शराब माफियाओं एव आबकारी अधिकारियों की मिलीभगत से ओवर रेट का धन्धा?

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शराब माफियाओं एव आबकारी अधिकारियों की मिलीभगत से ओवर रेट का धन्धा?

सरकारी शराब ओवर रेट सहित किसी भी मामले में कार्रवाई नहीं होने की गारंटी मिलती है

शराब माफियाओं एव आबकारी अधिकारियों की मिलीभगत से ओवर रेट का धन्धा?

        उत्तर प्रदेश के जिला गाजियाबाद से देशी एव विदेशी शराब की सरकारी दुकानों से निर्धारित विक्रय मूल्य से 5 रुपये से 10 रुपये तक, शराब उपभोक्ताओं से वसूलने का मामला प्रकाश में आया है।विश्वस्त सूत्रों से प्राप्त जानकारी एव एकत्रित साक्ष्यों से ज्ञात है    अमन पसन्द रंगा यादव के विरुद्ध लगभग 60 अपराधिक मामले?

 गाजियाबाद के प्रत्येक सरकारी देशी एव विदेशी शराब ठेको पर, शराब उपभोक्ताओं से 5 रुपये से 10 रुपये अधिक वसूले जा रहे हैं जिससे, न केवल आबकारी अधिकारियों की बल्कि, कुछ खाना बदोश पत्रकारों के भी पौ-बारह हो रहे हैं, पत्रकारों को शराब ठेकों से माहवारी के साथ- साथ शाम रंगीन करने हेतु मुफ्त की शराब एव जेब खर्च भी मिल रहा है।

जबकि, पत्तल चाट पत्रकारों का बहुत ज्यादा फायदा तो नहीं हो रहा है बल्कि, खाना बदोश लालची पत्रकारों की एक पौआ शराब की लालच ने आबकारी अधिकारियों एवं सरकारी शराब माफियाओं को करोड़पति बना दिया है तथा, देशी व विदेशी ठेके की दुकानों में बैठे सेल्स मैनों को गली का भिखारी तथा चोर भी बना दिया है।

विश्वस्त सूत्रों से ज्ञात हुआ है कि, ठेकेदार ठेके माफियाओं ने या तो मुफ्त के या फिर न के बराबर वेतन पर शराब ठेकों पर सेल्स मैन रखे हैं जिन्हें, शराब माफियाओं एव आबकारी अधिकारियों के सँगठित भृष्टाचार ने बेबसी का चोर भी बना दिया है।

शराब के ठेकेदार अपने सेल्स मैनों को मंथली के बदले में कार्रवाई न होने की गारंटी\

शराब माफियाओं एव आबकारी अधिकारियों की मिलीभगत से ओवर रेट का धन्धा?

सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक पता चला है कि,  ठेकेदार अपने सेल्स मैनों को अधिकतम वेतन 3 हजार रुपये से लेकर 35 सौ रुपये तक देते हैं जबकि, केन्द्र सरकार एव राज्य सरकारों द्वारा एक अनपढ़ मजदूर की न्यूनतम मजदूरी 671 रुपये प्रति दिन, प्रति 8 घण्टा है। ठेकेदारों का कहना है-

नो संडे नो मनडे अर्थात नो हॉलिडे, प्रति दिन प्रातः 10: 0 बजे से रात्रि 10:30 ड्यूटी बट, विथआउट वेतन, 5 से 10 रुपये उपभोक्ता से अधिक वसूल कर अपना वेतन निकालो जिसका 50 फीसदी जिला आबकारी अधिकारी राकेश कुमार एव आबकारी निरीक्षक आशीष पाण्डेय एव कर्मचारियों वितरित होने के बाद शेष 50 फीसदी प्रतिदिन सेल्स मैनों आपस मे बाँट लिया जाता है।

मंथली के बदले में कार्रवाई न होने की गारंटी : दरअसल  ठेके के संचालन में लोकेशन, समय, बिक्री रिकार्ड, रेट बोर्ड, स्टाफ की वर्दी, सीसी कैमरा से लेकर दर्जनों नियम-पाबंदियां हैं। ठेके के बाहर या आसपास पुलिस गश्त या आबकारी पुलिस वाहन खड़ा हो जाए तो ग्राहक गायब हो जाते हैं।              Govt jobs in Delhi 2022 | delhi.gov.in – 15 September 2022

सरकारी शराब जिला आबकारी अधिकारी एव कर्मचारियों की प्रतिदिन अनैतिक आय 2 से पांच लाख़

ये नौबत न आए इसलिए ठेकेदार पहले ही मंथली सेट कर बला टाल देते हैं। बदले में अवैध ब्रांचों से बिक्री, ओवर रेट सहित किसी भी मामले में कार्रवाई नहीं होने की गारंटी मिलती है। सरकार के बनाए नियमों ही ढाल बना दिया जाता है। ओवररेट बेचने पर केस बनाकर जुर्माना लगता है। इसके बाद सेटिंग हो जाती है।रजामंदी से ओवररेट का छोटा केस बनता है। अवैध बिक्री में 1या 2 पेटी का केस लगा सरकारी आंकड़ों की पूर्ति कर दी जाती है। यही व्यवस्था शराब तस्करी और अन्य आबकारी नियमों के मामलों में भी रहती है। न्यूनतम बिक्री के नियम की गली भी अफसरों ने ही अवैध ब्रांच के रूप में ईजाद की है।

जिला आबकारी अधिकारी एव कर्मचारियों की प्रतिदिन अनैतिक आय 2 से पांच लाख़ है

शराब माफियाओं एव आबकारी अधिकारियों की मिलीभगत से ओवर रेट का धन्धा?

ठेकों से दोगुनी बिक्री अवैध ब्रांच से : पूरे जिले में शराब ठेकों से कमाई का नया जरिया ’ब्रांच्र’ है। हर ठेकेदार स्वीकृत दुकान के अलावा अपने एरिया के गली-मोहल्लों में लकड़ी के खोखे, अंडे की ठेली, सूने ठिकानों पर शराब बेचता है। इसके उसे दो फायदे होते हैं, एक को न्यूनतम बिक्री का सरकारी टारगेट पूरा जाता है। दूसरा यहां कोई नियम लागू नहीं होता मौके के मुताबिक मनमानी कीमत और समय पर बिक्री से इतनी कमाई हो जाती है, जितनी ठेके पर भी नहीं होती

कुलमिलाकर, परिणाम यह कि, कानून सबके लिये बराबर है, इससे बड़ा झूँठ हमारे देश के संविधान एव कानून में और कोई नहीं हो सकता है।बहराल, जिला गाजियाबाद में जिला आबकारी अधिकारी एव कर्मचारियों की प्रतिदिन अनैतिक आय 2 से पांच लाख़ है जोकि, गलत है, यह धांधली बन्द होनी चाहिए। अब ओवर रेट का धन्धा बन्द होता है या फिर, जाँच एजेंसियां स्वयं संगठित भ्र्ष्टाचार का हिस्सा बनेंगी?