
देश वैश्विक चुनौतियों के बावजूद स्थिरता के साथ आगे बढ़ रहा है

भारत दुनिया का सबसे अधिक मांग लगातार घटती महंगाई, उच्च विकास दर और ब्याज दरों में नरमी के दम पर भारत दुनिया का सबसे अधिक मांग वाला उपभोक्ता बाजार बनने के लिए तैयार है। देश न सिर्फ बड़े ऊर्जा परिवर्तन से गुजरेगा, बल्कि गिरती ब्याज दरों के कारण जीडीपी की तुलना में कर्ज में भी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। खास बात है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में विनिर्माण क्षेत्र की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ेगी। इन सबका असर मांग पर पड़ेगा, जो आने वाले वर्षों में तेजी से बढ़ेगी। मॉर्गन स्टैनली ने एक रिपोर्ट में कहा, भारतीय जीडीपी में कच्चे तेल की घटती हिस्सेदारी, वस्तु के साथ सेवाओं के निर्यात में वृद्धि, बढ़ता सरप्लस (अधिशेष) और राजकोषीय समेकन के कारण देश वैश्विक चुनौतियों के बावजूद स्थिरता के साथ आगे बढ़ रहा है। इन कारकों की वजह से बचत के मोर्चे पर असंतुलन में कमी आएगी, जिससे अर्थव्यवस्था में संरचनात्मक रूप से कम ब्याज दरें वास्तव में संभव होंगी। यह ग्राहकों के लिए राहत की बात है।>>>Visit: Samadhanvani
कीमतों की तुलना में आम लोगों की आय बढ़ सकती है

आम लोगों की बढ़ेगी कमाई शेयर बाजार में बढ़ेगी हिस्सेदारी मॉर्गन स्टैनली ने अपनी रिपोर्ट में कहा, उच्च विकास दर, कम अस्थिरता, घटती ब्याज दर और सरकार के नीतिगत प्रयासों के संयोजन से मूल्य-आय अनुपात में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इसका मतलब है कि कीमतों की तुलना में आम लोगों की आय बढ़ सकती है। यह परिदृश्य घरेलू बैलेंस शीट में इक्विटी की ओर बदलाव को बढ़ावा देगा यानी शेयर बाजार में खुदरा निवेशकों की भागीदारी बढ़ेगी। हालांकि, अमेरिकी टैरिफ के कारण बाजारों में अभी अस्थिरता का माहौल है।



