
मौलिक अधिकारों,संवैधानिक अधिकारों एवं विधिक अधिकारों का हनन

कानून के हाल ही में दिनांक 03 दिसम्बर 2025 की रात थाना सेक्टर-126 में एक महिला अधिवक्ता जो अपने क्लाइंट की तरफ से सीरियस हेड इंजरी मामले में एफआईआर दर्ज करवाने गयी थी, थाना सेक्टर -126 नोएडा पुलिस के द्वारा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 22 व सीआरपीसी 1972 की धारा 46(4) का उलंघन करते हुये जबरन विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के विरुद्ध लगभग 4 घण्टे पुलिस हिरासत में रखे जाने का मामला प्रकाश में आया है.विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी से ज्ञात हुआ है कि, महिला अधिवक्ता जो अपनी विधिक कर्तव्यों का निर्वहन कर रही थी को, न केवल विधि विरुद्ध मजिस्ट्रेट अनुमति के पुलिस हिरासत में रखा गया बल्कि, जबरन उसके कपडे उतारने का प्रयास किया गया बल्कि, सेक्सुअल मोलेस्ट्रेशन का भी प्रयास किया गया और, भद्दी भद्दी गालियाँ भी दी गयीं थी. वैसे पुलिस थानों में किसी पीड़ित की एफआईआर का आसानी से दर्ज न किया जाना कोई आम बात नहीं ये बात तो सचमुच मानने वाली है कि, अक्सर थानों में कानून एवं संविधान पुलिस वालों के रहमों- करम पर रखैल की तरह उनके पैरों में पड़ा होता है और, कदाचित संविधान भी पुलिस पूँछकर ही जीने भर के लिये गिनती की साँसे ही लेता है. न केवल उत्तर प्रदेश की नोएडा पुलिस ही नहीं बल्कि, देश भर के विभिन्न प्रदेशों व थानों की पुलिस ने अध्यह्मा साहस का परिचय देते हुये फ़ौजियों तक की वर्दी उतारकर उन्हें पीटा है और, उनकी पत्नियों की आबरू ठीक वैसे ही तार तार की है जैसे द्वापर में धृतराष्ट्र पुत्र दुर्योधन ने भरे दरबार में पांचाली का वस्त्र हरण करवाया था. अगर थाना सेक्टर -126 नोएडा की पुलिस ने एक महिला अधिवक्ता का ब्लैक कोट फाड़ दिया, जिसे पहनकर वह आम व खास लोगों को न्याय दिलाकर इतराती थी कोई बड़ा गुनाह नहीं किया? आखिर पुलिस भी तो सरकार के उसी सड़े गले तंत्र का हिस्सा है जो, आम आदमी के मौलिक अधिकारों, मनवाधिकारों, संवैधानिक अधिकारों एवं विधिक अधिकारों का हनन करने के बाद ज़ीरो टॉलरेंस की बात बड़े ही मुखर होकर बेशर्मी की सारी हदे पार करके रखती है.>>>Visit: Samadhanvani
संविधान माननीय सर्वोच्च न्यायालय में, न्याय के लिये गुहार

यदि सचमुच सरकार व प्रशासन ईमानदारी से काम करें तो, जनता के पैसों पर किसी अपराधी व हत्यारे को पुलिस सुरक्षा न दी जाये, अपराधियों को शस्त्र लाइसेंस न जारी किये जाये और, अगर किसी अपराधी के पास शस्त्र लाइसेंस है भी तो, तत्काल प्रभाव से क्यों न रद्द किये जाये. बहराल नोएडा में दिनांक 15 दिसंबर 2025 को थाना बादलपुर एसएचओ ने भी एक भू-माफिया के कहने पर, एक आम आदमी जो दो जून की दाल रोटी बड़ी मुश्किल से कमाता है, को 4 घण्टे गैर कानूनी ढंग से सिर्फ वर्दी की ताकत दिखाने हेतु, पुलिस हिरासत में रखा और, बाद में उसे धमकी देते हुये छोड़ दिया कि, आगे से ध्यान रखे कि, वह स्थानीय माफिया के विरुद्ध मुँह न खोले. बहराल, पुलिस का आम जनता के प्रति मनमानी स्वरूप सरकार व पुलिस के बीच किसी गुप्त करार की प्रतिवद्धता का परिणाम है या पुलिस ही संविधान और कानून की शक्तियों का दुरूपयोग करती है, सरकार व पुलिस के बीच आपस की बात है आपस में ही समझें, ट्विटर हैंडल एक्स पर ट्वीट के बाद भी एसएचओ पर कोई विभागीय कार्यवाही हुईं, ऐसा कुछ देखने को नहीं मिला? महिला अधिवक्ता अन्तर्गत अनुच्छेद 32 भा0संविधान माननीय सर्वोच्च न्यायालय में, न्याय के लिये गुहार लगा रही है, सुनवाई की तारीख़ दिनांक 07 जनवरी 2026 निर्धारित है.
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डा0वी0के0सिंह
(वरिष्ठ पत्रकार)



