
चीन ने कहा, सुरक्षा और विकास हितों की दृढ़ता से रक्षा करेंगे>>>Visit: Samadhanvani

भारत के बाद अब चीन ने भी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रूस और ईरान से तैल न खरीदने की अपील को ठुकरा दिया है। स्टॉकहोम में दो दिनी व्यापार वार्ता के बाद, चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा चीन हमेशा अपनी ऊर्जा आपूर्ति को ऐसे तरीकों से सुनिश्चित करेगा जो हमारे राष्ट्रीय हितों को पूरा करें। मंत्रालय ने कहा, जबरदस्ती और दबाव से कुछ हासिल नहीं होगा। चीन “अपनी संप्रभुता, सुरक्षा और विकास हितों की दृढ़ता से रक्षा करेगा लेकिन अमेरिका के आगे झुकेगा नहीं। ट्रंप ने इससे पहले भारत से रूसी तेल खरीदी रोकने को कहा, जिसे भारत ने खारिज कर रूस व ईरान से तेल खरीदना जारी रखा। अब अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा, हम. चीनी संप्रभुता में बाधा डालना नहीं चाहते, अतः उसे 100% टैरिफ दे सकते हैं। हम हमेशा अपनी ऊर्जा आपूर्ति को अपने राष्ट्रीय हित के हिसाब से तय करेंगे। ट्रंप की 100% टैरिफ की धमकी पर चीन ने कहा, अमेरिकी धमकियों से उसे कुछ नहीं मिलेगा, क्योंकि हम अपनी संप्रभुता को गंभीरता से लेते हैं।
रूस-ईरान से आयात और यह चीन सख्ती बरत रहा

ईरान का 80-90% तेल चीन को जाता है। चीन हर दिन 10 लाख बैरल से ज्यादा ईरानी तेल खरीदता है, जो उसकी अर्थव्यवस्था के लिए बहुत जरूरी है। हाल ही में जब ईरान ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को बंद करने की बात की तो चीन ने विरोध किया। वहीं, भारत के बाद चीन रूस का दूसरा सबसे बड़ा तेल खरीदार भी है। अप्रैल में चीन ने रूस से 13 लाख बैरल प्रतिदिन तेल आयात किया, जो पिछले महीने से 20% ज्यादा था जब ट्रंप ने अप्रैल में दर्जनों देशों पर टैरिफ लगाने की एक व्यापक योजना का खुलासा किया, तो चीन एकमात्र ऐसा देश था जिसने जवाबी कार्रवाई की। उसने अमेरिकी दबाव के आगे झुकने से इन्कार कर दिया। बीजिंग स्थित अंतरराष्ट्रीय व्यापार-अर्थशास्त्र विवि में चाइना इंस्टीट्यूट डब्ल्यूटीओ के निदेशक तु शिनक्वान बोले, अगर अमेरिका टैरिफ लगाता है, तो चीन अंत तक लड़ेगा और यह चीन का लगातार आधिकारिक रुख है।



