उत्तर प्रदेश सरकार दुग्ध उत्पादकों एव डेरी उद्योगों के दवाब में ?

 

उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रवर्तन दल के हाँथ व पैर काटे?

उत्तर प्रदेश सरकार, दुग्ध उत्पादकों एव उद्योगों के दवाब में आ चुकी है कदाचित, सरकार के दवाब में आकर उत्तर प्रदेश सरकार की प्रमुख सचिव ने खाद्य सुरक्षा एव औषधि प्रशासन के आयुक्त को प्रवर्तन दल के अधिकारियों के मष्तिस्क को शून्य करने तथा हाँथ पैर काटकर अपँग बनाने का निर्देश दिया है जोकि, कदाचित डेरी उद्योगों के दवाब में दिया गया प्रतीत होता है?विश्वस्त सूत्रों प्राप्त जानकारी एव प्राप्त साक्ष्य से ज्ञात हुआ है कि, उत्तर प्रदेश सरकार की प्रमुख सचिव अनिता सिंह ने

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उत्तर प्रदेश सरकार, दुग्ध उत्पादकों एव उद्योगों के दवाब में

दिनाँक 28 जून 2022 के प्रपत्र संख्या 205/अट्ठासी-22-119खा/14 में आयुक्त खाद्य सुरक्षा एव औषधि प्रशासन अनुभाग को उपस्थिति प्रमाणन हेतु निर्देशित किया है कि, उत्तर प्रदेश के प्रत्येक जिले एव तहसील स्तर पर, खाद्य सुरक्ष एव औषधि प्रशासन अनुभाग के अधिकारी एव कर्मचारी प्रातः प्रत्येक कार्यदिवस में सर्वप्रथम अपनी उपस्थिति दर्ज करवायेंगे तत्पश्चात, प्रातः 9:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक जन समस्यायें सुनेंगें तब, क्षेत्र में जाकर प्रवर्तन संबंधी कार्य करेंगे।

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मिलावट खोरों को सुनहरा अवसर मिलेगा

प्रमुख सचिव अनिता सिंह द्वारा खाद्य सुरक्षा एव औषधि प्रशासन अनुभाग को अपने प्रपत्र संख्या 205/अट्ठासी-22-119खा/14 आयुक्त को दिये निर्देश में उपस्थिति प्रमाणन का सहारा लेकर, प्रवर्तन दल के दिमाँग को शून्य एव हाँथों को कमजोर करने का प्रयास किया है जोकि, डेरी उद्योगों को सीधे तौर पर, मोटा फायदा करवाने का प्रयास किया तथा, खाद्य सामग्रियों में मिलावट करने वालों को सुनहरा अवसर प्रदान करने किया है।
समाज मे विधमान बुद्धिजीवियों का मानना है

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उत्तर प्रदेश सरकार, दुग्ध उत्पादकों एव उद्योगों के दवाब में

 

कैंसर, ह्रदय रोग इत्यादि बीमारियों को बढ़ने की प्रबल सम्भावनाये

कि, प्रवर्तन दल को उपस्थिति एव कार्य क्षेत्र में रहने की सीमायें सीमित होने पर, मिलावट खोरों को सुनहरा अवसर मिलेगा जिससे, प्रदेश भर में खाद्य सामग्रियों जैसे- दूध, घी, दही, मावा(खोया) इत्यादि में भारी मात्रा में जहरीले तथा स्वास्थ्य के लिये हानिकारक तत्वों की मिलावट होगी जिसके आगामी परिणाम भयावह हो सकते हैं।सामाजिक विद्वानों की माने तो, प्रवर्तन दल को समय की सीमाओं एव उपस्थित प्रमाणन की जंजीरों में जकड़कर, डेरी उद्योगों, मिलावटखोरों के साथ- साथ निज हॉस्पिटलों को सीधे मोटा फायदा पहुँचाने का कार्य किया है

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प्रवर्तन दल के कर्मचारियों की उपस्थिति से ज्यादा उनका क्षेत्र में कार्य करना ज्यादा जरूरी

चूँकि, दूध में डिटर्जेन्ट पाउडर, घी में जानवरों की चर्बी इत्यादि से प्राणघातक रोग जैसे-कैंसर, ह्रदय रोग इत्यादि बीमारियों को बढ़ने की प्रबल सम्भावनाये हैं।बहराल सरकार को यह समझने की आवश्यकता है कि, प्रवर्तन दल के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की उपस्थिति से ज्यादा उनका क्षेत्र में कार्य करना ज्यादा जरूरी है तथा उन्हें समय एव उपस्थित से ज्यादा कार्य करने की स्वतंत्रता बेहद जरूरी है।शेष समाज, सरकार एव सरकार में विधमान बुद्धिजीवी स्वयं तय कर लें।

डा0 वी0के0सिंह।
(वरिष्ठ पत्रकार)

 

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