दौर झेल रही होती हैं। या फिर उनकी पति से नहीं बनती, वो अपने रिश्ते को लेकर परेशान रहती हैं। इसके अलावा एक और कारण है जिसकी वजह मांएं ऐसा करती हैं, वो ये कि उनका बचपन भी ऐसे ही बीता। उनकी मां ने भी उनके साथ ऐसा ही व्यवहार किया, जिसकी टीस उनके मन में आज तक है। मां कई बार आवेश में आकर सोच लेती हैं कि बच्चा उन्हें इतना परेशान कर रहा है, अगर उनकी मां होती, तो इस समय क्या करती।

जीवन के साथ खेलने का अधिकार नहीं मिल जाता। बच्चों को समझने की कोशिश करें। अपने गुस्से को कंट्रोल करना सीखें, वरना ऐसा भी हो सकता है कि आप आवेश में आकर बच्चे के साथ कुछ ऐसा कर बैठें, जिसका खामियाजा आपको उम्र भर भुगतना पड़े। बच्चा शैतानी करे तो उस समय उसे छोड़ दें और थोड़ी देर बाद प्यार से समझाने की कोशिश करें। बच्चे की मेंटल हेल्थ का ध्यान रखें। कोई भी बुरी बात बच्चों के सामने बोलने से बचें।