
बलात्कार के आरोपी और पीड़िता के पिता की न्यायिक हिरासत में हत्या

बलात्कार के आरोपी हाई कोर्ट / हाल ही में दिनांक 23 दिसम्बर 2025 को उन्नाव रेप पीड़िता मामले में, मुख्य आरोपी पूर्व बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की निचली अदालत की सजा को निलंबित करते हुये ज़मानत दे दी है. अब जरा सोचिये कि, क्या दिल्ली हाई कोर्ट की डिवीज़न बेंच ने पीड़िता के साथ न्याय किया है या फिर सिर्फ अपना फैसला थोपा है? जमानत देने के पीछे दोनों न्यायमूर्तियों का कानूनी विश्लेषण उनके कानूनी ज्ञान पर प्रश्न चिन्ह लगाने के लिये पर्याप्त है? न्यायमुर्तियों का कहना है, चूँकि आरोपी पब्लिक सर्वेंट नहीं है, इसलिए उसे दया के आधार से वंचित नहीं किया जा सकता है, कदाचित न्यायमूर्तिगणो ने भारतीय दण्ड सहिंता (1860) की धारा 21 जो पब्लिक सर्वेंट की व्याख्या करती है या तो ठीक से पढ़ी ही नहीं या फिर दिमांग में गोबर भरा हुआ है और, यदि सब ठीक है तो निश्चय ही पीड़िता द्वारा जजों पर लगाये गये भ्र्ष्टाचार के आरोप सही हैँ? बहराल सच कुछ भी हो किन्तु, इतनी सच्चाई तो जरूर है कि, कुलदीप सेंगर की सजा का निलंबन, बलात्कार के आरोपी और पीड़िता के पिता की न्यायिक हिरासत में हत्या करवाने के आरोपी, पीड़िता की सड़क दुर्घटना में जान से मारने का प्रयास करने वाले देश के महान नेता की सजा निलंबित करके, जमानत देने का जो महान कार्य किया है, निश्चय ही गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में प्रकाशित होने लायक है? वैसे भी हमारा देश विश्वगुरु बनने को ओर अग्रसर है और, रामराज्य की स्थापना हो चुकी है >>>Visit: Samadhanvani
दिल्ली उच्च न्यायालय वश्विक महामारी प्राणघातक कोरोना वायरस से भी ज्यादा घातक है

देश का एक जिम्मेदार नागरिक व जिम्मेदार पत्रकार होने के नाते देश की न्यायपालिका व सरकार से एक सवाल जरूर पूँछना चाहूँगा कि, मौजूदा परिस्थितियों में भाजपा के नेताओं में बलात्कारियों की संख्या ज्यादा क्यों बढ़ रही है? कोई तो बीच राष्ट्रीय राज्यमार्ग पर स्त्री को नंगा करता है तो, कोई नशीला पदार्थ खिलाकर और, अगर जाँच एजेंसियाँ निष्पक्ष जाँच कर रहीं हैँ तो फिर, कैसे न्यायपालिका बलात्कार के आरोपियों को जमानत पर छोड़ रही है. अगर यही सब करना है तो फिर भाजपा के बहूचर्चित नारा ” बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओII” इस नारा का क्या है? आखिर प्रधानमंत्री कौन सी बेटियों को बचाने की बात करते है? क्या सिर्फ श्रवणो की बेटियां बचाई जाएंगी, उन्नाव रेप पीड़िता अनुसूचित जाति से आती है, क्या इसलिए कुलदीप सेंगर जिसने न केवल उत्तर प्रदेश की सरकार बल्कि क्षत्रिय धर्म को भी कलंकित किया है, ऐसे अपराधी को यदि न्यायालय से दया के आधार पर, अपराध करते समय सिटींग विधायक को पब्लिक सर्वेंट न मानकर अगर जमानत दी जा सकती है तो फिर, निश्चय ही दिल्ली उच्च न्यायालय वश्विक महामारी प्राणघातक कोरोना वायरस से भी ज्यादा घातक है जो, नये सिरे से कुख्यात गैंगेस्टर विकास दुबे, अतीक अहमद, एवं मुख़्तार अंसारी जैसे- सभ्य समाज के शत्रुओं को ही जन्म दे रही है? भाजपा शासित उत्तर प्रदेश सरकार के मुखिया जी से क्या सवाल करूँ, बात तो हमेशा ही जीरो टॉलरेंस की होती है किन्तु, बात जब अपने ही विधायक, मंत्री या नेता की हो तो, बिलडोज़र में तेल ख़त्म हो जाता है, और इंजन में जंक लग जाता है? सचमुच भारत विश्वगुरु की ओर अग्रसर है?



