उत्तर प्रदेश दादरी तहसील राजस्व विभाग के कर्मचारियों का डर व अवैध कब्जे का व्यापार

 

सेना के जवानों की भूमि, भू माफियाओं एव गंगेस्टरों से सांठगांठ कर, लाखों रुपये लेकर कब्जा करवाइ

उत्तर प्रदेश। दादरी तहसील।उत्तर प्रदेश राजस्व विभाग के कर्मचारियों का डर व अवैध कब्जे का व्यापार, एसडीएम दादरी आलोक गुप्ता की छत्रछाया में निर्बाध फलीभूत होने का मामला प्रकाश में आया है।विश्वस्त सूत्रों प्राप्त जानकारी एव साक्ष्यों से ज्ञात हुआ है

कर्तव्यनिष्ठ एसडीएम दादरी आलोक गुप्ता अनपढ़ किसानों एव देश की सीमा पर तैनात सेना के जवानों की भूमि, पहले भू माफियाओं एव गंगेस्टरों से सांठगांठ कर, लाखों रुपये लेकर कब्जा करवा देते हैं फिर, कब्जा मुक्त करवाने के लाखों रुपये की माँग करते हैं।

उत्तर प्रदेश दादरी तहसील राजस्व विभाग के कर्मचारियों
भू माफियाओं एव गंगेस्टरों से सांठगांठ

एसडीएम दादरी आलोक गुप्ता की छत्रछाया में डर व अवैध कब्जे का व्यापार?

क्या ऐसे कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी के हाँथों दादरी तहसील अधिकारिता क्षेत्र की जनता का कल्याण होना सम्भव है? बहराल, सूत्रों की माने तो, एसडीएम दादरी द्वारा पूर्व गठित राजस्व टीम के सदस्यों ने बेईमानी एव मूर्खता में पीएचडी एसडीएम आलोक गुप्ता के मार्गदर्शन में पूर्ण कर, अनपढ़ किसान सुरेन्द्र यादव निवासी सर्फाबाद आदि की भूमि पर, अपने बेहद करीबी गैंगेस्टर रंगा यादव गैंग के विरुद्ध भा0द0सहिंता अधिनियम(1860) की धारा 302, 307, 452, 323, 324, 325, 147,148,149,- जिला गाजियाबाद के थाना मसूरी, थाना कविनगर जिला गौतमबुद्धनगर के, थाना बिसरख, व देश की राजधानी दिल्ली के थाना आरकेपुरम में लगभग 60 अभियोग पंजीकृत हैं।

इतना ही नहीं प्राप्त साक्ष्यों से ज्ञात है कि, उक्त रंगा यादव निवासी कुडिया गढ़ी के विरुद्ध एनएसए/ एव गैंगेस्टर अधिनियम की धाराओं में भी कई अभियोग विभिन्न थाना क्षेत्रों में पंजीकृत हैं किन्तु, रंगा यादव गैंग का व्यवहार एव रुतवा आमजनता के प्रति चाहें जैसा भी हो किन्तु, स्थानीय पुलिस एव एसडीएम दादरी आलोक गुप्ता तथा, प्रशासनिक अधिकारियों के प्रति सौम्य व, इच्छित वरदान देने वाली कामधेनु के समान है

जो, रंगा गैंग की ईमानदारी का प्रतीक है।राजस्व अधिकारियों की मूर्खतः में प्रमाणित पीएचडी?

दादरी तहसील राजस्व विभाग के कर्मचारियों

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दादरी तहसील अधिकारिता क्षेत्र अंतर्गत सर्फाबाद निवासी सुरेंद्र यादव ने बहलोलपुर निवासी अपने करीबी रिश्तेदार से सुरेंद्र यादव, अशरफी देवी, आरती सिंह, सर्वेश गुप्ता एव अनुभव गुप्ता आदि के नाम वर्ष 2011, 12, व 13 में 7.5 बीघा जमीन हैबतपुर मौजा के खसरा संख्या 330, व 327 से रजिस्ट्री व दाखिल खारिज कराकर, वर्ष 2011 से काबिज रहे जिसे पूर्व राजस्व निरीक्षक एव अन्य ने माना कि, वर्ष 2015 के बाद विवेक दहिया निवासी प्रीत विहार दिल्ली से रंगा यादव, प्रिंस यादव आदि की नजर उक्त बेसकीमती पर पड़ जाती है।

एसडीएम आलोक गुप्ता व हिस्ट्रीशीटर गैंगेस्टर रंगा यादव आदि, के बीच 25 लाख का लेनदेन व गुप्त करार

उक्त गैंग पूर्व राजस्व अधिकारियों खासकर एसडीएम दादरी आलोक गुप्ता के लिए इच्छित वरदान देने वाली कामधेनु सिद्ध होते हैं।उक्त गैंग ने ब-जरिये अधिवक्ता एसडीएम(जे) के न्यायालय में उत्तर प्रदेश राजस्व अधिनियम 2006 व संशोधित अधिनियम 2016 की धारा 24 में कब्जा माँगने का वाद प्रस्तुत करते हैं। तत्पश्चात, एसडीएम(जे) के न्यायालय में वाद के दौरान ही, एसडीएम आलोक गुप्ता दादरी व हिस्ट्रीशीटर गैंगेस्टर रंगा यादव आदि, के बीच 25 लाख रूपये का लेनदेन व गुप्त करार होता है।

उत्तर प्रदेश दादरी तहसील राजस्व विभाग के कर्मचारियों

जिसके प्रत्युत्तर में एसडीएम दादरी आलोक गुप्ता, तत्कालीन राजस्व निरीक्षक धर्मपाल शर्मा, व लेखपाल सरजीत आदि, कदाचित मूर्खता में पीएचडी का प्रमाण देते हुये विवेक दहिया एव रंगा यादव गैंग की रास्ता विवाद के मामूली प्रार्थना पत्र पर, सुरेंद्र यादव आदि की भूमि पर रंगा यादव के पक्ष अपने न्याय क्षेत्र से बाहर जाकर मय भारी पुलिस बल के कब्जा बेरिकेडिंग करवाते हुए कब्जा करवा देते हैं।जब मामला एसडीएम(जे) के न्यायालय में लंबित था तब, एसडीएम प्रशासनिक आलोक गुप्ता को बिना सत्यता जाने अन्य की भूमि पर कब्जा करवाने का क्या अधिकार था?

बर्बाद ए गुलिस्तां करने को बस एक ही उल्लू काफी है

उत्तर प्रदेश दादरी तहसील राजस्व विभाग के कर्मचारियों

क्या सचमुच एसडीएम आलोक गुप्ता ने कब्जा करवाने के 25 लाख रुपये एव बदले में गुप्त करार के चलते रंगा यादव गैंग द्वारा ऐसे ही विभिन्न शहरों में कब्जा की गई भूमि का कुछ अंश लाभ के वशीभूत किया था? यदि यह सही नहीं है तो, एसडीएम दादरी ने पुनः स्थिति बहाल करते हुये, अपनी भूल क्यों नहीं सुधारी?

बर्बाद ए गुलिस्तां करने को बस एक ही उल्लू काफी है। हर शाख पे उल्लू बैठा है, अंजाम ए गुलिस्तां क्या होगा?एसडीएम दादरी एव द्वारा गठित पूर्व राजस्व टीम के उल्लूपन का प्रमाण उनके आउट ऑफ जुरिसडिक्शन जाकर ज़मीन पर कब्जा देना, तथा राजस्व विभाग अभिलेखों में किसी रास्ते या चकरोड का न होना फिर भी कब्जा करवाना इनकी मूर्खता का प्रमाण है या, इनके लालच का- समाज व सरकार में बैठे बुद्धिजीवी स्वयं तय कर लें। समूचा प्रकरण एव एसडीएम दादरी आलोक गुप्ता की समुचित कार्यशैली संदिग्ध है तथा उच्च स्तरीय जाँच का विषय है।

डा0वी0के0सिंह
(वरिष्ठ पत्रकार)

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