5 फरवरी, रविवार को सूर्य और चंद्रमा की पूजा का पर्व है

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5 फरवरी, रविवार को सूर्य और चंद्रमा की पूजा का पर्व है

5 फरवरी, रविवार को सूर्य और चंद्रमा की पूजा का पर्व है

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5 फरवरी, रविवार को सूर्य और चंद्रमा की पूजा का पर्व है। इस दिन माघ महीने की पूर्णिमा रहेगी। ग्रंथों के मुताबिक लंबी उम्र और हमेशा सेहतमंद रहने की कामना से इस पर्व पर उगते हुए सूर्य और शाम में चंद्रमा को अर्घ्य देने की परंपरा है। पुराणों में माघी पूर्णिमा पर स्नान, दान के साथ व्रत- उपवास करना विशेष फलदायी बताया गया है। पिछले एक महीने से रोज माघ स्नान कर रहे लोगों का तीर्थ स्नान का व्रत माघी पूर्णिमा के साथ रविवार को पूरा हो जाएगा।

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पूर्णिमा पर चंद्रमा को दिया गया अर्घ्य पितरों तक पहुंचता है

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ग्रंथों में बताया गया है कि पूर्णिमा पर चंद्रमा को दिया गया अर्घ्य पितरों तक पहुंचता है। जिससे पितृ संतुष्ट होते हैं। माघ महीने की पूर्णिमा पर चंद्रमा अपने मित्र सूर्य की राशि में रहेगा। इसलिए इसका प्रभाव बढ़ जाएगा। विद्वानों का कहना है कि नीरोगी रहने के लिए इस दिन औषधियों को चंद्रमा की रोशनी में रखकर अगले दिन खाना चाहिए। ऐसा करने से बीमारियों में राहत मिलने लगती है।ये पर्व माघ महीने का आखिरी दिन होता है। माघ में की गई सूर्य पूजा से रोग और दोष दूर हो जाते हैं।

सुबह जल्दी उठकर भगवान सूर्य को जल चढ़ाया जाता है

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इसलिए इस महीने के खत्म होते वक्त सुबह जल्दी उठकर भगवान सूर्य को जल चढ़ाया जाता है। उत्तरायण के चलते इस दिन उगते हुए सूरज को अर्घ्य देने से उम्र बढ़ती है और बीमारियां खत्म होती हैं। इस दिन स्नान के बाद ऊँ घृणि सूर्याय नम: मंत्र का जाप करते हुए सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए।डॉ. मिश्र का कहना है कि इस पर्व में यज्ञ, तप और दान का विशेष महत्व है। इस दिन स्नान के बाद भगवान विष्णु की पूजा, पितरों का श्राद्ध और जरूरतमंद लोगों को दान करने का विशेष फल है।

मकर संक्रांति की तरह इस दिन भी तिल दान का विशेष महत्व है

जरूरतमंद को भोजन, वस्त्र, तिल, कंबल, गुड़, कपास, घी, लड्डू, फल, अन्न, पादुका आदि का दान करना चाहिए।मकर संक्रांति की तरह इस दिन भी तिल दान का विशेष महत्व है। पुरी के ज्योतिषाचार्य डॉ. गणेश मिश्र बताते हैं कि माघ पूर्णिमा गंगा-यमुना के किनारे संगम पर चल रहे कल्प वास का आखिरी दिन होता है। फरवरी इस दिन पूरे महीने की तपस्या के बाद शाही स्नान के साथ कल्प वास खत्म हो जाता है। इसलिए धार्मिक नजरिये से माघ पूर्णिमा का विशेष महत्व है।

गंगाजल का स्पर्श करने से मनुष्य को वैकुण्ठ लोक की प्राप्ति होती है

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स्नान-दान की सभी तिथियों में इसे महापर्व कहा जाता है। माघ पूर्णिमा 5 फरवरी 2023 फरवरी को मनाई जाएगी। इसे माघी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। माघ पूर्णिमा के दिन स्नान और दान का काफी महत्व होता है। माघ मास भगवान विष्णु को अतिप्रिय है। शास्त्रों के अनुसार माघ पूर्णिमा के दिन श्री हरि गंगाजल में वास करते हैं इसलिए इस दिन गंगा में स्नान करने का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन गंगाजल का स्पर्श करने मात्र से भी मनुष्य को वैकुण्ठ लोक की प्राप्ति होती है।

इस दिन पूजा करने से व्यक्ति को सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है

आज के दिन सुबह सूर्योदय से पूर्व किसी पवित्र नदी या घर पर ही मन में गंगा मैया का ध्यान कर स्नान करके के बाद भगवान विष्णु एवं माता लक्ष्मी की पूजा करने से व्यक्ति को सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार माघ पूर्णिमा पर ही गंगा स्नान करने से पूरे वर्ष की साधना का फल मिल जाता है। इस दिन गंगा आदि सहित अन्य पवित्र नदियों में स्नान करने से पाप एवं संताप का नाश होता है, मन एवं आत्मा शुद्ध होती है। इस दिन किया गया महास्नान समस्त रोगों का नाश करके दैहिक,दैविक और भौतिक कष्टों से मुक्ति दिलाता है।

श्री विष्णु और माता लक्ष्मी की असीम कृपा बनी रहती है

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स्नान और दान के वक्त ‘ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः’ का मानसिक जप करते रहना चाहिए। यदि आप गंगा स्नान नहीं कर पा रहे हैं तो गंगाजल के छींटे मारकर पुण्य लाभ ले सकते हैं। स्नान के बाद पात्र में काले तिल भरकर एवं साथ में शीत निवारक वस्त्र दान करने से धन और वंश में वृद्धि होती है। इस दिन भगवान सत्यनारायण की कथा करने से श्री विष्णु और माता लक्ष्मी की असीम कृपा बनी रहती है। सुख-सौभाग्य, धन-संतान की प्राप्ति होती है।

पूजा कर सफ़ेद पुष्प अर्पित करके खीर का भोग लगाना चाहिए

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विद्या प्राप्ति के लिए इस दिन मां सरस्वती की विधि-विधान से पूजा कर सफ़ेद पुष्प अर्पित करके खीर का भोग लगाना चाहिए। इस दिन पितरों को तर्पण करना बहुत ही फलदायी माना गया है। ऐसा करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है तथा आयु एवं आरोग्य में वृद्धि होती है। माघ पूर्णिमा पर स्नान करने से सूर्य और चंद्रमा जनित दोषों से मुक्ति मिलती है। माघ माह पूर्णिमा तिथि 4 फरवरी को रात्रि 09 :29 मिनट से शुरू होकर 5 फरवरी रात्रि 11: 58 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार माघ पूर्णिमा 5 फरवरी फरवरी 2023 को मनाई जाएगी।

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