दिल्ली पुलिस ने 24 घंटे में सुलझाया भारत आई अमेरिकी महिला के अपहरण का केस, मामला निकला फर्जी

दिल्ली पुलिस ने 24 घंटे में सुलझाया केस

दिल्ली पुलिस ने हाल ही में एक अमेरिकी महिला के फर्जी अपहरण के मामले को एफआईआर दर्ज होने के महज 24 घंटे के भीतर ही सुलझा लिया है। महिला ने अपने माता-पिता को इमोशनल ब्लैकमेल करने के लिए उनसे झूठ बोला था। महिला के अपहरण की शिकायत को अमेरिकी दूतावास ने नई दिल्ली जिला पुलिस को भेजा था।

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दरअसल, सनसनीखेज ब्लाइंड केस में महिला पर्यटक 3 मई को दिल्ली पहुंची थी और अपने परिवार को बताया था कि वह असुरक्षित वातावरण में है और एक अज्ञात व्यक्ति द्वारा उसके साथ मारपीट की जा रही है। हालांकि, उसने अपने वर्तमान स्थान के बारे में अपने परिवार को नहीं बताया था।

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भारत आने के ढाई महीने बाद दिल्ली पुलिस ने दर्ज किया था केस

नई दिल्ली जिले की दिल्ली पुलिस डीसीपी अमृता गुगुलोथ ने कहा कि यह मामला पीड़िता के भारत आने के ढाई महीने से अधिक समय के बाद दर्ज किया गया था, इसलिए, सीसीटीवी फुटेज के माध्यम से उसकी तलाश के प्रयास करने की कोई गुंजाइश नहीं थी। यह भी सुनिश्चित नहीं था कि पीड़िता भारत के कौन से हिस्से में है। तकनीकी निगरानी और पेशेवर जांच के आधार पर घटना की सूचना दिल्ली पुलिस को देने के 24 घंटे के भीतर पीड़िता को बरामद कर लिया गया है।

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डीसीपी ने कहा कि अमेरिकी दूतावास ने सूचित किया था कि एक अमेरिकी महिला मिस क्लो रेनी मैकलॉघलिन 3 मई, 2022 को दिल्ली पहुंची थी, जहां उसके साथ एक अज्ञात व्यक्ति ने मारपीट की और वह अमेरिका में अपने परिवार को घटना की सूचना देने के बाद से गायब है। पीड़िता ने ईमेल में उल्लेख किया है कि वह एक असुरक्षित वातावरण में है जहां उसे शारीरिक और भावनात्मक शोषण का सामना करना पड़ा है।

10 जुलाई को मां को वॉट्सऐप से किया था वीडियो कॉल

10 जुलाई को पीड़िता ने अपनी मां सैंड्रा मैकलॉघलिन से वॉट्सऐप पर वीडियो कॉल के जरिए बात की। पीड़िता की मां ने उसके बारे में कुछ और जानकारी जुटाने की कोशिश की, लेकिन इस दौरान एक अज्ञात व्यक्ति कमरे में दाखिला हुआ और वह ज्यादा कुछ नहीं बता पाई।

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अमृता गुगुलोथ ने कहा कि अमेरिकी दूतावास ने यह अनुमान लगाते हुए अपनी चिंता जताई थी कि पीड़िता या तो असहाय है या उसे उसके परिवार या दूतावास से संपर्क करने से रोका जा रहा है। इसके बाद 15 जुलाई 2022 आईपीसी की धारा 364/365 के तहत दिल्ली पुलिस  चाणक्यपुरी थाने में एक एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी।

दिल्ली पुलिस ने याहू से भी मांगी थी मदद

महिला के वर्तमान ठिकाने का पता लगाने के लिए 9 जुलाई को अमेरिकी नागरिक सेवाओं को ईमेल भेजने के लिए लड़की द्वारा उपयोग किए गए आईपी एड्रेस को प्रदान करने के लिए Yahoo.com से सहायता मांगी गई थी। इसके अलावा, ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन से भी अनुरोध किया गया था कि वह महिला के ठिकाने का पता लगाने के लिए उसका इमिग्रेशन फॉर्म प्रदान करे। इमिग्रेशन फॉर्म की डिटेल के अनुसार, उसने अपना रहने का पता खसरा नंबर 44 और 45, ग्रेटर नोएडा, उत्तर प्रदेश के रूप में दिया था।

दिल्ली पुलिस ने कहा कि रेडिसन ब्लू होटल का पता खोजने के लिए एक टीम को मौके पर भेजा गया था। होटल में पूछताछ की गई और यह पाया गया कि ऐसे किसी व्यक्ति ने होटल में चेक इन नहीं किया था। इसके बाद, उसके वॉट्सऐप नंबर द्वारा इस्तेमाल किए गए आईपी एड्रेस का पता लगाने के लिए नई दिल्ली जिले की साइबर यूनिट से तकनीकी सहायता ली गई थी।

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वीडियो कॉल के लिए किया वाई-फाई डेटा का इस्तेमाल

वॉट्सऐप से प्राप्त जानकारी के विश्लेषण में यह पाया गया कि पीड़िता ने किसी के वाई-फाई डेटा का इस्तेमाल किया था। आईपी एड्रेस से जुड़े मोबाइल नंबर और सीएएफ में उल्लिखित वैकल्पिक मोबाइल नंबर प्राप्त किया गया और इस नंबर की डिटेल का विश्लेषण किया गया। इस अहम टिप पर कार्रवाई करते हुए उसकी दोस्त के मोबाइल नंबर को सर्विलांस पर डाल दिया गया। इन तकनीकी सूचनाओं और परिचालन आवश्यकताओं के आधार पर विभिन्न टीमों का गठन किया गया और पीड़िता का पता लगाने के लिए संदिग्ध स्थानों पर भेजा गया।

नतीजतन, पुलिस टीम हरियाणा के गुरुग्राम से एक 31 वर्षीय नाइजीरियाई नागरिक ओकोरोफोर चिबुइके ओकोरो उर्फ ​​रेची को पकड़ने में सफल रही, जिसके मोबाइल का आईपी एड्रेस महिला ने अपनी मां को वॉट्सऐप कॉल करते समय इस्तेमाल किया था।

ग्रेटर नोएडा की इम्पीरिया रेजीडेंसी में मिली महिला

डीसीपी ने कहा कि निरंतर पूछताछ पर उसने महिला के स्थान का खुलासा किया और अंततः ई-707, एच2ओ इम्पीरिया रेजीडेंसी, ग्रेटर नोएडा, उत्तर प्रदेश में महिला का पता लगाया गया। पीड़िता की बरामदगी और जांच के बाद यह पता चला है कि उसने अपने माता-पिता को इमोशनल ब्लैकमेल करने के लिए घटना को अंजाम दिया था। यह भी पता चला कि उसका वीजा छह जून को समाप्त हो गया था।

फेसबुक पर हुई थी नाइजीरियन संग दोस्ती

अब तक की गई जांच के अनुसार, यह पाया गया है कि महिला की फेसबुक के माध्यम से ओकोरोफोर चिबुइके ओकोरो उर्फ ​​रेची से दोस्ती हुई थी और भारत आने के बाद वह उसके साथ ही रह रही थी।

आगे की जांच में पता चला कि ओकोरोफोर चिबुइके ओकोरो उर्फ ​​रेची का पासपोर्ट समाप्त हो गया है। पुलिस ने कहा कि वैध पासपोर्ट और वैध वीजा के बिना भारत में अधिक समय तक रहने के संबंध में कानूनी कार्रवाई की जा रही है। यह भी पाया गया है कि पीड़िता यूएसए के एक विश्वविद्यालय से स्नातक है और वह वॉशिंगटन डीसी में रहती है और उसके पिता एक पूर्व सैन्य अधिकारी हैं। उसे गाने का शौक है।

वहीं, नाइजीरियाई नागरिक ओकोरोफोर चिबुइके ओकोरो उर्फ ​​रेची वर्ष 2017 में नेटवर्क एडमिनिस्ट्रेटर का कोर्स करने के लिए भारत आया था। उसे भी गाने का शौक है। कोर्स पूरा करने के बाद उसने स्टेज परफॉर्मेंस शुरू कर दी थी। दोनों को गाने का शौक है। डीसीपी ने कहा कि संभवत: यही उनकी दोस्ती का मुख्य कारण है। इस मामले में आगे की जांच जारी है।